डा. शर्मा नहीं माने और कर दिया गलत आपरेशन

-जिस जगह हडडी टूटी थी, वहां आपरेशन नहीं किया, दूसरी जगह कर दिया, मरीज को लखनऊ जाना पड़ा

-बस्ती में एक से बढ़कर एक डकैत डाक्टर्स हैं, सही तरीके से जांच हो जाए तो आधे से अधिक डाक्टर जेल में नजर आएगें

-मेडिकल टेररिज्म पैदा करके डाक्टर्स मरीजों का खून चूस रहें, अधिकांष डाक्टर्स अब डाकू हो गए हैं, इंसानियत बिलकुल नहीं, अगर पेट में गैस है, तो भी कई जांच और अल्टासाउंड करवा देते, सिर्फ कमीशन के लिए

-जिले के सभी डाक्टर्स के आय और उनके नकली दवाओं के कारोबार की जांच सीबीआई से होनी चाहिए

-चिकित्सा और शिक्षा क्षेत्र दोनों लूट का अडडा बन चुका, सब जानते हुए भी शासन मौन, जिले के 90 फीसद डाक्टर्स का यही हाल, मीडिया और अधिकारियों को पैसा नहीं मिला इस लिए उछाल रहें

-कमाया है, कि गरीबों को लूटा है, 100 करोड़ का एक फीसद खर्च कर सबको गौड़ साहब जैसे डाक्टर्स निपटा देगें, ज्यादा परेशान मत होइए, प्रेषर बनाना तो जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्य चिभाग के अधिकारियों पर बनाइए

-अपने-अपने बच्चों को अच्छे से पढ़ाओ और डाक्टर्स बनाओ, फिर देखो आप का बच्चा कहां से कहां पहुंच जाता, लगता है, कि पत्रकार महोदय का पैसा उनके पास तक नहीं पहुंचा, कुछ नहीं होगा भईया पैसे के बल पर सब काम रफा-दफा हो जाएगा

बस्ती। टूटी पैर की हडडी का आपरेशन कराने वाला मरीज सूर्या वाले डा. शर्मा से कहता रहा कि डाक्टर साहब आप गलत हडडी का आपरेशन कर रहे हैं, जहां हडडी टूटी है, वहां नहीं कर रहे हैं, और जहां नहीं टूटी वहां कर दे रहे है। शर्माजी नहीं माने और उन्होंने अपनी वाली कर दी यानि गलत आपरेशन कर दिया, अब जरा अंदाजा लगाइए कि जिस व्यक्ति का गलत आपरेशन हुआ होगा, उसको कितनी तकलीफ हुई होगी, फिर उसे सही आपरेशन कराने के लिए लखनऊ जाना पड़ा, जहां पर उसका कितन पैसा खर्च हुआ होगा। यह दर्द जेशु सिंह कलहंस का है। उन्होंने लिखा कि सूर्या वाला बहुत बड़ा चोर है, बड़े पाप की हडडी का आपरेशन जहां करना चाहिए था, वहां नहीं किया, दूसरी जगह कर दिया। इसके बाद भी अगर शर्माजी अपने आपको पाक-साफ और मीडिया को बेईमान और चोर कहे, तो उनका भगवान ही मालिक। यह देश के पहले ऐसे डाक्टर हैं, जो अपने पर्चे पर जेनरिक दवाओं की सूची लिख रखी है, ताकि उसी दवा पर टिक लगाया जा सके, जिसमें सबसे अधिक मुनाफा हो, वैसे भी षर्माजी पर पेटेंट दवा बताकर जेनरिक दवा देने का आरोप न जाने कितने मरीज लगा चुके है। इनकी भी गिनती जमीनों के कारोबार करने वाले डाक्टर्स में होती है। इनके पास इतना पैसा है, कि इन्हें समझ में नहीं आ रहा है, कि वह पैसे को कहां इनवेस्ट करें, बैंक में जमा नहीं कर सकते, इस लिए यह लोग किसी के नाम जमीन खरीदवा देते है।

जियाउदीन अंसारी लिखते हैं, कि बस्ती में एक से बढ़कर डकैत डाक्टर्स हैं, सही तरीके से जांच हो जाए तो आधे से अधिक डाक्टर जेल में नजर आएगें। कमलेश मिश्र लिखते हैं, कि मेडिकल टेररिज्म पैदा करके डाक्टर्स मरीजों का खून चूस रहें, अधिकांश डाक्टर्स अब डाकू हो गए हैं, इंसानियत बिलकुल नहीं, अगर पेट में गैस है, तो भी कई जांच और अल्टासाउंड करवा देते, सिर्फ कमीशन के लिए।

राजनरायन एवं अशफाक अहमद लिखते हैं, कि जिले के सभी डाक्टर्स के आय और उनके नकली दवाओं के कारोबार की जांच सीबीआई से होनी चाहिए। धमेंद्र गोविंदा कहते हैं, कि चिकित्सा और शिक्षा क्षेत्र दोनों लूट का अडडा बन चुका, सब जानते हुए भी शासन मौन, सरकार से जानना चाहते हैं, कि कब होगी इन दोनों पर बड़ी कार्रवाई। सतीश कुमार सिंह लिखते हैं, कि  जिले के 90 फीसद डाक्टर्स का यही हाल, मीडिया और अधिकारियों को पैसा नहीं मिला इस लिए उछाल रहें। बाबूराम यादव एवं अतुल उपाध्याय कहते हैं, कि कमाया है, कि गरीबों को लूटा है, 100 करोड़ का एक फीसद खर्च कर सबको गौड़ साहब जैसे डाक्टर्स निपटा देगें, ज्यादा परेशान मत होइए, प्रेशर बनाना तो जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्य चिभाग के अधिकारियों पर बनाइए। दीपा पांडेय लिखती है, कि लगता है, कि पत्रकार महोदय का पैसा उनके पास तक नहीं पहुंचा, नहीं तो यह इतना न उछालते। सुनील कुमार एलआईसी सीएससी लिखते हैं, कि अपने-अपने बच्चों को अच्छे से पढ़ाओ और डाक्टर्स बनाओ, फिर देखिए आप का बच्चा कहां से कहां पहुंच जाता, 100 करोड़ कौन कहे 250-300 करोड़ तक के क्लब में शामिल हो सकता है। मोहम्मद वहीद खान लिखते हैं, कि खून चुसवा डाक्टरों के साथ जितने भी इनके आगे-पीछे लगे हुए हैं, उनके भी संपत्तियों की जांच होनी चाहिए, तब लूटपाट का सही आकड़ा मिलेगा, काफी लूूट की गई हैं, पता नहीं किस-किस के नाम पर संपत्ति बनाई गई, यह सबकुछ जांच में ही खुलासा होगा। कुछ नहीं होगा भईया पैसे के बल पर सब काम रफा-दफा हो जाएगा। अनेक लोगों का कहना है, कि पैसा चाहें जितना कमाइए उसमें कोई कोई बुराई नहीं हैं, लेकिन अगर कोई नवजात बच्चों और गरीब मरीजों को मारकर कमा रहे हैं, उन्हें छोड़ दीजिए। बार-बार कहा जा रहा है, कि किसी को गरीबों की आहें और बदुआएं नहीं लेनी चाहिए। क्यों कि ऐसे लोगों की आहें और बदुओं का असर बहुत जल्दी दिखाई देता। एक गरीब मरीज किसी अमीर डाक्टर्स का कुछ नहीं कर सकता, लेकिन बदुआ अवष्य दे सकता है।