बस्ती। जिला चिकित्सालय मे तैनात आयुष चिकित्साधिकारी डाक्टर वी.के. वर्मा का कहना है, कि अगर किसी को स्लिम और स्मार्ट रहना है, तो दिन भर खूब पानी पिए। कहते हैं, कि मोटापा अपने साथ कई समस्याओं को लेकर आता है। वजन और शरीर का आकार बढ़ने के साथ ही गंभीर रोगों का होना भी स्वाभाविक है। ऐसे मे मोटामा कम करने के लिए फाइबर और प्रोटीन से युक्त संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और जीवनशैली में बदलाव जरूरी हैं। मीठे पेय, प्रोसेस्ड फूड और तली-भुनी चीजों से दूरी बनायें।
कहते हैं, कि वजन और फैट नियंत्रित रखने के लिये घरेलू उपायों और होम्योपैथिक औषधियों के बारे मे जानकारी लेनी चाहिए। वजन और फैट नियंत्रित रखने के लिये दिन भर में पर्याप्त पानी पिएं। रोजाना सुबह तेज चलना और सुबह खाली पेट पानी के साथ जीरा, अजवाइन का सेवन मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है जिससे वजन कम करने और फैट नियंत्रित रखने मे मदद मिलती है। इसके साथ ही हमे अपनी लाइफस्टाइल मे भी बदलाव लाना होगा। उच्च फाइबर और प्रोटीनः आहार में दालें, अंकुरित अनाज, हरी सब्जियां और फल शामिल करें, जो पेट को भरा रखते हैं। शुगर और प्रोसेस्ड फूड से बचेंः चीनी, मिठाई, पेस्ट्री, कोल्ड ड्रिंक्स और जंक फूड का सेवन न करें, सुबह गुनगुना पानी पिएं और दिन भर हाइड्रेटेड रहें, इससे वजन कंट्रोल में रहता है, जीरा, सौंफ, मेथी और अजवाइन का पानी सुबह खाली पेट पीने से मेटाबॉलिज्म बढ़ता है। हर दिन कम से कम 30-60 मिनट तेज गति से चलें 05. कार्डियो, योग और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को रूटीन में शामिल करें। हफ्ते में 150 मिनट की एक्सरसाइज करने का लक्ष्य रखें। 06. लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें 07. रोजाना 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें, क्योंकि नींद की कमी मोटापे का कारण बनती है 08. मानसिक तनाव कम करने के लिए ध्यान करें 09. रात का भोजन सूर्यास्त के आसपास या सोने से कम से कम 2-3 घंटे पहले करें 10. खाना चबा चबा कर खायें, खाने के तुरंत बाद न सोएं 11. एक बार में ज्यादा न खाएं 11. लंबे समय तक एक जगह बैठकर काम न करें। डाक्टर वी.के. वर्मा का कहना है, कि अचानक वजन या मोटापा घटाने की न सोचें, यह एक प्रक्रिया के तहत घटाया जा सकता है। डायटिंग से वजन घटाने की न सोचें। खाद्य पदार्थों का भण्डारण न करें। बासी भोजन न खायें। जल्दी-जल्दी न खाएं। यदि समस्या अधिक हो, तो डॉक्टर या डायटीशियन से सलाह ले सकते हैं। लाइको लेकेसिस, कल्केरिया कार्व, कल्केरिया फास, सीपिया, फाइटोलक्का, चाइना, बीमसपकवदपनऊ, मर्कसोल, पल्सेटिला आदि औषधियां उचित क्षमता व मात्रा मे डाक्टर के परामर्श से लक्षणानुसार ली जा सकती हैं।
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