बस्ती। सवाल उठ रहा है, कि जब महिलाएं यह जानती हैं, कि राजनीति का दरवाजा नेताओं के बिस्तर से होकर खुलता है, तो फिर नेता बनने को इतनी लालायित क्यों रहती है? हाल के दिनों में जिस तरह भाजपानेत्रियों के द्वारा अपने नेताओं पर योैन शोषण का आरोप खुलकर लगाने लगी है, उससे भाजपा नेताओं का असली चेहरा सामने आने लगा, आरोप में कितनी सच्चाई हैं, यह तो पुलिसिया जांच में पता चलेगा, लेकिन उसके पहले नेताओं के चरित्र का हनन हो चुका होता है। खासबात यह है, कि अब महिलानेत्री इस मामले में खुलकर सामने आने लगी है, अगर यही हाल रहा है, तो अच्छे घर की महिलाएं नेता बनने के लिए हजार बार सोचेगी। जो आरोप कभी फिल्मों की हीरोइन लगाया करता थी, वही आरोप अब महिलानेत्री लगाने लगी। किसी महिला के आरोप को न तो पूरी तरह सच माना जा सकता है, और न उसे पूरी तरह झुठलाया ही जा सकता है। आरोप लगाने वाली महिलानेत्री अच्छी तरह जानती है, कि वह कितना भी सच रहेगी, लेकिन उसकी बात को सच नहीं माना जाएगा, उल्टा कार्रवाई भी हो सकती है। वैसे भी पुरुष प्रधान देश में महिलाओं की कितनी सुनी जाती है, और उनका कितना सम्मान होता है, यह किसी से छिपा हुआ नहीं है। एक आरोप के चलते महिलाओं का सबकुछ चला जाता है, और जिस पर महिला आरोप लगाती है, उसका बहुत कुछ नहीं जाता। कुछ लोगों का कहना है, कि जब महिलाओं को अच्छी तरह मालूम हैं, कि उनके लिए राजनीति अच्छी नहीं हैं, और मकाम हासिल करने के लिए जाने ं किन-किन रास्तों से गुजरना पड़ता है, तो फिर राजनीति को ही अपना कैरियर क्यों बनाना चाहती? पता नहीं कितनी महिलाएं लोकलाज के डर के नाते आवाज तक नहीं उठाती। जो उठाती भी है, उन्हें इतना कुछ झेलना और सहना पड़ता है, कि उनकी आत्मा तक झलनी हो जाती है। यह भी सही है, न तो सभी पुरुष नेता और न सभी महिलानेत्री ही गलत होती है। आज भी समाज उन महिलानेत्रियों को अच्छी नजर से नहीं देखता, जो पार्टी के काम के लिए कभी दिल्ली तो कभी लखनउ की यात्रा करती रहती है। कार्यालयों एवं होटलों में रात्रि गुजारना पड़ता है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है, कि क्या बिस्तर पर सोने के बाद ही महिला नेता बन सकती है, या फिर अपनी इच्छाओं की पूर्ति कर सकती है। यह भी सही है, कि बिना किसी साक्ष्य के महिलानेत्रियों को यौन शोषण जैसे आरोप नहीं लगाना चाहिए, क्यों कि आरोप लगाना अलग बात है, और उसे साबित करना अलग बात है। मामला जब कभी न्यायालय तक जाता है, तो वहां पर आरोप को साबित करना किसी भी महिलानेत्रियों के लिए आसान नहीं होता, और जिसके चलते कभी-कभी पांसा उल्टा भी पड़ जाता है, तब महिलानेत्रियों को पता चलता है, कि आरोप लगाना कितना आसान है, और उसे साबित करना कितना कठिन। इसी लिए महिलानेत्रियों को किसी भी नेता पर आरोप लगाने से पहले विधिक राय अवष्य लेना चाहिए, ताकि बचाव का रास्ता निकल सके, किसी के बहकावे या झांसें में आकर किसी पर आरोप नहीं लगाना चाहिए। भाजपा के जिला महामंत्री अमृत वर्मा ने एक दिन पहले लालगंज थाने में शैल त्रिपाठी पत्नी कमलदेव त्रिपाठी निवासी ग्राम कल्याणपुर कुदरहा थाना लालगंज के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया, तहरीर में कहा गया है, कि शैल त्रिपाठी ने भाजपा के जिलसध्यक्ष विवेकानंद मिश्र और भाजपा के राष्टीय महामंत्री एवं पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी की प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए अपने फेसबुक आईडी पर 19 अक्टूबर 26 को सुबी लगभग सात बजे सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया, जिसमें गलत, भ्रामक एवं तथ्यहीन पोस्ट अपलोड किया, सोशल मीडिया के प्लेट फार्म पर विवेकानंद मिश्र के बारे में कहा गया कि जो महिलाएं बंद कमरे में अपना शोषण करने नहीं देती, उसे पद से हटवा देते है। अन्य पोस्ट पर भी अशोभनीय बाते कही गई, कहा गया, कि दोनों नेता अत्यंत प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं, तथा क्षेत्र, समाज एवं देश में क्षेत्र, जनपद, प्रदेश और देश में उनकी प्रतिष्ठा एवं लोकप्रियता है। इसे लेकर आमजन में काफी नाराजगी है। समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। जिले में यह पहली बार हैं, जब किसी भाजपानेत्री पर इस तरह के आरोप लगाए गए, और उसके परिप्रेक्ष्य में मुकदमा दर्ज हुआ। सवाल उठ रहा है, कि क्या इस मुकदमें से कोई सबक लेने को तैयार है? यह सवाल खासतौर से महिलानेत्रियों को लेकर उठ रहा है।