बस्ती। बुंलदशहर के रहने वाले 58 साल के डीएचओ यानि जिला होम्यो चित्किसाधिकारी अषोक कुमार सिंह ने सपने में भी यह नहीं सोचा होगा, कि उनके ही अधीनस्थ होम्योपैथिक चिकित्सालय नगर बाजार के डा. विनोद कुमार मिश्र, राजकीय होम्योपैथिक जिला अस्पताल के वरिष्ठ डाक्टर डा. संतोष कुमार दूबे, राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय कोहड़ा के डा. राकेश कुमार यादव एवं राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय रमया के डा. आशुतोष गुप्त के द्वारा उनके ही चंेबर में बंधक बनाकर उनके साथ गाली गलौज करेगें, मारपीट पर उतारु हो जाएगें, धक्का देकर रास्ता रोकेेंगें, मोबाइल को क्षतिग्रस्त कर देगें और शासकीय कार्य में बाधा डालेगें, और अनुषासनहीनता करेगें। सबसे गंभीर बात यह है, कि अगर कोई जिले स्तर का अधिकारी अपने अधीनस्थों से जान-माल का खतरा बताकर एफआईआर दर्ज करवाता हैं, तो समझ लेना चाहिए कि आराजकता चरम पर है। जब डीएचओ जैसे अधिकारी को अपने अधीनस्थों से जान का खतरा हो सकता है, तो फिर किसी को किसी से भी हो सकता, ऐसे डाक्टर्स के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, जिन गंभीर धाराओं में उक्त डाक्टर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुआ, उसे लेकर इन्हें जेल भी जाना पड़ सकता हैं, जाना भी चाहिए, क्यों कि काम ही जेल जाने लायक किया है। यह पहली बार नहीं हैं, जब डीएचओ के साथ ऐसी घटना घटित हुई,  इससे पहले भी हो चुका है, तब इन्हें हार्ट अटैक भी हुआ था, जान किसी तरह बच गई, अगर इस बार भी हार्ट अटैक हुआ होता तो कुछ भी हो सकता था, वैसे घटना के दौरान डीएचओ को हार्ट अटैक का झटका भी लगा था, और इसके लिए इन्हंे थोड़ी देर के लिए जमीन पर भी बैठना पड़ा। इस घटना ने सभी को हिलाकर रख दिया, और चारों ओर इसकी निंदा हो रही है। पहली घटना के बाद से ही डीएचओ ने मुख्य चिकित्साधीक्षक बस्ती मंडल को कार्यालय में सीसीटीवी लगवाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन नहीं दिया। लिखा था, कि बार-बार होने वाले विरोध और अभद्र व्यवहार को देखते हुए सीसीटीवी कैमरा लगना अनिवार्य हो गया है। इसके बावजूद भी डीएचओ की मांग को अनसुना कर दिया गया, जिसका फायदा बार-बार विरोध करने वाले डाक्टर्स उठाते आ रहे है।

लिखाए गए एफआसईआर में कहा गया कि वह 14 अगस्त 26 को मासिक बेैठक के दौरान होम्योथिक चिकित्सालय नगर बाजार के डा. विनोद कुमार मिश्र, राजकीय होम्योपैथिक जिला अस्पताल के वरिष्ठ डाक्टर डा. संतोष कुमार दूबे, राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय कोहड़ा के डा. राकेश कुमार यादव एवं राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय रमया के डा. आशुतोष गुप्त चेंबर में आए और उसके बाद डा. विनोद मिश्र की ओर से वाद विवाद और बहस करने लगे, कमरे का दरवाजा बंद कर दिया गया, जब विवाद बढ़ गया तो कमरे से बाहर जाले लगा, इसी दौरान डा. संतोष दूबे ने कुर्सी की ओर धक्का दे दिया, जिससे फोन छूटकर नीचे गिर गया, कवर टूट गया, फिर डा. विनोद मिश्र ने रास्ता रोक दिया। उसके बाद डा. संतोष दूबे की ओर से गालीगलौज की गई, डा. राकेश यादव, डा. आशुतोष गुप्ता के द्वारा अनुशासनहीनता का परिचय दिया गया। कहा कि मेरी आयु 58 साल की हो गई, और पूर्व में हृदय संबधी गंभीर स्वास्थ्य के कारणप हार्ट अटैेक भी हो चुका है। इस घटना के बाद से अत्यधिक मानसिक तनाव एवं शारीरिक परेशानी से गुजर रहा हूं। कहा कि बड़ी मुस्किल से उन्हें चेंबर से निकलने और बाहर आने दिया गया। कहा कि बार-बार मना करने और यह कहने के बावजूद कि अगर मेरे से कोई परेशानी हो तो उसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से करिए, लेकिन यह लोग नहीं माने, ओैर अपमानित करते रहें। यह भी कहा कि मेरा डीएससी यानि ‘डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट’ कहीं गायब हो गया, और आशंका है, कि उसका दुरुपयोग भी हो सकता है। डीएचओ ने जान माल का खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की है। पूरे प्रदेष में इस तरह की पहली ऐसी घटना होगी, जिसमें डीएचओ को ही उनके अधीनस्थों की ओर से बंधक बनाया गया हो।