बस्ती। कहना गलत नहीं होगा कि हरीश द्विवेदी को अपने 35 साल के राजनैतिक जीवन का सबसे अमूल्य तोहफा उन्हें राष्टीय महामंत्री के रुप में मिला। इस तोहफे को पाने के लिए लोग पूरी जिंदगी बीता देते हैं, फिर भी उन्हें नहीं मिलता। राष्टीय अध्यक्ष नितिन नवीन के टीम में षामिल होना किसी भी भाजपाई के लिए एक सपना होता, अब यह सुनील बंसल की लाइन में खड़े हो गए, इसे इनकी मेहनत का फल भी कहा जा सकता हैं, ऐसा मेहनत का फल जिसे हर कोई खाने की तमन्ना रखता है। राष्टीय महामंत्री बनकर एक तरह से इन्होंने बस्ती का नाम रोशन किया, और बस्ती को देष के पटल पर रखा। राष्टीय महामंत्री बनने का गौरव हासिल करने वाले मंडल के पहले भाजपा नेता बन गए है। किसी और को खुशी हो न हो, लेकिन बस्ती के भाजपाईयों के लिए बड़ी खुशी की बात है। जिस तरह राष्टीय अध्यक्ष ने इनका पर भरोसा जताया है, उस भरोसे को कायम रखना इनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन गई है। वैसे इनके बारे में मषहूर है, कि इन्हें आज तक जो भी जिम्मेदारी मिली, उसमें यह सॅफल हुए, इसी सफलता के चलते आज इन्हें राष्टीय महामंत्री जैसी जिम्मेदारी दी गई है। अब बस्ती के लोगों की अपेक्षाएं इनसे बढ़ गई है। जाहिर सी बात हैं, इनके महांमत्री बनने से संगठन मजबूत होगा। इनकी सबसे बड़ी चुनौती बस्ती में 2017 की स्थित को वापस लाना होगा, और यह तभी संभव होगा, जब गुटबाजी समाप्त होगी, और असंतुष्ट कार्यकर्त्ता खुश होगें। टिकट बटवारें के मामले में इन्हें उन लोगों को प्राथमिकता देनी होगी, जो पार्टी के प्रति वफादार हैं, इसके लिए इन्हें ‘रिवार्ड और पनीश’ के फारमूले पर विचार करना होगा, जैसी जिसकी भागीदारी वैसा उनकी उनकी हिस्सेदारी पर चलना होगा। अगर इन्होंने 2027 में टिकट बटवारें को लेकर पारदर्शित नहीं दिखाई तो इनकी सारी मेहनत बेकार जाएगी, बस्ती को लेकर इन्हें इस लिए और भी सावधान और चौकन्ना रहना पड़ेगा, क्यों कि यह इनका गृह जनपद और कर्मभूमि है, किसी को यह कहने का मौका नहीं मिलना चाहिए, कि जो व्यक्ति अपने जिले को नहीं बचा पाया, वह प्रदेश और देश को कैसे बचाएगा? विष्वासघात करने वालों से बचना होगा, इन्हें उन लोगों को बताना, समझाना और दिखाना होगा, कि हम पार्टी के हित के लिए उनके भी साथ है, जो यह एहसास कराते रहते हैं, कि साथ में नहीं। इन्हें भी सबकुछ भूलकर उन लोगों को भी गले लगाना होगा, जो यह समझते हैं, कि हरीषजी गले नहीं लगा सकतें। अब इनसे लोग बड़पन की अधिक उम्मीद करने लगें। महामंत्री बनने के बाद उन लोगों की संख्या अब बढ़ जाएगी, जो 2027 का चुनाव लड़ने के लिए बेचैन है। इनमें कुछ ऐसे भी हो सकते हैं, जो करीबी होने का नाजायज फायदा उठाने का प्रयास करेगें, ऐसे लोगों से हरीशजी को और भी अधिेक सावधान रहना होगा।
इनकी उपलब्धि पर बनकटी के अरविंद पाल सहित अन्य ने पटाखा फोड़कर और मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया। ठीक इसी तरह कुदरहा में अनिल दूबे की अगुवाई में जष्न मनाया गया। अध्यक्ष विवेकानंद मिश्रा के नेतृत्व में सभी पदाधिकारी, कार्यकर्ता और स्थानीय नेता एकत्र हुए और भव्य बधाई कार्यक्रम आयोजित किया गया। नई जिम्मेदारी मिलने पर उपस्थित कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर, गले मिलकर और पटाखे फोड़कर अपनी प्रसन्नता जताई तथा ऐतिहासिक क्षण का उत्सव मनाया। बधाई देने वालों में हरीश सिंह, राजकिषोर सिंह, देवा, डिंपल सिंह, डा. सिदीकी, प्रेम प्रकाश चौहान, अखंड प्रताप सिंह, रोली सिंह, शिवानी सिंह, शालिनी मिश्रा, नंदलाल, दिलीप पांडेय गजेंद्र सिंह, भानु प्रकाश मिश्र, वीरेंद्र गौतम, प्रेम प्रकाश चौधरी, शिवानी सिंह, अजय पाल सिंह, नीरज त्रिपाठी, सुमन सिंह, पप्पू शुक्ला, तारक जायसवाल, मनमोहन श्रीवास्तव, शरद रावत, अरविंद चौधरी, अश्वनी श्रीवास्तव, राजन ठाकुर, सुभाष श्रीवास्तव, आदित्य श्रीवास्तव, वागीश सिंह, सत्येंद्र सिंह श्भोलूश्, गौरव अग्रवाल, सचिन सिंह, राम शंकर यादव, के के दुबे, मनोज सिंह, सत्येंद्र कुमार पांडे, हनुमान प्रसाद भोलू सहित कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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