बस्ती। यह पहली बार नहीं जब योगीजी, राजकिशोर सिंह को दर्द दे कर गएं। इससे पहले जब योगीजी हर्रैया आए थे, तो तब भी वह राजकिशोर सिंह को मंच पर स्थान न देकर दर्द दे गए थे, योगीजी चाहते तो ठीक उसी तरह राजकिशोर सिंह को मंच पर स्थान दिलवा सकते थे, जिस तरह उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरी को दिलाया था, और यही अजय सिंह हैं, जिनसे योगीजी ने हैलीपैड पर कहा था, कि संजय चौधरी को अपनी गाड़ी में बैठाकर स्टेडिएम ले आओ। आज जब हरीष द्विवेदी की माताजी को श्रद्धांजलि देने आए तब भी वह राजकिशोर सिंह को दर्द दें गए। सूबे का मुखिया अगर बार-बार एक ही विधानसभा के दो दावेदारों को एक जैसा सम्मान नहीं देगें, तो सवाल तो उठेगा ही। अगर योगीजी विधायक अजय सिंह को अपनी गाड़ी में बैठाकर सम्मान देते हैं, तो जाहिर सी बात हैं, दूसरा भाजपा प्रत्याशी अपने आप को अपमानित महसूस करेगा। जब भी योगीजी बस्ती आते हैं, अपने व्यवहार से वह एक ऐसा शगूफा छोड़ जाते हैं, जो हर्रैया के लोगों के लिए चर्चा का विषय बन जाता है। यह सर्वविदित हैं, कि योगीजी, राजकिशोर सिंह को अपनी पहली पसंद नहीं मानते हैं, इसका भी कारण सर्वविदित हैं। जैसे ही योगीजी ने विधायक अजय सिंह को अपनी गाड़ी में बैठाया, वैसे ही सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा होने लगी, अजय सिंह सिंह के समर्थक जहां खुश होकर यह कहते रहे कि अब अजय सिंह का टिकट कोई काट नहीं सकता। दूसरी और राजकिशोर सिंह के समर्थक कुछ कहने की स्थित में नहीं है। यह भी सर्वविदित हैं, कि योगीजी जिले के विकास में बहुत अधिक रुचि नहीं लेते, अगर लेते तो सौ करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट बस्ती से कांटे के चौड़ीकरण की मंजूरी कब का दे चुके होते। इस प्रोजेक्ट का इंतजार जिले की जनता कई सालों से कर रह रही है, डीपीआर बनकर तैयार हैं, पीडीब्लूडी की ओर से सड़क निर्माण की तैयारी भी पूरी है, बस मंजूरी का इंतजार है। इस महत्वकांक्षी सड़क के चौड़ीकरण के हो जाने से गांधी नगर की जाम की समस्या दूर हो जाएगी। इस प्रोजेक्ट का प्रस्ताव किसी जनप्रतिनिधि की ओर से नहीं बल्कि कमिश्नर की ओर से इस लिए दिया गया, क्यों कि सदर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा का कोई जनप्रतिनिधि नहीं है। जितनी बार अजय सिंह, योगीजी से मिले उतनी बार राजकिशोर सिंह को मिलने का मौका नहीं मिला। लोग अब तो यह कहने लगे कि कहीं दो बड़े नेताओं के बीच की लड़ाई का खामियाजा राजकिशोर सिंह को न भुगतना पड़े। वैसे इधर के दिनों में जो हालात बन रहे हैं, उसे राजकिशोर सिंह के अनुमूल बनता हुआ नहीं दिखाई दे रहा हैं। कुछ लोगों का तो यह कहना है, कि कहीं दो प्रत्याशियों के चक्कर में बाजी और न मार ले जाए। पता नहीं क्यों यह सवाल उठ रहा है, कि हर्रैया से भाजपा की जीतना आसान नहीं होगा, क्यों कि जाहिर सी बात दोनों में किसी एक को ही टिकट मिलेगा, और जिसे टिकट नहीं मिलेगा, उसके समर्थक दूसरे प्रत्याशी को हराने में जीजान लगा देगें, इसी लिए कहा जाता है, कि कहीं ऐसा न हो कि दो महारर्थियों के बीच की लड़ाई में तीसरे न फायदा उठा लें। इसी लिए हर्रैया के मामले में पार्टी को काफी सोच समझकर निर्णय लेने पर जोर देने को कहा जा रहा है। हर्रैया सीट को विवादित बनाने में बड़े नेताओं को जिम्मेदार माना जा रहा है, और अगर कहीं 2027 का परिणाम प्रभावित हुआ तो जाहिर सी बात हैं, कि इसकी जिम्मेदारी बड़े नेताओं को ही लेनी पड़ेगी। हर्रैया वह विधानसभा क्षेत्र हैं, जहां पर 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के हारने के बाद भी सबसे अधिक मत मिले थे। यह वही विधानसभा क्षेत्र हैं, जहां से लोकसभा चुनाव में भाजपा को सबसे अधिक वोट मिलता आ रहा है।
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