बस्ती। अभी तक तो लोग सीएमओ डा. राजीव निगम, डिप्टी सीएमओ डा. एसबी सिंह, डा. एके चौधरी और आरसीएच प्रभारी डा. बृजेश शुक्ल की टीम को ही लूटेरा कहती और मानती आ रही हैं, लेकिन इन चारों से अधिक लूटेरा 100 बेड एमजीएच हर्रैया की सीएमएस सुषमा जायसवाल और महिला अस्पताल बस्ती के सीएमएस अनिल कुमार निकले। कहने का मतलब जिले के स्वास्थ्य विभाग में मरीजों के सेहत के नाम पर आने वाले धन को लूटने वालों की कमी नहीं है। इस विभाग में मीडिया जितना अंदर घुसती है, उतना ही भ्रष्टाचार मिलता है। देखा जाए तो सीएचसी और पीएचसी के एमओआईसी, डाक्टर और फार्मासिस्ट की गिनती भी लुटेरें में गिनी जाती है। मीडिया और जिले के लोगों को पहली बार पता चला कि रिजेंट की खरीद के नाम पर सीएमएस लोग मिलकर कितना बड़ा फर्जीवाड़ा कर रहे है। ऐसा लगता है, कि मानो फर्जीवाड़ा करने वालों को न तो अपनी नौकरी की ंिचता हैं, और न उन्हें जेल जाने का डर। तभी तो खुले आम हर्रैया और महिला अस्पताल के सीएमएस ने सरकार का लैब यानि पीओ सिटी के संचालित होने के बाद भी प्राइवेट पीओसीएल लैब को बिना किसी अनुमति और लिखा-पढ़ी के न सिर्फ संचालित करवा रहे हैं, बल्कि उसे रिजेंट खरीद के नाम पर भारी भुगतान कर रहे है। इससे पहले उपर हमने आप को 100 बेड एमजीएच हर्रैया में सीएमएस की मेहरबानी से भ्रष्ट शुभग अग्रवाल के प्राइवेट लैब मशीन को न सिर्फ स्थापित करवाया, बल्कि उसे फर्जी तरीके से 89 लाख भुगतान भी किया। जो भ्रष्टाचार हर्रैया के सीएमएस ने किया वहीं भ्रष्टाचार महिला अस्पताल के सीएमएस भी किया। पहले इन्होंने शुभग अग्रवाल के साथ मिलकर अस्पताल के उच्चीकरण के नाम पर चार करोड़ से अधिक की हेराफेरी करने की साजिश किया, वह तो मनीश मल्होत्रा के चलते फर्जीवाड़ा होने से बच गया, वरना, टीम ने तो छह करोड़ हड़पने की साजिश रची थी। हम आप को बता रहे थे, कि हर्रैया की तरह महिला अस्पताल बस्ती के सीएमएस और फार्मासिस्ट ने मिलकर किस तरह पीओसीएल लैब के शुभग अग्रवाल को फर्जी तरीके से 20-26 में रिजेंट खरीद के नाम पर 15-20 फीसद कमीशन लेकर दो करोड़ का भुगतान कर दिया। अब जरा अंदाजा लगाइए कि हर्रैया की तरह यहां पर भी चाय तक न पिलाने वाले पीओ सिटी लैब को साल भर में मात्र 35 लाख का ही रिजेंट खरीदा, और वहीं पर चायपानी, नाष्ता, लंच, डिनर के बाद मंहगें उपहार देने वाले पीओसीएल के शुभग अग्रवाल को दो करोड़ का भुगतान कर दिया। देखा जाए तो बस्ती और हर्रैया के सीएमएस में कोई नहीं हैं, फर्क सिर्फ ‘मेल’ और ‘फिमेल’ का है। क्या फर्क रह गया, दोनों ने हाथ साफ किया। हर्रैया में बाबू की मदद से तो बस्ती में स्टोर इंचार्ज फार्मासिस्ट की मदद से लूटा। बस्ती के सीएमएस और स्टोर प्रभारी ने 40 लाख कमीशन लिया तो हर्रैया के सीएमएस और बाबू के हिस्से में 20 से 25 लाख आया होगा। कहा भी जाता है, कि अगर किसी को इतनी बड़ी रकम मिल जाए तो वह ईमान-धर्म तो क्या देश तक को बेचने को तैयार हो जाए। अगर दोनों सीएमएस, बाबू और फार्मासिस्ट को उनके किए की सजा मिलती है, तो जिले के लोग उसका स्वागत करने में पीछे नहीं रहेगें।
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