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गलत तथ्य रखना और गुमराह करके झूठ बोलना अधिकारियों की प्रवृत्ति का हिस्सा बन गई है।
ताजा उदाहरण बाराबंकी की घटना है।
जिस अधिकारी की गाड़ी से बत्ती और हूटर उतारा गया उनका नाम है पीसीएस मधुमिता सिंह और वो बाराबंकी के रामनगर में तैनात हैं। प्रेस नोट में इस तथ्य को छिपा लिया गया।
सवाल नम्बर 1: प्रशासन बताए कि किसकी गाड़ी से बत्ती फ्लैशर उतरा। उसका नाम और पदनाम। दिव्या सिंह नहीं तो किसकी गाड़ी थी ? ये तो स्वीकार कर रहे हैं प्रेस नोट में की बत्ती हूटर उतरा है। किसका ?
सवाल नम्बर 2: किसके आदेश पर पुलिस वालों पर तत्काल एक्शन हुआ और उन्हें लाइन हाजिर किया गया? इस तथ्य को प्रेस नोट में क्यूं छिपाया गया?
सवाल नम्बर 3: मुख्यमंत्री के आदेश का बाराबंकी प्रशासन पालना करने के बजाय अवहेलना क्यूं किया ? अवैध बत्ती और हूटर हटाने वाले दोनों पुलिस वालों के खिलाफ एक्शन क्यूं हुआ ? उन्होंने तो मुख्यमंत्री के आदेश का पालन किया तो उन्हें पुरस्कृत करने के बजाय सजा के तौर पर लाइन हाजिर क्यूं किया गया ?
क्या मुख्यमंत्री के आदेश की अवहेलना करने वाले बाराबंकी के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के खिलाफ सरकार एक्शन लेगी।
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