बस्ती। वाह रे योगीजी की पुलिस। मुकदमा दर्ज करने की तहरीर चोरी की दी जाती है, और दर्ज किया जाता, दहेज उत्पीड़न का। बादशाह टाकीज के कुलवेंद्र सिंह मजहबीं के यहां 16 जनवरी 26 को चोरी हुई, उन्होंने 17 जनवरी को आन लाइन यूपी कोप एप्प पर 202600006746 के जरिए एफआईआर दर्ज करने की तहरीर दिया। पहले तो तहरीर को अपठीय बताते हुए यूपी कोप एप्प पर तैनात अधिकारियों/कर्मचारियों ने रिजेक्ट करते हुए कहा कि पुनः तहरीर दीजिए। जिस पर यूपी कोप संख्या 202600016837 के जरिए तहरीर दिया। इस पर कहा गया कि आप का एफआईआर दर्ज हो गया, स्टेटस देखने को कहा गया। कुलवेंद्र सिंह मजहबीं का कहना है, जब 13 फरवरी 26 को स्टेटस देखा गया तो वह चौंक गए क्यों कि उनके चोरी के एफआईआर के स्थान पर थाना लालगंज की संगीता पत्नी जितेंद्र पुत्री रमेष चंद्र की ओर से दर्ज कराई गई दहेज उत्पीड़न के एफआईआर की प्रति उपलब्ध करा दी गई। इस पर तीसरी बार यूपी काप एप्प पर आनलाइन शिकायत करते हुए लिखा कि यूपी काप एप्प पर तैनात अधिकारी और कर्मचारियों के द्वारा बार-बार जानबूझकर मुकदमा दर्ज नहीं किया जा रहा है, केस दर्ज करने के बजाए परेशान किया जा रहा है। इस लिए ऐसे लोंगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए जो एक आम नागरिक को बार-बार परेशान किया जा रहा है। चौथी बार चोरी का मुकदमा दर्ज करने की तहरीर यूपी काप एप्प पर की गई, देखना यह है, कि क्या इस बार चोरी का मुकदमा दर्ज किया जाता है, या फिर फिर किसी अन्य के हत्या के आरोप में दर्ज एफआईआर की प्रति थमा दी जाती। देखा जाए तो सीएम पोर्टल और यूपी कोप एप्प मजाक बनकर रह गया है। एक आम नागरिक को जब यूपी काप एप्प पर जब एक चोरी का मुकदमा नहीं दर्ज हो सकता तो अन्य गंभीर आरोप में कैसे दर्ज होगा। लगता है, कि स्टेटस रिपोर्ट अपलोड करने वालों को भी यूपी काप एप्प से कोंई लेना देना नहीं होगा, अगर होता तो चोरी का मुकदर्मा दर्ज कर उसके एफआईआर को अपलोड करती। इससे आम लोगों का सरकार और पुलिस पर विष्वास कम होता जा रहा है, और अनेक लोग तो यह सोचकर चुप बैठ जाते हैं, कि जब थाने वालों ने नहीं सुनी तो यूपी काप एप्प क्या सुनेगा?