बस्ती। एक ऐसा अपराधी जिसके खिलाफ आधा दर्जन से अधिक मुकदमें दर्ज हो अगर वह न्याय पाने के लिए आत्महत्या करने की धमकी देता हो, तो सवाल तो खड़ा होगा ही, जिस व्यक्ति ने समाज के साथ अन्याय किया हो, और जो समाज का दुश्मन हो, अगर वह न्याय न मिलने पर आत्महत्या की धमकी देता हो ऐसे व्यक्ति को समाज कभी क्षमा नहीं करता है। वैसे न्याय पाने का अधिकार तो सभी को हैं, लेकिन न्याय पाने की आड़ में ब्लैक मेल करने का अधिकार किसी को भी नहीं हैं, जो व्यक्ति शिकायत वापस करने के नाम पर लाख रुपया मांगा हो, और जिसने कई बार प्रधान और सचिव को ब्लैक मेल करके पैसा एंठा हो, वह व्यक्ति हमदर्दी नहीं बल्कि सजा के लायक है। जो व्यक्ति शिकायत और एससीएसटी का डर दिखाकर ब्लैकमेल करने का हथियार बना लिया हो, उसके साथ कोई रहम नहीं होना चाहिए। ऐसे ही एक व्यक्ति का नाम हैं, प्रवीन कुमार पुत्र दिनेश कुमार कन्नौजिया, और यह रुधौली क्षेत्र मूड़ाडीहा निवासी है। इनका एक आडियो वायरल हुआ, जिसमें यह प्रधान का कामकाज देखने वाले और प्रधान के पिता अवधेश कुमार पुत्र तमेश्वर से सचिव रंचना चौधरी के खिलाफ की गई शिकायत को वापस करने के एवज में एक लाख की मांग किया, सौदा 60 हजार में तय हुआ, प्रवीन कुमार पहले किष्त के रुप में 30 हजार देने को कहा, आनलाइन कई चरणों में खाते में कुछ पैसा भी भेजा गया, इसी बीच सचिव निलंबित हो गई। पहले तो इसने सचिव से पैसा मांगा, जब सचिव ने देने से इंकार कर दिया तो प्रधान के पिता से मांगा। इससे पहले भी शिकायत करने की धमकी देकर कभी 20 हजार तो कभी पांच दस हजार लिया गया। इसकी शिकायत अवधेश ने एसपी से करते हुए सचिव और खुद के जानमाल की रक्षा की गुहार लगाते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग किया। देखा जाए तो इस मामले में दोषी प्रवीन कुमार ही नहीं हैं, बल्कि प्रधान भी हैं, सवाल उठ रहा है, कि आखिर प्रधान क्यों बार-बार शिकायतकर्त्ता को पैसा देता रहा, इसका मतलब प्रधान खुद गलत हैं, और नियम के अनुसार घूस देने वाला और घूस लेने वाला दोनों को दोषी माना जाता है। गांव में बहुत से ऐसे शिकायतकर्त्ता हैं, जो प्रधानों के गलत कामों का डर दिखाकर पैसा एंठते रहते हैं, इसमें पत्रकार बिरादरी के लोग भी हैं, फर्क यह है, कि पत्रकार खबर लिखने/चलाने के नाम पर प्रधानों और सचिवों को ब्लैकमेल करते है। कभी-कभी शिकायतकर्त्ता और पत्रकार दोनों मिलकर ब्लैकमेल करते। चूंकि 99 फीसद प्रधान और सचिव बेईमान होते हैं, इस लिए कार्रवाई होने के डर से ब्लैकमेल होते रहते है। मूड़ाडीहा के एक चर्चित सचिव के कहने पर पर पहली बार प्रधान ने प्रवीन कुमार को पैसा दिया, तब से ब्लैकमेल करने का सिलसिला चल निकला। जो आडियो वायरल हुआ, उसे प्रधान के पिता ने आजीज आकर किया, ताकि समाज प्रवीन कुमार की सच्चाई को जान सके। किसी भी ब्लैकमेल का प्रधाानों और सचिवों को पुरजोर विरोध करना चाहिए, विरोध नहीं करेगें, और डर के मारे पैसा देगें, तो आगे भी देना पड़ेगा। सभी लोग जानते हैं, कि सरकार ने मनरेगा और आवास में प्रधानों की भूमिका को पूरी तरह समाप्त कर दिया, यह अलग बात हैं, कि प्रधान ही सबकुछ करता है। षिकायतें भी प्रधानों के खिलाफ ही की जाती हैं, लेकिन जब मामला कभी कोर्ट में जाता है, तो प्रधान यह कर बच जाता है, कि मनरेगा और आवास के आंवटन में उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं है। इस लिए लोगों को शिकायत करने से पहले यह जान लेना चाहिए, मनरेगा और आवास में प्रधान की कोई जिम्मेदारी नहीं होती। फिर भी प्रधानों को ब्लैकमेल करके उनसे इच्छित धन की वसूली की जाती है, जाहिर सी बात हैं, जब देने वाला तैयार है, तो फिर लेना वाला क्यों परहेज करे।