बस्ती। प्रदेश का एआरटीओ कार्यालय पहला ऐसा विभाग होगा, जहां पर चोरी छिपे नहीं बल्कि खुलेआम डीएम के लिए पैसे मांगे जाते हैं, और कहा जाता है, कि जब तक 2200 नहीं दोगें, डीएल नहीं बनेगा, चाहें जितना सोर्स लगा लो चाहें जहां षिकायत कर लो लेकिन 2200 तो देना ही पड़ेगा। यह भी गारंटी दी जाती है, कि अगर 2200 दे दिया तो टेस्ट भी नहीं देना पड़ेगा। घर बैठे डीएल मिल जाएगा। आईटीआई कैंपस के बगल स्थित ड्राइविंग ट्रेनिंग एवं टेस्टिंग इंस्टीट्यूट के टेस्ट ट्रैक की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। दोपहिया और चारपहिया वाहनों के ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया में आवेदकों से कथित तौर पर अतिरिक्त रकम लिए जाने और टेस्टिंग प्रक्रिया को लेकर अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। मामला उस समय चर्चा में आया जब एक आवेदक ने अपने बच्चे और एक रिश्तेदार के ड्राइविंग लाइसेंस के लिए निर्धारित सरकारी शुल्क ऑनलाइन जमा कराया। इसके बाद बायोमेट्रिक प्रक्रिया के दौरान कथित रूप से 100 अतिरिक्त सुविधा शुल्क लिए जाने की बात सामने आई।
आरोप है कि इसके बाद लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए 2,200 और देने की बात कही गई। आवेदक के अनुसार, कथित तौर पर यह भी कहा गया कि यदि 2,200 नहीं दिए जाते हैं तो वाहन को टेस्ट ट्रैक पर चलाकर ड्राइविंग टेस्ट देना होगा। वहीं, अतिरिक्त रकम देने पर बिना टेस्ट दिए लाइसेंस की प्रक्रिया आगे बढ़ने की बात कही गई। टेस्टिंग प्रक्रिया पर भी उठे सवाल- आवेदक का दावा है कि बृहस्पतिवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक वह टेस्टिंग सेंटर में मौजूद रहा, लेकिन इस दौरान उसे टेस्ट ट्रैक पर किसी आवेदक को वाहन चलाते हुए नहीं देखा गया। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अनिवार्य टेस्टिंग हो रही है तो आवेदकों का वास्तविक ड्राइविंग टेस्ट किस प्रकार लिया जा रहा है। आवेदक ने पूरे परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कराए जाने की मांग की है, ताकि उस अवधि में टेस्टिंग प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। प्रतिदिन हजारों रुपये की वसूली का आरोप-स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि टेस्टिंग सेंटर पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में आवेदकों से अतिरिक्त रकम की वसूली की जाती है। कुछ लोगों ने आकलन कर के कथित रूप से प्रतिदिन 50 हजार से एक लाख तक की अवैध वसूली होने की बात कही है।
क्या बिना टेस्ट पास किए मिल सकता है लाइसेंस? पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि कोई आवेदक ड्राइविंग टेस्ट में असफल होता है तो क्या अतिरिक्त रकम लेकर उसके लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है? यदि ऐसा हो रहा है तो यह न केवल ड्राइविंग टेस्टिंग व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है,बल्कि सड़क सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय है। ड्राइविंग लाइसेंस का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वाहन चालक सड़क पर वाहन चलाने के लिए आवश्यक कौशल और नियमों की जानकारी रखता हो। ऐसे में यदि बिना उचित टेस्ट के लाइसेंस जारी किए जाने की शिकायत सही पाई जाती है तो संबंधित व्यवस्था की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी हो जाती है। शिकायतकर्ता का कहना है कि करीब तीन वर्ष बाद जब उसने अपने बच्चे और एक रिश्तेदार के लाइसेंस के लिए सरकारी प्रक्रिया के तहत आवेदन किया तो उसे कथित रूप से अतिरिक्त रकम देने की बात कही गई। उसका कहना है कि यदि वह अतिरिक्त पैसा नहीं देता तो उसे स्वयं वाहन चलाकर टेस्ट देना पड़ता, जबकि पैसा देने की स्थिति में बिना टेस्ट के लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी कराने का संकेत दिया गया। जांच से सामने आ सकती है सच्चाई-मामले में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। टेस्ट ट्रैक के सीसीटीवी फुटेज, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, ऑनलाइन आवेदन, सरकारी शुल्क की रसीद,टेस्टिंग रिकॉर्ड तथा उस दिन उपस्थित आवेदकों का विवरण जांचा जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। शिकायतकर्ता ने संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कराने और यदि अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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