बच गया पूर्व बसपा के मुख्य कोआर्डिनेटर उदयभान का परिवार
-स्कार्पियो से परिवार के साथ गोरखपुर से बस्ती आ रहे, जैसे ही बड़ेबन से आगे कटरा की ओर बढ़े वैसे ही पिछला पहिया एक्सेल के साथ टूट कर गिर पड़ा
-अभी संभल पाते कि कार में आग लग गई, परिवार कार के अंदर था, जलती कार में किसी तरह परिवार को निकाला गय
-बाद में लोगों के सहयोग से आग पर काबू पाया गया, कोई पानी से तो कोई बालू से आग बुझाने में मदद किया
-कार में पत्नी, तीन बच्चे और पत्नी की बहन के तीन बच्चे सवार थे, उदयभान की पत्नी दुर्गेश नंदिनी राज्स महिला आयोग की सदस्य रह चुकी
बस्ती। बसपा के पूर्व मुख्य जोनल कोआर्डिनेटर उदयभान का परिवार बड़े हादसे का शिकार होते-होते बच गया। जिस स्कापियो नंबर संख्या यूपी-32डीएफ2111 गाड़ी में इनका परिवार गोरखपुर से आ रहा था, जिसमें इनकी पत्नी पूर्व राज्य महिला आयोग की सदस्या दुर्गेश नंदिनी, तीन बेटियां आकाक्षं, संघ मित्रा एवं विभा और पत्नी की बहन वंदना और उनकी तीन बच्चे सवार थे। गाड़ी बड़ेबन से जैसे कटरा की ओर देवेंद्र पाल के घर के सामने पहुंची, वैसे ही पिछला पहिया एक्सेल के साथ टूट कर गिर गया, गाड़ी अनियंत्रित होते-होते बच गई, गाड़ी को स्वंय उदयभान चला रहे थे, किसी तरह ब्रेक मारकर गाड़ी रोकी गई। कुछ ही मिनट मिनट बीता था, कि गाड़ी में तेल चूने लगा, जिसके चलते वाहन में आग लग गई, आसपास के लोग एकत्रित हो गए, किसी ने पानी से तो किसी ने बालू से आग को बुझाया। जिस समय आग लगी थी, उदयभान को छोड़कर परिवार के सभी सदस्य गाड़ी के भीतर ही थे, किसी तरह दोनों फाटक खोलकर परिवार को बाहर निकाला गया, बच्चे रोने लगे थे। सभी ने भगवान को बचाने के लिए धन्यवाद दिया। डरा और सहमा परिवार किसी तरह दूसरी गाड़ी से घर पहुंचा। इस तरह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। इस तरह की जब भी कोई घटना होती है, और जब परिवार बचता है, तो लोग यही कहते हैं, यह सब अच्छे कर्मो का फल है। इसी लिए कहा भी जाता है, कि किसी को नुकसान न पहुंचाइए और न किसी निरीह को ही सताइए। आहें और बददुआएं खाली नहीं जाती।
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