जब रीढ़ ही टूट जाए तो मिसाल कैसे बनेगा उ.प्र ‘चंद्रेश प्रताप सिंह, विकास ठाकुर-मौसमी कर्मचारी संघर्ष समिति’

बस्ती। 1932 में स्थापित बस्ती जनपद की रीढ़ कही जाने वाली गोविंद नगर शुगर मिल, वाल्टरगंज के गेट पर आज अनिश्चितकालीन धरने का ’319वां दिन’ है। किसान, मजदूर, मौसमी कर्मचारी अपने 8-9 साल के बकाया वेतन, ग्रेच्युटी, पीएफ और गन्ना भुगतान के लिए सड़क पर हैं।

 ’1. चीनी मिल की चिमनी ठंडी, क्षेत्र बेहाल’ 
कभी यह मिल कप्तानगंज, रुधौली, महादेवा और सदर विधानसभा के 50 हजार परिवारों की आजीविका थी। पूर्वजों ने सात जनवरी 1985 को लाठियाँ खाकर इस पैतृक धरोहर को बचाया था। आज बिना शासन की अनुमति के मिल बंद है।’2. कानून का पालन आवश्यक’ 
गन्ना खरीद अधिनियम में 14 दिन में भुगतान का प्रावधान है। बजाज चीनी उद्योग जैसे बड़े घरानों पर किसानों का अरबों रुपया बकाया है। हम चाहते हैं कि शासन-प्रशासन इस पर संज्ञान लेकर नियमों का कड़ाई से पालन कराए।

’3. गोली खाऊंगा, जेल जाऊंगा-विकास ठाकुर’ 
धरने का नेतृत्व कर रहे विकास ठाकुर ने कहा कि मिल सिर्फ लोहा-लक्कड़ नहीं, पूर्वजों की दी हुई धरोहर है। जब तक इसका समाधान नहीं होगा, शांतिपूर्ण धरना जारी रहेगा।

’4. बच्चे शिक्षा से वंचित, बेटियों की शादी रुकी’ 
सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि लगभग 8-9 साल से वेतन न मिलने के कारण मिल कर्मचारियों के बच्चे अभाव में स्कूल छोड़ रहे हैं। कई मौसमी कर्मचारियों ने कर्ज लेकर बेटियों की शादी तय की थी, पर भुगतान न होने से विवाह रुक गए हैं।

’5. कलेक्ट्रेट में उठी मजदूरों की आवाज’ 
आज कलेक्ट्रेट सभागार में एमएलसी देवेन्द्र प्रताप सिंह के प्रतिनिधि श्री हरीश सिंह जी’ ने वाल्टरगंज चीनी मिल के श्रमिकों-किसानों का विषय प्रमुखता से उठाया।
’हरीश सिंह का बयान’ 
वाल्टरगंज चीनी मिल बस्ती की आर्थिक रीढ़ है। मौसमी कर्मचारियों और किसानों का दर्द जायज है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की सरकार किसान-मजदूर हितैषी सरकार है। हमें पूर्ण विश्वास है कि मुख्यमंत्री इस प्रकरण का संज्ञान लेकर 2018 से लंबित बकाया भुगतान कराएंगे और मिल को पुनः चालू कराने की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे। यह चार विधानसभाओं के चहुंमुखी विकास से जुड़ा मामला है। हमारा उद्देश्य समाधान है, टकराव नहीं। मुझे भरोसा है कि शासन के स्तर से जल्द सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।

’6. मिल चलाओ-क्षेत्र बचाओ’ 
एक चीनी मिल बंद होने से सिर्फ 500 नौकरी नहीं जाती, पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था चौपट हो जाती है। दुकानदार, ट्रांसपोर्टर, खेतिहर मजदूर-सबकी रसोई का चूल्हा बुझ गया है।

 ’हमारी मांगे’ 
1. वर्ष 2018 से मौसमी कर्मचारियों के वेतन, ग्रेच्युटी, पीएफ, बोनस का तत्काल भुगतान। 
2. अवैध क्लोजर की जांच कर उचित कार्रवाई। 
3. गन्ना किसानों के संपूर्ण बकाया के साथ मिल को तत्काल चालू किया जाए। 
4. चारों विधानसभाओं के युवाओं का पलायन रोका जाए।
सबका साथ, सबका विकास का संकल्प तभी पूरा होगा जब वाल्टरगंज के उस मजदूर के बच्चे को भी किताब मिलेगी जिसने 30 साल मिल में पसीना बहाया। हमें विश्वास है कि प्रदेश सरकार इस धरोहर को बचाएगी।
’मिल चलाओ, क्षेत्र बचाओ।’ 
’किसान बचेगा, तभी देश बचेगा।’