बस्ती। अगर कोई पुरुष अधिकारी भ्रष्टाचार करता है, तो लोगों को उतनी हैरान नहीं होती, लेकिन अगर वहीं पर कोई महिला अधिकारी पैसे के लिए अपना ईमान-धर्म बेचती तो लोगों को हैरानी अवष्य होती है। क्यों कि आज भी हमारे समाज में महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले अधिक मान और सम्मान मिलता है। समाज को यह लगता है, कि महिलाएं अपने कार्यो और ईमानदारी के प्रति जितना संवेदनेशील होती है, उतना पुरुष नहीं होते। आज भी अधिकतर लोगों का यह मानना है, कि महिलाओं के भीतर दया-भाव की भावना अधिक रहती है, उनके मन में चोर नहीं रहता, और न वह चोरी ही करती है। लेकिन अगर आप 100 बेड एमजीएच हर्रैया अस्पताल की सीएमएस मैडम सुषमा जायसवाल के क्रियाकलापों और उनके भ्रष्टाचार को देखेगें तो निष्चय ही आप लोगों को महिला अधिकारियों के बारे में अपनी राय को बदलना पड़ेगा। इन्होंने जिस तरह भ्रष्ट ठेकेदार ‘शुभम अग्रवाल’ नहीं ‘शुभग अग्रवाल’ के साथ मिलकर न सिर्फ अस्पताल के उच्चीकरण के नाम पर चार करोड़ से अधिक हेराफेरी की साजिश रची बल्कि सरकारी लैब पीओ सिटी के होते हुए अपने चहेते और कमाउपूत शुभग अग्रवाल के पीओसीएल लैब को स्थापित करवाया और रिजेंट खरीद के नाम पर लगभग 80 लाख का फर्जी भुगतान किया, उससे पता चलता है, कि सीएमएस सुषमा जायसवाल और शुभग अग्रवाल मिलकर अस्पताल को लूटना चाहते है। इस लूट खसोट में बजरंग प्रसाद नामक बाबू का महत्वपूर्ण रोल हैं। पीओसीएल लैब को अनियमित रुप से स्थापित करने और 80 लाख का भुगतान कराने में बाबू की ही भूमिका रही। एक तरह से पूरा अस्पताल बाबू बजंरग प्रसाद के ईशारे पर चलता है। इसी लिए कहा जाता है, कि अगर सुषमा अग्रवाल महाभारत की दृष्टिराष्ट हैं, तो बाबू बजरंग प्रसाद दुर्योधन। पीओसीएल लैब के भ्रष्ट शुभग अग्रवाल का सीएमएस और बाबू प्रेम इतना प्रगाढ़ हैं, कि सीएमएस ने लैब का उदघाटन एडी हेल्थ और सीएमओ से आनन-फानन में बिना किसी के जानकारी में यह जताने और बताने के लिए करवा दिया, कि पीओसीएल लैब सरकारी हैं, और सीओ सिटी लैब प्राइवेट, जबकि असलियत पीओसीएल लैब प्राइवेट हैं, और पीओ सिटी लैब सरकारी। पीओ सिटी की मशीन सरकार की है, और पीओसीएल की मशीन भ्रष्ट शुभग अग्रवाल की। चूंकि यह सीएमएस और बाबू को 15 से 20 फीसद कमीशन देतें है, और पीओ सिटी चाय तक नहीं पिलाती, इसी लिए सरकारी लैब पीओ सिटी से साल भर में मात्र 9.50 लाख का ही रिजेंट खरीदा और भुगतान किया, वहीं पर 15-20 फीसद कमीशन देने वाले पीओसीएल लैब से 80 लाख का रिजेंट खरीदा और भुगतान किया। सवाल उठ रहा हैं, कि जब अस्पताल में सरकारी लैब उपलबध है, तो किसके आदेश पर प्राइवेट लैब की मशीन को लगाया गया, और उसका उदघाटन करवाया गया, ऐसा भी नहीं कि इस अस्पताल में मरीजों की संख्या इतनी अधिक हैं, कि सीएमएस और बाबू को प्राइवेट मशीन लगवाना पड़ा। पता चला है, कि लैब इंचार्ज ने सीएमएस को लिखकर दिया था, कि मरीज की संख्या कम हैं, और पीओ सिटी का लैब पर्याप्त हैं, लेकिन सीएमएस और बाबू ने जानबूझकर पत्र को डस्टबिन में डाल दिया, और कमीशन के लिए प्राइवेट लैब स्थापित करवा दिया, वह भी बिना सरकार की अनुमति के।
बताते हैं, कि सरकार के पास पांच सौ से अधिक मशीने उपलब्ध हैं, लेकिन कोई सीएमएस डिमांड ही नहीं करते/करती। फिर सवाल उठ रहा है, कि जब सरकार के पास लैब की मशीने उपलब्ध है, तो प्राइवेट से लगाने की आवष्यकता क्यों पड़ी? आवष्यता इस लिए पड़ी क्यों कि सीएमएस और बाबू को कमीशन जो चाहिए था, इसी लिए चाय तक न पिलाने वाले पीओ सिटी को 2025-26 में कुल 9.50 लाख का भुगतान किया, और कमीशन देने वाले को 80 लाख का भुगतान किया। जाहिर सी बात है, कि जब अस्पताल में मरीज ही नहीं आए तो 80 लाख का रिजेंट क्यों खरीदा गया? अब आप लोग समझ गए होगें कि मैडम सीएमएस कितनी बड़ी भ्रष्ट महिला अधिकारी है। रही बात बाबू बजंरग प्रसाद की तो इनके बिना मैडम कलम तक नहीं चलाती। पत्रकारों को कितने वजन का लिफाफा देना है, यह सीएमएस ने नहीं बल्कि बाबू तय करते है। रही बात स्थानीय भाजपा विधायक की तो अगर यह इतना ही मरीजों के प्रति जागरुक और सजग होते तो अस्पताल में इतना बड़ा घोटाला न होता। अगर स्थानीय विधायक ने सवाल किया होता तो षायद भ्रष्ट शुभग अग्रवाल को फर्जी तरीके से 89 लाख का रिजेंट का भुगतान 29 मार्च को न होता। जनप्रतिनिधियों को भी अपनी भूमिका निभानी होगी और जनता के प्रति दायित्वों को समझना होगा, वरना पूर्व होकर रह जाएगे। अगर सरकार भ्रष्ट सीएमएस, भ्रष्ट बाबू और भ्रष्ट ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करती है, तो कोई बुरा नहीं करती। जिस महिला अधिकारी और बाबू ने सरकार और मरीजों को धोखा दिया, उसे नौकरी में रहने का कोई हक नहीं। ऐसे लोगों की जगह सरकारी बेडरुम नहीं, बल्कि जेल है।
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