सेना का घोड़ा फॉर्म पर अवैध कब्जों की शिकायत ओर विवादों में फंसा, सिस्टम मौन 

सिस्टम के कर्मचारियों की मिली भक्त से सरकारी जमीन  लापता

ओमप्रकाश गौतम
गढ़मुक्तेश्वर: सरकारी जमीन पर सत्ता के असरदार समय समय पर कब्जा करते रहे और मालदार हो रहे है। सरकारी जमीन के लापता होने पर बुलडोजर मुख्यमंत्री की पोल खुल कर सामने आ रही है। भारतीय सेना के घोड़ा फॉर्म सरकारी जमीन पर बारह साल पहले अवैध कब्जों का सिलसिला शुरू हुआ। सत्ता बदली तो मुख्यमंत्री बाबा के बुलडोजर के भय से कब्जों का काम रुक गया। अब घोड़ा फॉर्म सेना के अस्तबल पर धीरे धीरे दिन रात में लोग कब्जा कर मकान बना रहे है। राजस्व अभिलेखों में सेना का घोड़ा फॉर्म दर्ज हैं जो अवैध कब्जों के चलते घोड़ा फॉर्म लापता होने लगा है। सेना के घोड़ा फॉर्म में बिना मानचित्र कई मकान बना लिए गए। सिस्टम कुंभकर्ण की नीद में सोया हुआ है। 

दैनिक तेजयुग न्यूज़

वन विभाग की जमीन लापता
खादर क्षेत्र में वन विभाग की हजारों बीघे सरकारी जमीन हैं। वन विभाग के अधिकारी अपनी जमीन तलाशने में नाकाम है। सरकारी जमीन पर दबंगों ने अवैध कब्जे कर लिए और फसल लहरा रही है। सरकारी विकास की बात हो तो वन्य जीव विहार की एनओसी रोक लगा देती है। देश प्रदेश में डबल इंजन की सरकार होने पर भी सरकारी योजना के काम नहीं हो पा रहे है। मुख्यमंत्री ने गंगा पुल बनाने की घोषणा की थी जो परवान नहीं चढ़ पाया। 
विधायक हरेंद्र सिंह तेवतिया ने बताया कि गंगा पुल बनाए जाने के लिए फाइल एनओसी के लिए गई हुई है। एनओसी मिलने का इंतजार है।