बस्ती। हीरालाल कृषि पूर्व माध्यमिक विधालय फरदापुर हर्रैैया के प्रबंधक गोमती प्रसाद पांडेय पर गुरुजी अरविंद कुमार उपाध्याय ने आरोप लगाते हुए बीएसए को लिखा कि जब हमने प्रबंधक से उधार का 15 लाख मकान बनाने के लिए मांगा तो इन्होंने अक्षम करार देते हुए पांच माह का वेतन नहीं दिया। बीएसए को लिखे मार्मिक पत्र में गुरुजी ने कहा कि जो व्यक्ति डेली नौ किमी, साइकिल से घर से स्कूल और घर जाता हो, वह कैसे पठन पाठन में अक्षम हो सकता है? लिखा कि मेरे और मेरे परिवार की जीविका का साधन वेतन ही है, लेकिन प्रबंधकजी को मेरे परिवार और मेरी परेशानी से कोई सरोकार नहीं, उन्हें तो मेरे वेतन का आधा चाहिए।

कहा कि वह कहते हैं, कि जब तक वेतन का आधा नहीं मिलेगा, मैं वेतन बिल प्रस्तुत नहीं करुंगा। लिखा कि उनकी आर्थिक स्थित बहुत ही दयनीय हो गई, दैनिक खर्चो, बच्चों की फीस, लोन की ईएमआई व अन्य खर्च बाधित हो गएं है। लिखते हैं, कि विधालय के प्रधानाचार्य उन्हें पढ़ाने में सक्षम मानते हैं, लेकिन प्रबंधकजी अक्षम बताते है। लिखते हैं, कि अगर मैं अक्षम होता तो मेरे दुर्घटना के पांच माह बाद केजीएमयू के डाक्टर उन्हें फिटनेस प्रमाण-पत्र नहीं देतें, और न प्रबंधक इलाज के बाद ज्वाइन ही कराते।

लिखा कि प्रबंधकजी ने इस बीच उनसे कभी नकद तो कभी प्रधानाचार्य सत्यराम उपाध्याय के खाते में पैसा उधार के रुप में लेते रहें। तीन लाख तो उन्होंने उधार स्वरुप खाते में जमा किया। आगे भी सालों पैसा लिया जाता रहा। लिखा कि जुलाई सात दिसंबर 18 से जुलाई 25 तक प्रबंधक के द्वारा यह कर 15 लाख उधार लिया गया, कि जब आवष्यकता होगी मांगोंगे पूरा पैसा मिल जाएगा। लिखा कि जब मकान बनाने के लिए पैसे की आवयकता पड़ी और प्रबंधक से मांगा तो कहा कि पैसा नहीं मिलेगा, और आगे भी नौकरी के वेतन से आधा यानि हर माह 50 हजार देना होगा, नहीं दोगें तो अक्षम बताकर नौकरी से निकलवा दूंगा।

जब इसकी शिकायत बीएसए से की गई, तो अंजाम भुगतने की धमकी दी गई। षिकायत वापस लेने का दबाव बनाया गया। जब शिकायत वापस नहीं लिया तो मेरे आलावा अन्य सभी के वेतन का बिल बनाकर लेखाधिकारी के पास भेज दिया। बीएसए ने प्रबंधक को बुलाकर फटकार भी लगाई, और वेतन बिल प्रस्तुत करने का निर्देष दिया, उसके बाद भी प्रबंधक ने भुगतान नहीं किया।

लिखा कि पांच माह से वेतन न मिलने के कारण वह अवसाद की स्थित में पहुंच गएं है। बीएसए ने वेतन देने का लिखित आदेश भी दिया, लेकिन कहा गया कि जब तक वेतन का आधा यानि पांच माह का ढ़ाई लाख नहीं मिलेगा, बिल प्रस्तुत नहीं करुंगा। लिखा कि मुझे लकवाग्रस्त और अयोग्य बताकर नौकरी से निकालने की धमकी दी जा रही है, लिखा कि उसके बाद भी डेली साइकिल से घर से स्कूल जाता हूं, हस्ताक्षर करता हूं, पूरे दिन स्कूल में रहता हूं, बच्चों को पढ़ाता भी हूं।

लिखा कि यह कैसे हो सकता है, कि जो अध्यापक स्कूल के प्रधानाचार्य की नजर पूरी तरह स्वस्थ हो, वह कैसे प्रबंधक के नजर में अक्षम हो सकता है। कहा कि जब से उधार का 15 लाख मांगा तब से अक्षम हो गया। बीएसए से जानमाल का खतरा बताते हुए किसी अन्य स्कूल में तबादला करने की मांग की गई। वहीं प्रबंधक ने सारे आरोप को निराधार बताते हुए कहा कि जब वह बीएसए की नजर में सक्षम तो बीएसए साहब क्यों नहीं मेडिकल बोर्ड  और शेक्षिक बोर्ड के सामने प्रस्तुत करते?