बनकटी/बस्ती। बनकटी विकास खंड के शंकरपुर गांव के किसान मोहम्मद हसन जिले के ही नहीं देश भर के किसानों के लिए आईडिएल बन गएं है। कहते हैं, कि अगर कुछ नया करने का जज्बा हो तो आसमान से तारे भी तोड़े जा सकते है। इन्होंने रेड एप्पल बेर और थाई ग्रीन एप्पल बेर की बागवानी को अपनी आजीविका का संचालन का आधार बनाया है। पारंपरिक खेती से हटकर वर्ष 2023 मे कश्मीरी रेड एप्पल बेर और थाई ग्रीन एप्पल बेर की खेती शुरु की। जिससे उनको पहले साल में ही ढाई लाख रूपए की आय हुई है। वहीं दूसरी ओर किसानों के लिए प्रेरणा के स्रोत बनाकर उभरे हैं। उन्होंने बताया कि वह लीज पर एक एकड़ खेत लेकर एक मार्च में को कोलकाता से दो किस्म की 275 पौधे को मंगवाया। जिसमें काश्मीरी रेड एप्पल बेर का 175 पौधा और थाई ग्रीन एप्पल बेर के 100 पौधा था। उसका खर्च दस हजार आया। उन्होंने बताया कि एक बार पौधा लगाने पर 8 से 10 वर्ष तक इसका फल लिया जा सकता है और समय-समय पर पौधो की कटाई और छंटाई करने की आवश्यकता रहती है। जिसमें फल की क्वालिटी अच्छी होती है व उत्पादन भी अच्छा होता है।
एक अप्रैल 2023 को डेढ़ से दो फुट का गढ्ढा खोदकर उसमें डीएपी,पोटाश,जिक,नीम सरसों खली व देशी गोबर खाद को डालकर एक एकड़ खेत में 12 फुट पर पौधे की लम्बाई की दूरी व 10 फुट पर पौधे लगाया था जिसका कुछ खर्च 40 से 50 हजार आया था।और गर्मी में एक हफ्ते में सिंचाई करना पड़ता है। आगे बताया कि अगर पौधे में किसी भी प्रकार कोई भी समस्या होती थी तो वह कोलकाता नर्सरी गाइड लाइन का सहारा लेते थे। और वहां से पौध बचाव के उपाय बताए जाते थे। पांच महीने बाद सितंबर माह से दोनो किस्मों में काश्मीरी रेड एप्पल बेर व थाई ग्रीन एप्पल बेर में फूल लगना चालू हो गया। समय-समय पर कीटनाशक स्प्रे करने की आवश्यकता होती है। सात महीने के बाद उनकी मेहनत रंग लाई। नंबर माह में पहले वर्ष काश्मीरी रेड एप्पल बेर के एक पौधे में करीब 15 से 20 किलो तक फल लगे हुए थे दूसरे वर्ष मे फलों की संख्या बढ़कर करीब 25 से 30 किलो तक पहुंच गई है। दूसरी प्रजाति थाई ग्रीन एप्पल बेर एक पौधे में पहले साल करीब 20 से 25 किलो तक फल लगे हुए थे। इनकी खेती को देखने के लिए दूर-दूर तक के दर्शक आ रहें हैं। बस्ती जिले के अलावा पड़ोसी जिले संतकबीरनगर, अम्बेडकरनगर, सिद्धार्थ नगर के अलावा और लोग भी पहुंच रहे है।और उनसे खेती करने के बारे में जानकारी ले रहे हैं। किसान मोहम्मद हसन बताते है कि इससे पहले वह केले की खेती करते थे। सालाना लाखो रूपये की कमाई करते थे। एक तरफ जहां लोग आनलाइन तकनीक युग में आनलाइन कारोबार से जहां फ्रॉड के शिकार हो रहे हैं तो वही मोहम्मद हसन एक ऐसे किसान है जिन्होंने इंटरनेट के माध्यम से काश्मीर एप्पल बेर की खेती करने की जानकारी ली और खेती करके एक नई सुनहरी इबादत लिख दी है। उन्होंने नई तकनीक से खेती करके इधर बनकटी ब्लाक के क्षेत्र में लोगों को अपने ओर आकर्षित कर लिया है। उन्होंने बताया कि इसकी बदौलत हमने पहले साल मे ही दो लाख रूपए की आमदनी थी और दूसरे साल में उन्हें इससे करीब साढ़े तीन लाख की आमदनी हो सकती है। बनकटी ब्लाक के कुरियार गांव के रहने वाले किसान महेंद्र चौधरी ने बताया कि वह मोहम्मद हसन से प्रेरणा लेकर 6 बीघा (दो एकड़) खेत में एप्पल बेर की खेती की है। शंकरपुर गांव निवासी नुरूल हसन ने डेढ़ बीघा खेत में एप्पल बेर की खेती की है। इसके अलावा संतकबीरनगर नगर के नाथनगर ब्लाक के सड़हरा गांव निवासी किसान तारीफ अली ने 3 बीघा (एक एकड़)खेत में एप्पल बेर की खेती किया है। किसान मोहम्मद ने बताया कि स्थानीय बाजारों मंे कश्मीरी रेड एप्पल बेर और थाई ग्रीन एप्पल बेर मांग इसकी ज्यादा है बेर अभी पूरी-तरह पक्की भी नहीं है जनवरी महीने में पक कर तैयार होगा। उसे व्यापारी खेत मे से ही थोक रेट में कश्मीरी रेड एप्पल बेर को 50 से 55 रूपया किलो और थाई ग्रीन एप्पल बेर को 40 से 45 रूपया किलो खरीदने को तैयार हैं। फुटकर में अभी बेर 20 रूपए का एक पांव बिक रहा है।
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