बस्ती। सवाल उठ रहे हैं, कि राष्टीय महामंत्री हरीश द्विवेदी के बस्ती के प्रथम आगमन के अवसर पर जो पोस्टर, बैनर और होर्डिगं लगाए गए, उनमें अधिकांश में भाजपा के एक मात्र विधायक अजय सिंह पोस्टर से क्यों गायब रहें? खासतौर पर बड़े नेताओं के पोस्टर और होर्डिग से। सवाल यह भी उठ रहा है, कि क्यों नहीं विधायकजी को पोस्टरों और बैनरों में स्थान दिया गया? यह सोचने का विषय उन लोगों का नहीं हैं, जिन लोगों ने विधायकजी को स्थान नहीं दिया, बल्कि विधायकजी के सोचने का विषय हैं, कि क्यों नहीं उन्हें स्थान दिया गया? जबकि वह जिले के एक मात्र भाजपा के विधायक है। इसी सवाल का जबाव गोसेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ल को भी तलाषना होगा। इसे लेकर संत सिंह लिखते हैं, कि जो विधायकजी के सबसे खास और सबसे अधिक नजदीक थे, उनके पोस्टरों से भी विधायकजी गायब रहे। हर्षित यादव कहते हैं, कि यह विधायकजी को भी सोचना चाहिए। सोनू चौधरी हर्रैया, सवाल के लहजे में कहते हैं, कि विधायकजी किसी से जबरदस्ती छपवाएगें क्या? झीन दूबे करमदार कहते हैं, कि कोई पार्टी हो, कोई नेता हो, अपना उल्लू सीधा करने के चक्कर किसी को भी गिराने और नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ता, अवसर मिलने पर विधायकजी भी यही काम करते है। कहा भी जाता है, कि जो चालाक और चतुर नेता होता है, वह सबकुछ जानते हुए यह जाहिर नहीं होने देता कि वह सामने वाले से नाराज है। वैसे भी राजनीति और पत्रकारिता के क्षेत्र में अवसर बहुत मिलता है। जरुरत हैं, धैर्य रखने और संयम बरतने की। नेता है, तो गलती करेगा ही, और पत्रकार है, तो अपनी वाली करेगा ही। जिस तरह बधाई देने में कुछ लोग कंजूसी कर गए, ठीक उसी तरह स्वागत करने में भी कर गए। सांसद हो या विधायक, इस बात को झुठला नहीं सकता कि आज की तारीख में हरीश द्विवेदी का कद कितना बड़ा हैं? अगर दोनों डिप्टी सीएम और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष जाकर हरीश द्विवेदी को बधाई देते हैं, तो उनके कद का अंदाजा लगाया जा सकता है।  विधानसभा और पंचायती चुनाव और प्रदेश की राजनीति में हरीशजी की कितनी दखंलदाजी रहेगी, यह तो समय ही बताएगा। भले ही चाहें सीएम ने बधाई न दी हो, यह अलग बात हैं, लेकिन उनके मंत्रिमंडल के अनेक लोंगों ने जाकर बुके अवष्य दिया। जो हरीश द्विवेदी गोरखपुर जाकर गाड़ी के पीछे भागते हुए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी का माला पहनाने के लिए परेशान थे, आज वही प्रदेश अध्यक्ष, हरीश द्विवेदी को बुके देकर उनका स्वागत करते दिखाई दे रहे है। इसे कहते हैं, समय का चक्र। इसी लिए कहा जाता है, राजनीति में कुछ भी संभव है। अगर ऐसा नहीं होता तो क्षेत्रीय अध्यक्ष विरोद राय के प्रथम आगमन में हरीशजी कलवारी टांडा पुल पर स्वागत करने के लिए माला लेकर खड़े न रहते, अगर ऐसा नहीं होता मो जिले के प्रभारी सूर्य प्रताप शाही के स्वागत के लिए हरीशजी माला लेकर एनएच पर न खड़े होते।