बस्ती। अगर बीएसए साहब अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर एक ऐसे अक्षम शिक्षक के लिए प्रबंध कमेटी से पंगा लेगें, जो न तो ठीक से खड़ा हो सकता है, और न बोल ही सकता है, तो आरोप तो लगेगा ही। प्रबंध कमेटी आप से सिफारिष कर रही है, कि शिक्षक का मेडिकल बोर्ड और शेक्षिक कमेटी से जांच करा लीजिए, लेकिन आप जांच नहीं करवा रहे हैं, बल्कि पूरे प्रबंध कमेटी पर वेतन देने का दबाव बना रहे हैं, न देते पर कमेटी को भंग करने और एकल व्यवस्था लागू करने की धमकी दे रहे हैं, और जब आप के नियम विरुद्व बात को नहीं माना तो आपने प्रधानाचार्य सहित पूरे स्टाफ का वेतन रोक दिया, और एकल खाता संचालित करने का फरमान जारी कर दिया। सवाल उठ रहा हैं, कि जिस षिक्षक को स्कूल के प्रबंध कमेटी अक्षम मान रही है, और नो वर्क नो पे के आधार पर वेतन नहीं दे रही है, उसे आप वेतन दिलाने के लिए अधिकार से बाहर क्यों जा रहे है? सवाल उठ रहा है, कि आखिर आप ऐसा क्यों कर रहे हैं, और किस लालच में कर रहे है? बीएसए साहब आपकी हठधर्मिता के कारण मामला हाईकोर्ट में चला गया।

यह मामला हीरालाल कृषि पूर्व माध्यमिक विधालय फरदापुर महुआपार हर्रैया का है। यहां पर एक सहायक अध्यापक अरविंद कुमार उपाध्याय है। यह षैक्षिक कार्य करने में अक्षम क्यों कि यह लकवाग्रस्त है। शिक्षण कार्य न करने के कारण इनका वेतन सितंबर 25 से फरवरी 26 तक नो वर्क नो पे के आधार पर प्रबंध कमेटी ने बाधित कर दिया। बीएसए ने अपने अधिकारों का प्रयोग/दुरुपयोग करते हुए, बिना प्रबंध कमेटी के प्रबंधक और प्रधानाचार्य के द्वारा बिल प्रस्तुत किए माह सितंबर का वेतन भुगतान कर दिया। अक्टूबर 25 से फरवरी 26 तक वेतन बाधित है। बताया जाता है, कि इस वेतन को देने के लिए बीएसए ने प्रधानाचार्य और प्रबंधक पर दबाव बनाया, और कहा कि अगर वेतन नहीं दिया तो कमेटी को भंग कर दूंगा, एकल खाता की व्यवस्था कर दूंगा। बीएसए ने जो कहा उसे नियम विरुद्व किया भी, एकल खाता व्यवस्था कर दिया, बस कमेटी को भंग नहीं किया। अलबत्ता जिद में आकर प्रधानाचार्य सहित पूरे स्टाफ का वेतन रोकने का आदेश भी जारी कर दिया। कमेटी बार-बार बीएसए से लिखित में शिक्षक का मेडिकल बोर्ड और षैक्षिक कमेटी से जांच करवाने की मांग कर रही है, लेकिन न जाने क्यों बीएसए साहब अड़े हुए है? बीएसए साहब के अड़ियल रुख के चलते प्रबंध कमेटी को हाईकोर्ट की शरण में जाना पड़ा। जाहिर सी बात है, कि हाईकोर्ट का निर्णय प्रबंध कमेटी के पक्ष में होने की संभावना है। कोर्ट से बीएसए के आदेष को स्थगित करने और जांच पूरी होने तक कार्रवाई को स्थगित रखने की अपील की गई है। प्रबंधक गोमती प्रसाद पांडेय कहते हैं, कि बीएसए को जो अधिकार नहीं हैं, उसका भी वह दुरुपयोग कर रहे हैं, क्यों कर रहें हैं? पता नहीं। कहते हैं, कि जिस तरह बीएसए प्रबंध कमेटी के अधिकार क्षेत्र और कामकाज में हड़गां डाल रहे हैं, उसे मनमानी कहा जाता है। यह भी कहते हैं, कि एक अधिकारी को मनमानी करना शोभा नहीं देता। क्यों कि यह मामला पूरी तरह प्रबंध कमेटी और अक्षम शिक्षक के बीच का है।