बस्ती। विकास भवन के उस आदेश का असर जिसमें जिलेभर के बीडीओ से कहा गया कि जितना हो सके फर्जी मस्टरोल निकालिए, इस बात की चिंता मत करिए, कि शिकायत पर कोई जांच भी होगी, जैसे ही विकास भवन के इस फरमान की जानकारी सचिवों को दी गई, और कहा गया, कि मनरेगा में जितना हो सके फर्जीवाड़ा करो, क्यों कि साहब लोगों को पैसा कमाना है, सचिव ने बीडीओ के फरमान को रोजगार सेवक और तकनीकी सहायक को सुनाया, फरमान सुनते ही मानो फर्जी कार्य और भुगतान करने की बाढ़ सी आ गई, जैसा अधिकारी लोग चाहते थे, वैसा होने लगा, भले ही मनरेगा में प्रधान की कोई भूमिका न हो लेकिन कौन नहीं जानता कि सारा फर्जीवाड़ा प्रधान के जरिए ही होता है। अगर किसी को साहबों के आदेश के सच को देखना हो तो वह रुधौली ब्लॉक के ग्राम पंचायत पैड़ा में मनरेगा से चल रहे पिच रोड से शमशान तक मार्ग, नहर से पुल तक नाला खुदाई, चिंकू के खेत से कुथियां लाल तक चकमार्ग एवं नहर से नशीबुल्लाह के चक तक कृषि मार्ग के कार्य को देख सकता है। चारों परियोजनाओं पर एक भी फावड़ा नहीं चला कि और 10 दिन में लगभग चार हजार मस्टरोल निकल गया। परियोजना स्थल से लिए गए फोटोग्राफ इस बात का सबूत हैं, कि एक भी फावड़ा नहीं चला। यही हाल पूरे जिले की है। जब मनरेगा की रखवाली करने वाले साहब ही फर्जीवड़ा करने का फरमान जारी करेगें तो फर्जी मस्टरोल निकलेगा ही, इन परियोजनाओं पर ऐसे-ऐसे लोगों के नाम पर मस्टरोल निकाला गया, जो गांव में ही नहीं रहते, कोई मुंबई रहता तो कोई दुबई रहता, फिर भी इन लोगों से फर्जी फावड़ा चलवाया जा रहा है। एक-एक दिन में 115-115 फर्जी मस्टरोल निकाले गए। कोई यह देखने वाला नहीं कि क्या हो रहा है, अगर कोई शिकायत भी करता है, तो उसे अनसुना कर दिया जाता है, शिकायती पत्र को डस्टबिन में डाल दिया जाता है। जब शिकायतकर्त्ता डीसी मनरेगा से फर्जीवाड़े की शिकायत मोबाइल से करता है, तो उससे कहा जाता है, मोबाइल पर शिकायत भेज दीजिए, जांच करवाता हूं, और जब शिकायतकर्त्ता राजेश मणि त्रिपाठी मोबाइल पर शिकायत भेजते हैं, तो इन्हें जांच के बारे में पता ही नहीं चलता, जब भी मुख्यालय से बीडीओ के पास शिकायतों का निस्तारण करने के लिए कोई शिकायती पत्र भेजा जाता है, तो बीडीओ साहब इस लिए उसे डस्टबिन में डाल देते हैं, क्यों कि इन्होंने ही फर्जीवाड़े करने का जो आदेश दिया। बीडीओ साहब ही कार्ययोजना की मंजूरी देते हैं, गलत-सही भुगतान करते हैं। जाहिर सी बात जो मनरेगा पीओ/बीडीओ फर्जीवाड़े का सरगना हो, वह कैसे अपनी जांच करेगा? शपथ-पत्र के साथ डीएम से राजेश मणि त्रिपाठी ने शिकायत करते हुए जांच कराने की मांग की, जांच करने गए भी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा प्रधान कुलमुनिशा के पुत्र आमिर अली ने अवष्य शिकायतकर्त्ता को धमकी दिया कि बहुत शिकायत करते हो, स्कार्पियों चढ़ा दूंगा, सारी शिकायत पिछवाड़े में घुस जाएगी। इसके लिए एसपी को एफआईआर के लिए भी लिखा फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

टूटे ‘मनोबल’ से ‘क्या’ कोई बूथ ‘अध्यक्ष’, बूथ ‘को’ बचा ‘पाएगा’?

भाजपा के सेक्टर संयोजक राजेश मणि त्रिपाठी ने इसकी शिकायत पूर्व विधायक संजय प्रसाद जायवाल, पुष्कर आदित्य विक्रम सिंह, जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्र और जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरी से करते हुए कार्रवाई करवाने की यह कहते हुए मांग किया कि जब भाजपा के बूथ अध्यक्ष की ही नहीं सुनी जाएगी, तो किसकी सुनी जाएगी, दुखी मन से कहा कि पार्टी और उसके नेताओं का भगवान भोलेनाथ रक्षा करें, यह भी कहा कि टूटे मनोबल से कार्यकर्त्ता से क्या आप लोग यह उम्मीद करते हैं, कि वह बूथ को बचा पाएगा? जब जायज काम को भी अधिकारी नहीं सुनेगें तो पार्टी को वोट कौन करेगा और भाजपा प्रत्याशी को कौन जीताएगा? यह सवाल सिर्फ राजेश मणि त्रिपाठी का नहीं हैं, तो मन, मन और धन से पार्टी की सेवा कर रहे हैं, बल्कि यह दर्द उन हजारों कार्यकर्तओं का है, जिसकी पुलिस नहीं सुनती, प्रशासन नहीं सुनता। सबसे बड़ा सवाल, एक कार्यकर्त्ता जब अपनी मोटरसाइकिल को पुलिस चौकी से नहीं छुड़वा सकता तो वह क्यों पार्टी का झंडा ढ़ोएगा और दरी बिछाएगा? सच तो यह है, कि आज नेता कार्यकर्त्ता की नहीं सुनते, उनके हितों की रक्षा नहीं करते, उनकी जरुरतों को पूरा नहीं करते, उनका सम्मान नहीं करतें। अगर ऐसा नहीं होता तो पार्टी की महिला जिलाध्यक्ष अपने ही नेताओं पर गंभीर आरोप न लगाती।