बस्ती। जिस तरह बड़े पैमाने पर करेक्टरलेस होटलों का संचालन हो रहा है, उससे सवाल उठ रहा है, कि आखिर ऐसे करेक्टरलेस होटलों को किसने करेक्टर सीर्टिफिकेट जारी किया, जिसके चलते पूरा समाज प्रभावित हो रहा हैं। जनता ऐसे लोगों का नाम सार्वजनिक करने की मांग कर रही है, ताकि समाज को करेक्टरलेस होटलों और उसका संचालन करने वालों के बारे में जानकारी हो सके। करेक्टर सर्टिफिकेटजारी करने का आशय अपंजीकृत होटलों का संचालन होना। वैसे भी आम लोगों को इतना तो अधिकार हैं, कि वह उन होटलों के बारे में जान सके, जहां वह परिवार के साथ जा रहा है। जिस तरह थानों पर हिस्टीशीटर का नाम लिखा रहता है, उसी तरह करेक्टरलेस होटल और उसके संचालकों के नामों को भी प्रदर्शित करना चाहिए, ताकि यह समाज के सफेदपोश और कारोबारी कहे जाने वालों का चेहरा बेनकाब हो सके। जो नेतागिरी और कारोबारी को लवादा ओढ़कर अनैतिक कार्य करते है, जनता उन्हें जान सके। यह लोग न सिर्फ उन गरीब, लाचार, महिलाओं और लड़कियों की मजबूरी का फायदा उठाने वालों का सहयोगी बनकर अपनी जेबें भरते, बल्कि पूरे समाज को गंदा भी करतें है।
जितना नामचीन होटल और उसके संचालक होते हैं, उतना ही उनका होटल करेक्टरलेस होता है। अपने होटलों में अनैतिक कार्य करवाने यह नामचीन और गैरनामचीन समाज के लिए नासूर बनते जा रहे है। मालवीय रोड और स्टेशन रोड पर ऐसे ऐसे होटल हैं, जिनका कारोबार सिर्फ और सिर्फ अनैतिक कार्य से ही फलफूल रहा है। इनमें कई ऐसे नामचीन होटलों के संचालक हैं, जो हमेषा से पुलिस और प्रशासन के करीब रहें है। इन्हें करीब होने का लाभ भी मिलता रहा। पुलिस और प्रशासन के लोग भी इनके करीब होने का लाभ उठाते रहें। कहने का मतलब पुलिस, प्रशासन और होटल संचालक तीनों करीब होने का एक दूसरे का लाभ उठाते है। जाहिर सी बात हैं, जिस होटल के संचालक का अधिकारियों के साथ मधुर रिष्ता रहता, उसका लाभ तो करेक्टरलेस होटल के संचालक उठाएगा ही। यह सब एक दूसरे का पूरा ख्याल रखते है। इसी की आड़ में होटल का संचालक वे सारे अनैतिक कार्य करते हैं, जिसे समाज अच्छा नहीं मानता। जिले में जब भी किसी डीएम या एसपी का आगमन होता है, तो यह नामचीन और बदनाम संचालक स्वागत करने के लिए सबसे पहले बुके लेकर आवास या कार्यालय पहुंच जाते हैं। हजार-दो हजार बुके की आड़ में, यह लोग रिष्ते को मजबूती देने का प्रयास करते हैं, और यह कहना नहीं भूलत कि मैडम/साहब मेरे लायक कोई सेवा हो तो अवष्य याद करिएगा, अब कौन ऐसा अधिकारी होगा, जिसे इनके सेवा की आवष्कता नहीं पड़ती, कभी अपने लिए तो कभी किसी कार्यक्रम के लिए तो कभी किसी गेस्ट के लिए, पड़ती रहती है। अधिकांश सेवा, सरकार के निःशुल्क अनाज की तरह रहता। निःशुल्क सेवा के एवज में यह लोग जितना खर्च नहीं करते, उससे हजार गुना अधिक कोई न कोई नैतिक/अनैतिक कार्य करवाकर वसूल लेते है। कुछ तो ऐसे नामचीन होटल संचालक हैं, जो पुल का काम करते है। जो काम आसानी से नहीं हो सकता है, उसे यह आसान बना देते है, और इसके एवज में सामने वाले से मोटी रकम एंठ लेते है। ऐसे लोगों का एक रुपये का भी नुकसान नहीं होता, बल्कि लाखों का लाभ ही होता है। सबसे बड़ा संबधों का लाभ होता है। यही वह संबध होता है, जिसके चलते अधिकारी सरकारी जमीन पर कब्जा करने से लेकर अनैतिक कार्यो पर पर्दा डाल देते हैं। चूंकि इस तरह के लोग पूरी तरह व्यवसायिक होते हैं, और इन्हें मालूम रहता है, कि कहां पर और किस जगह हजार रुपया का नुकसान उठाकर लाखों कमाया जा सकता है। सबसे बड़ा फायदा इन्हें अधिकारियों के करीब होने का मिलता है। तभी तो यह अधिकारियों के चहेते होते है। ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने चहेते का लाभ उठाकर पूरा साम्राज्य खड़ा कर लिया, ऐसे लोगों की गिनती चल अचल संपत्ति के मामलें में जिले के टाप फाइव में होती है। कहा भी जाता है, कि कोई भी साम्राज्य ईमानदारी और मेहनत से नहीं खड़ा किया जा सकता है। यह भी सही है, कि ईमानदारी से पैसा ‘कमाया’ जा सकता है, ‘बनाया’ नहीं जा सकता। यह बात किसी और ने नहीं बल्कि ‘हर्षता मेहता’ ने कहा था। आप लोग नजर उठाकर देख लीजिए कि किसने ईमानदारी से पैसा ‘कमाया’ और किसने बेईमानी से पैसा ‘बनाया’। इनमें एकाध को अगर छोड़ दिया तो टाप टेन में से आठ-नौ लोगों ने पैसा ‘बनाया’, और साम्राज्य खड़ा किया। मीडिया में खबर आने के बाद लोगों की उत्सुकता उन लोगों के बारे में जानने की बढ़ गई, जिन लोगों ने अपने होटलों में अनैतिक कार्य करवाकर पैसा ‘बनाया’। जनता प्रशासन से ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने मांग कर रही है, जिन लोगों का नाम सीओ सदर की जांच रिपोर्ट में सामने आया। यहां तक कि पुलिस के लोग भी कार्रवाई करने के मामले में प्रशासन की ओर देख रहंे हैं।
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