‘हरीशजी’ का ‘बाल’ के साथ ‘दिमाग’ भी उड़ ‘गया’
बस्ती। एक दिन पहले सोशल मीडिया पर यह बहस हो रही थी, कि पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी और वर्तमान सांसद राम प्रसाद चौधरी में से किसने सबसे अधिक विकास दिया। इसे लेकर जो कमेंट आया, वह काफी रोचक रहा। यह बहस एक दिन पहले नगर पंचायत बनकटी में स्टेडिएम के भूमि पूजन के दौरान पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी ने पत्रकारों से कहा था, कि जाकर बाबूजी से पूछिए कितना विकास किया, हमसे से तो आप लोग बहुत सवाल कर चुके हैं, अब सवाल करने की बारी बाबूजी से है। सबसे रोचक कमेंट दुर्गेश चौधरी ने किया कहा कि हरीश जी का बाल के साथ-साथ दिमाग भी उड़ गया। सौरभ दूबे लिखते हैं, कि बिना फालतू के ज्ञान पेलने वालों एक हजार करोड़ का बजट पास हुआ था, हाईवे के पास, जितना भी पूर्व सांसद ने किया बढ़िया ही किया। जैसराम चौधरी कहते हैं, देईसाड़ से डीहीखास के नहीं बनवा पाए, अब जाकर दूधराम के सौजन्य से बन रहा। आरएस यादव लिखते हैं, कि सुना है, कि पूर्व सांसदजी के 10 साल की कमाई से हिमाचल प्रदेश में एक आलीशान रिजोर्ट बनवाए हैं, और बस्ती में एक हास्पिटल भी निर्माणधीन हैं, कोई भी नेता हो वह अपनी संपत्ति बनाने में लगा, किसी को जनता की नहीं पड़ी। अयांष चौधरी कहते हैं, कि अरे दस साल में जो विकास की गंगा बही, वह गंगा में बह गया, केवल एक जगह बस्ती का विकास हुआ, जनता उसे जानती। राजकुमार सिंह दुर्गेश कहते हैं, कि आपने कौन सा कितना काम करवा दिया, बस बस्ती में बीजेपी को चार हिस्सो में बांट दिया, पहला हरीश द्विवेदी, दूसरा अजय सिंह, तीसरा संजय चौधरी और चौथा रविसोनकर। धतुरा तिवारी कहते हैं, कि खुद तत्कालीन सांसद के गोद लिए गांव के बारे में भी व्याख्या कीजिए महोदयजी। ज्ञान प्रकाश सैनी कहते हैं, केंद्र सें लेकर राज्य तक तुम्हारी ही सरकार है, और तुम 10 सांसद थे, क्या किया। शौर्य प्रताप चौधरी लिखते हैं, कि बाउजी कुछ नहीं किए तो इन्होंने ही कौन सा बड़का झंडा गाड़ दिया। डा. प्रिंस चौधरी कहते हैं, कि ऐसा विकास करो कि गांव के लोग ही तुम्हारे खिलाफ हो जाएं। कृपाशंकर द्विवेदी लिखते हैं, कि आपने बस्ती का बेड़ा गर्द कर दिया था, पूर्व और अब भी कर रहे है। अतुल कुमार रिंकू कहते हैं, कि जब से बाबूजी जातिवाद का सहारा लेकर और झूठा अफवाह फैलाकर चुनाव जीते हैं, तब से विकास कार्य ठप्प है। जनता इससे बहुत दुखी है, अगर चुनाव हो जाए तो भारी मतों से हार जाएगें। योगेंद्र मणि त्रिपाठी कहते हैं, कि ठेकेदारों और दलालों की फौज खड़ा करने के आलावा किया भी क्या? इतनी आत्ममुग्धता भी ठीक नहीं। दूसरों का उपहास करने से पहले स्वंय के भतर झांक लेना उचित होगा। कहैंया पटेल कहते हैं, कि अगर आप कुछ बोलेगें तो आपके सत्ता में आने का योगदान में भी बाबूजी का नाम आएगा। अमित चौधरी लिखते हैं, कि पूर्व सांसदजी ने इतना काम किया है, कि बाबूजी के लिए कुछ बचा ही नहीं, इस लिजए वह आराम कर रहें है। अर्पित पटेल कहते हैं, कि बाबूजी बस्ती ही नहीं पूरे प्रदेश के नता है, रही बात हरीश द्विवेदीजी की तो यह न्यूज चैनल पर आने के लिए बेफजूल बयान देते रहते है, बस्ती की जनता ने नकार दिया तो छटपटाहत होना लाजिमी। अजीत चौधरी कहते हैं, कि बाबूजी के रहमो करम पर सांसद बनने वाले बाबूजी से सवाल कर रहें है। राजेष चौधरी कहते हैं, कि इन्होंने अपनी जाति के लोगों का अन्याय करने में पूरा सहयोग दिया, वहीं छोटी जाति के लोगों के साथ अन्याय करने में पूरा सहयोग दिया। आरके सिंह लिखते हैं, कि बस्ती लोकसभा से कभी हरीषजी नहीं जीत सकते। रविंद्र यादव कहते हैं, कि इन्होंने 10 साल अपना घर और कुछ सजातीय लोगों का सहयोग किया। सैकड़ों लोगों पर मुकदमा दर्ज करवाया, सत्ता के हनक में प्रधान, बीडीसी, जिला पंचायत सदस्य, जिला पंचायत अध्यक्ष एवं प्रमुख जैसे पदों पर विपक्ष के लोगों का पर्चा ही दाखिल नहीं होने दिया। विक्रम चौधरी लिखते हैं, कि हरीशजी ने पिछले दस सालों में जितना काम किया उतना कोई भी सांसद ने नहीं किया। जनता की ओर से जो भी कमेंट आते हैं, उन्हें नेताओं को बहुत ही ध्यान से समझना और उसकी मानिटरिंग करनी चाहिए, क्यों कि आम जनता जो कहती है, वह सच ही कहती है। उससे किसी भी नेता से कोई मतलब नहीं होता, उसे तो विकास चाहिए, लेकिन अफसोस नेता वही नहीं करते जो जनता चाहती है, इसी लिए जनता बदलाव कर देती है।
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