डीएम साहब आप के नाक के नीचे भ्रष्टाचार हो रहा

-सिविल बार के महांमत्री मारुफ कुमार शुक्ल, संयुक्त मंत्री देवव्रत उपाध्याय एवं वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्र्रमणि त्रिपाठी कमिश्नर से मिलकर कहा कि रिकार्ड का बाबू ओमप्रकाश मिश्र वकीलों से मुआयना करवाई 100 रुपया तक ले रहा है, जबकि इसके पहले वाले बाबू 20 रुपये लेते थे

-खुलकर कहा कि बाबू ने अपना रेट पांच गुना बढ़ा दिया, और कहता है, कि जब हर महीने छोटे साहब को 30 हजार देना पड़ता है, तो रेट बढ़ेगा ही

-कहा कि जो अधिवक्तता, बाबू के बनाए गए रेट को नहीं देता, उसे नकल पाने के लिए चार-चार माह लग जाते, वहीं पर जिसने चढ़ावा चढ़ा दिया, उसे नंबर तोड़कर नकल मिल जाता

-कहा कि इससे खराब हालत उर्दू बाबू की है, यह तो एक-एक जिल्द बटवारा का ढ़ाई हजार से लेकर तीन हजार लेता

-कहा कि हम लोगों ने इसकी शिकायत डीएम से मिलकर तीन बार किया, तीनों बार जांच सीआरओ को दी गई, और तीनों जांच पर लीपापोती कर दी गई

-जिस समय अधिवक्तागण कमिश्नर को अपनी पीड़ा सुना रहे थे, उस समय अपर कमिश्नर से लेकर अन्य अधिकारी पत्रकार और जनता जर्नादन मौजूद रही, सुनकर सभी अवाक रह गए

बस्ती। जिले के अधिकांष लोगों का कहना है, कि उनके जिले के डीएम को इतना भी सीधा और सरल नहीं होना चाहिए, कि उनके नाक के नीचे भ्रष्टाचार पनपने लगे। इस सच को सिविल बार के महांमत्री मारुफ कुमार शुक्ल, संयुक्त मंत्री देवव्रत उपायाध्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्र्रमणि त्रिपाठी ने उस समय सही साबित कर दिया, जब यह लोग कमिश्नर से मिलने गए थे। इन अधिवर्क्ताओं ने कमिश्नर से स्पष्ट कहा कि मुख्यालय का रिकार्ड बाबू ओमप्रकाश मिश्र वकीलों से मुआयना करवाने के नाम पर खुले आम 100 रुपया तक ले रहा है, जबकि इसके पहले वाले बाबू 20 रुपये लेते थे। इस भ्रष्ट बाबू ने रेट को पांच गुना बढ़ाते हुए कहा कि साहब जब हम्हें छोटे साहब को हर महीना 30 हजार देना पड़ता है, तो रेट तो बढ़ेगा ही। कहा कि रेट बढ़ाना उसकी मजबूरी है। कहा कि जो अधिवक्ता, बाबू के बनाए गए रेट को नहीं देता, उसे नकल पाने के लिए चार-चार माह लग जाते, वहीं पर जिसने चढ़ावा चढ़ा दिया, उसे नंबर तोड़कर नकल मिल जाता। कहा कि इससे खराब हालत उर्दू बाबू की है, यह तो एक-एक जिल्द बटवारा का ढ़ाई हजार से लेकर तीन हजार लेता है।  अधिवक्तताओं कहना था, कि हम लोगों ने इसकी शिकायत डीएम से मिलकर तीन बार कर चुके हैं, हर बार जांच सीआरओ को दे दी जाती है, और सीआरओ साहब हर बार मामले की लीपापोती कर देते है। जिस समय अधिवक्तागण कमिश्नर को अपनी पीड़ा सुना रहे थे, उस समय अपर कमिश्नर प्रशासन से लेकर अन्य अधिकारी पत्रकार और जनता जर्नादन मौजूद रही, अधिवक्ताओं की बात कमिष्नर सहित अन्य सुनकर अवाक रह गए। अभी तक अधिकांश अधिकारियों की लेकर लोग कमिश्नर साहब के पास जाते थे, लेकिन यह पहली बार है, जब एक बाबू की शिकायत कमिश्नर तक पहुंची।

अगर यही आरोप कोई आम व्यक्ति या कोई पत्रकार लगाता तो हो सकता हैं, कि कमिष्नर साहब उतना गंभीर नहीं होते, लेकिन अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया तो कमिश्नर गंभीर हो गए, और डीएम से बात भी करना चाहा। अधिवक्तताओं ने एक तरह से जिले के भ्रष्टाचार की पोल खोलकर रख दी। भ्रष्टाचार के बोझ तले एक आदमी से लेकर अधिवक्ता किस तरह पिस रहा है, इसका अंदाजा शुक्रवार को कमिश्नर साहब के चेंबर में जनता दर्षन के दौरान हुआ। अधिवक्ताओं ने कहा कि पहले ओमप्रकाश मिश्र हर्रैया में तहसीलदार के पेशकार थे, वहां पर जब पैसे को लेकर मारपीट और झगड़ा हुआ तो इसका तबादला मुख्यालय के रिकार्ड रुम जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर कर दिया, यहां पर आते ही सबसे पहले बाबू ने रेट को 20 रुपया से बढ़ाकर 100 रुपया कर दिया। कहा कि जैसे ही भ्रष्ट बाबू को अनुचित लाभ मिल जाता वैसे ही यह मशीन की तरह काम करने लगता। जो काम चार में नहीं हुआ, वह पैसा मिलते ही चंद मिनटों में हो जाता। अधिवक्ताओं सहित जिले के अधिकांष लोगों का कहना है, कि भले ही पूरा जिला भ्रष्टाचार की आग में जल रहा है, लेकिन इसकी आंच वहां नहीं पहुंचनी चाहिए, जहां डीएम, एडीएम, सीआरओ सहित अन्य कई एसडीएम बैठतें हो। जब अधिकारी पर लगाम नहीं लगेगा तो बाबू तो मनमानी करेगा ही। इसका खामियाजा न तो डीएम, न तो एडीएम न तो सीआरओ और न किसी एसडीएम को पड़ेगा, बल्कि भाजपा को भुगतना पड़ेगा। भाजपा के प्रत्याषियों को 2027 में इस बात का एहसास हो जाएगा, कि भ्रष्टाचार का प्रभाव उनके चुनाव पर कितना पड़ रहा है।