बस्ती। मड़वानगर के सैनी परिवार की दो लड़कियों का घर से जो अपहरण करने के मामले में छह लोगों के खिलाफ लड़कियों की मां ने मुकदमा कायम करवाया, वह किसी साजिष की ओर ईशारा करता है। माता ने पुलिस से दोनों बेटियों को बरामद करने और अपहरण करने वालों का एनकांउटर करने की मांग की
पुलिस ने जब मड़वानगर के एक पत्रकार के आवास पर तीन घंटे तक सीसी कैमरे को खंगाला तो पता चला कि 16 अक्टूबर 26 की सांय साढ़े छह बजे लड़कियों के घर से न तो कोई लड़की निकली और न कोई घर में प्रवेश ही किया, और न किसी लड़की का अपहरण ही हुआ, इस बात की पुष्टि लड़की के अड़ोस पड़ोस से भी पूछताछ में हुई। अब जरा अंदाजा लगाइए कि दो बालिग लड़कियों का अपहरण छह लोग मिलकर घर से करते हैं, और पड़ोसी को भनक तक नहीं लगती, और न लड़कियों एवं उसके मां-बाप की ओर से कोई विरोध ही किया जाता, किसी ने यह तक हल्ला तक नहीं मचाया कि उसकी लड़कियों का अपहरण करके लेकर जा रहे है। आवास के अगल-बगल कोई चार पहिया वाहन के होने का भी पता नहीं चला, तो क्या छह अपहरणकर्त्ता दोनों लड़कियों को पीठ पर लादकर घर से उठा ले गए, यह पहला ऐसा अपहरण होगा, जिसमें एक साथ दो सगी बहनों के अपहरण की रिपोर्ट लिखाई गई, छानबीन कर रही पुलिस को भी यह अच्छी तरह मालूम हैं, कि अपहरण की कहानी घर के लोगों की ओर से रची गई, अब जरा अंदाजा लगाइए कि एफआईआर में लड़कियों के सगे चाचा के चार पुत्रों को भी नामजद किया गया, लेकिन उनके माता-पति का नाम अज्ञात में डाला गया। बाद में पता चला कि संपत्ति विवाद में चाचा के पक्ष में कोर्ट से आदेश हुआ था, उसी का बदला लेने के लिए लड़कियों की माता ने सबक सिखाने की नीयत से चारों भतीजों को नामजद कर दिया। लड़कियों की उम्र को भी छिपाया गया। एक बालिक को नाबालिग बताया गया, और दूसरे की भी उम्र को कम दिखाया गया, कम उम्र लिखाने के पीछे भी परिवार की साजिश बताया जा रहा है। पिता के रहते माता की ओर से एफआईआर दर्ज करवाना भी संदेश प्रकट करता हैं, पुलिस अगर छानबीन के बाद मुकदमा दर्ज करती तो शायद कभी न दर्ज करती, चूंकि इसकी शिकायत लखनऊ तक की गई, इस लिए न चाहते हुए भी पुलिस को मुकदमा दर्ज करना पड़ता। छानबीन के दौरान और पड़ोसियों से पूछताछ में पता चला कि इस परिवार का मोहल्ले के किसी भी परिवार से मेलजोल नहीं है, अक्सर इस परिवार की लड़कियां रेप के मामले में मुकदमा दर्ज कराने की धमकी देती रहती। पड़ोस के लोगों का कहना है, कि परिवार ने जानबूझकर फंसाने के लिए अपनी दोनों बेटियों का घर से अपहरण कराने के आरोप में मुकदमा दर्ज करवाया। कहते हैं, कि दोनों लड़कियां कोई चार पांच साल की बच्ची तो है, नहीं जिसे कोई घर से अपहरण कर लें। खासबात यह है, कि अपहरण के समय पूरा परिवार घर पर ही मौजूद था, उसके बाद भी परिवार ने कोई विरोध नहीं किया और न पड़ोसियों से कोई मदद ही मांगा। इस अपहरण में एक मुस्लिम नेता का नाम शामिल होना चर्चा का विषय बना हुआ हुआ है। कानून के जानकारों का कहना है, कि न्यायालय में यह केस एक मिनट भी नहीं टिक सकता। लोग अपनी लड़कियों को ढ़ाल बनाकर किस तरह दुष्मनी साधते और इसी बहाने ब्लैकमेल करते हैं, इसका सच देखना हो तो कोई दो बहनों के अपहरण के मामले में देख सकता है। दुनिया का यह पहला ऐसा अपहरण होगा, जहां पर दो बालिग लड़कियों का छह लोग घर से अपहरण करते हैं, और परिवार कोई विरोध नहीं करता, और न मोहल्ले वालों से कोई मदद ही मांगता। आराम से छह लोग घर आते हैं, और परिवार के सामने दोनों लड़कियों का अपहरण कर ले जाते है। सौखैती के नाम पर लड़कियों का परिवार काफी चर्चा में रहता है, कोख भरने के मामले में कई बार लोग घर पर आकर बवाल भी कर चुकें है। मड़वानगर का यह पहला ऐसा परिवार होगा, जिससे मोहल्ले के किसी भी घर पर आना जाना नहीं है। इस परिवार को मोहल्ले वाले झगडालू प्रवृत्ति का मानते है। पुलिस ने अगर इसकी कायदे से जांच पड़ताल किया तो लड़की का परिवार ही फंस सकता है। फर्जी केस दर्ज कराने के मामले में परिवार के लोगों पर मुकदमा भी दर्ज हो सकता है। जिन लोगों के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज हुआ, उसमें नोमान अहमद पुत्र पता अज्ञात, प्रशान्त वर्मा पुत्र पता अज्ञात, विनोद सैनी पुत्र पता अज्ञात, अमित सैनी पुत्र पता अज्ञात प्रताप सैनी पुत्र पता अज्ञात और धीरज सैनी पुत्र पता अज्ञात।
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