बस्ती। जिले में पहली बार कैग की टीम स्वास्थ्य विभाग के भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों को पकड़ने और उन्हें नंगा करने आ रही हैं। कैग का नाम सुनते ही बड़े-बड़े भ्रष्टाचारियों के पसीने छूटने लगते है। पिछवाड़े से हवा निकलने लगती है। कैग के निषाने पर योगीजी के षहर गोरखपुर भी है, और टीम वहां पर वर्तमान समय में भ्रष्टाचारियों को नंगा कर रही है। एनएचएम में हो रहे घोटाले का पर्दाफाष करने के लिए कैग की टीम बस्ती आ रही है, भ्रष्टाचार के मामले में 25 जनपदों में बस्ती का भी नाम है। बताते हैं, कि बड़े से बड़ा घोटालेबाज और चालाक कैग की टीम से नहीं बच सकता है। यह कोई भी चोरी पांच मिनट में पकड़ लेते है। यही कारण है, कि इनकी तुलना सीबीआई और ईडी जैसी टीम से की जाती है। अगर इन्होंने अपने काम को ईमानदारी से अंजाम दे दिया तो न जाने कितने भ्रष्टाचारी जेल में नजर आएगंे और कईयों की नौकरी भी चली जाएगी। कैग के आने की खबर एक माह पहले सीएमओ को मिल चुकी हैं, तभी से कागज पत्तर सही किए जा रहे है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है, कि जब अधिकांश कार्य और सामानों की आपूर्ति और भुगतान बिना टेंडर किए हुए हैं, तो फिर कैसे कोई इस टीम से बच पाएगा? चूंकि कैग की टीम पहली बार बस्ती आ रही है, इस लिए हलचल अधिक है। इसे देखते हुए सीएमओ ने कई फर्जीवाड़े पर कैग की टीम के जाने तक रोक लगा रखा है। इसमें 15वां वित्त आयोग का वह पांच करोड़ का बजट भी हैं, जिसका बंदरबांट करने के लिए कुछ दिन पहले सीएमओ आवास पर घोटालेबाजों की बैठक हो चुकी है। सीएमओ को टेंडर तक निकालने की हिम्मत नहीं पड़ रही है, क्यों कि अगर टेंडर निकाला तो इनके लिए ठनठनगोपाल रहेगा, और नहीं निकाला तो मालामाल। चूंकि कैग एक केंद्रीय एजेंसी है, और इनकी छानबीन सबसे अधिक एनएचएम और डब्लूएचओ को मिले धन के उपयोग/दुरुपयोग पर रहती है। इसमें 15वां वित्त आयोग से मिलने वाले करोड़ों के बजट भी षामिल है। इस एजेंसी का फंडा क्लीयर रहता है। इनका फोकस आवंटित बजट और उसके सापेक्ष व्यय धन और निकाले गए टेंडर पर रहता है। चूंकि जिले में सबसे अधिक घोटाला एनएचएम में ही हुआ है, और जिसकी शिकायत कैग तक भी पहुंची है, इस लिए संभावना जताई जा रही है, कि एनएचएम में बड़ी कार्रवाई हो सकती है। अगर घोटालेबाजों ने अन्य आडिट टीम की तरह कैग को भी मैनेज कर लिया तो घोटालेबाजों की बल्ले-बल्ले रहेगी। जिस तरह मैनेज होने की खबर गोरखपुर से आ रही है, उसे देखते हुए यहां के घोटालेबाज अपने आप को तैयार कर रहे हैं, चंूकि मामला कैग का है, तो मैनेज भी बड़ा होगा। गोरखपुर में तो बड़ी डील होने की खबरे आ रही है। कहा भी जाता है, कि जब योगीजी के जिले में कैग मैनेज हो सकती है, तो बस्ती में क्यों नहीं, बस भ्रष्टाचारियों को अपनी जेबों को कुछ अधिक ढ़ीला करना पड़ता है। कैग की टीम ने अगर सीएमएसडी स्टोर पर धावा बोला तो उन्हें जो चाहिए वही मिलेगा। कैग की खासबात यह है, कि इनके सामने जितने भी अभिलेख या कागजात आते हैं, उन सभी का टीम स्कैन कर लेती है, ताकि बाद में कोई फेरबदल न किया जा सके।