‘एअर होस्टेस’ पत्नी ने ‘डाक्टर’ पति को रेड हैंड ‘पकड़ा’
-अस्पताल में स्टाफ नर्स से मना रहे रंगरेलियां, खुद पिटा और पुलिस से भी पिटवाया
-डाक्टर साहब के रंगमिजाजी के चलते अनेक स्टाफ नर्स नौकरी छोड़ चुकी
-पहले डाक्टर साहब का नर्सिंग होम कुदरहा के नौरहनी रोड पर था, जैसे ही इनका नर्सिंग होम रामपुर रोड कुदरहा के सूनसान इलाके में आ गया, खुलकर रंगरेलियां मनाने का मौका मिल गया
बस्ती। बहुत दिनों बाद कुदरहा का समाचार लोगों को पढ़ने को मिल रहा है। खबर भी ऐसी कि सभी लोग इसे चटकारा लेकर पढ़ना और मजा लेना चाहेंगें। चूंेिक इस तरह का समाचार अमूमन पढ़ने और लिखने को नहीं मिलता। सवाल यह उठ रहा है, कि आखिर डाक्टर साहब को अपनी खूबसूरत और एयर होस्टेस पत्नी को छोड़कर अपने अस्पताल के एक स्टाफ नर्स के साथ रंगरेलियां मनाने की क्या आवष्यकता पड़ गई? बात सिर्फ रगंरेलियां मानते तक ही सीमित नहीं रहा, बात उस समय आम से खास हो गई, जब पत्नी को पता चला कि उसके डाक्टर पति अस्पताल में स्टाफ नर्स के साथ रंगरेलिया मना रहे हैं, तो पति को रेड हैंड पकडने के लिए बिना यह सोचे समझे कि अस्पताल चल पड़ी कि इससे अस्पताल और डाक्टर साहब कि कितनी बदनामी होगी। सूचना पक्की थी, इस लिए पत्नी को स्टाफ नर्स के साथ पकड़ने में देर नहीं लगी। पहले तो पत्नी ने डॉक्टर साहब की अच्छे तरह से धुनाई की और उसके बाद पुलिस को बुलवाकर उनसे धुनवाई करवाया। अब आप लोग जरा अंदाजा लगाइए कि एक एयर होस्टेस अपनी डॉक्टर पति को सबके सामने मार रही हैं, और लोग देख कर मजा भी ले रहे है।
खूबसूरत पत्नी को छोड़कर एक स्टाफ नर्स के साथ डाक्टर साहब क्यों रंगरेलियां मना रहे थे, यह अलग बात है, महत्वपूर्ण बात यह है, कि इस घटना के बाद क्या पति-पत्नी का संबध पहले जैसा रह पाएगा? हमारा समाज इस तरह के रिष्तों को कभी भी स्वीकार नहीं करता, इसे चाहे डाक्टर साहब की भूल कह लीजिए या फिर उनका शोक, खून तो पति-पत्नी के रिष्ते का ही हुआ। सवाल यह भी उठ रहा है, कि क्या डाक्टर साहब इस घटना के बाद समाज में सिर उठाकर चल पाएगें? क्या पत्नी अपने पति को माफ कर पाएगी? कहा भी जाता है, कि जिस भी महिला या पुरुष का कोई चरित्र नहीं होता, उसे समाज अपने पास बैठने तक नहीं देता। महिला चाहे स्टाफ नर्स हो या फिर गृहणी हो सभी को अपनी मर्यादा में रहना चाहिए। आप सबकुछ कीजिए, भ्रष्टाचार करिए, लूटपाट करिए, खूनखराबा करिए, लेकिन किसी का चरित्र हनन मत कीजिए। इसी चरित्र हनन के चलते न जाने कितने घर बर्बाद हो गए, कितनों की हत्या तक हो गई, फिर भी चरित्र हनन का खेल नहीं रुक रहा है। इस खबर को लिखने का मकसद जागरुकता पैदा करना भी है। डाक्टर साहब के रसिक मिजाज के चलते इनके अस्पताल में महिला स्टाफ अधिक दिन तक नहीं रुकती, जो इज्जतदार होती है, वह छोड़कर चली जाती है, और जो मजा लेने और पैसे की शोकीन होती है, उन्हें डाक्टर साहब जैसे लोगों के साथ सोने या फिर रंगरेलियां मनाने में कोई परहेज नहीं होता। इस तरह के डाक्टर, महिला मरीज के साथ भी वही व्यवहार करने का प्रयास करते होगें जो स्टाफ नर्स के साथ किया। याद रखिए पैसा तो बहुत कमाया जा सकता है, लेकिन इज्जत और मान-सम्मान बहुत मेहनत से कमाया जाता है, इसे इतनी आसानी और एक स्टाफ नर्स के चलते मत गवांइए। वैसे कुदरहा क्षेत्र में अनेक ऐसे सफेद पोश हैं, जो डाक्टर जैसा घृणित कार्य कर रहे हैं, अगर इन लोगों ने अपने व्यवहार में सुधार नहीं किया तो किसी दिन अनकी पत्नी भी वही हाल करेगी जो डाक्टर की पत्नी ने किया। किसी महिला की मजबूरी का फायदा कभी नहीं उठाना चाहिए, न तो उसे अपना रखैल और न दासी ही बनाना चाहिए। यह भी सच है, कि न तो हर महिला और न हर पुरुष ही गलत होता। परिथितियां और मजबूरियां दोनों को गलत बना देती है।
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