बस्ती। जब से बजट में पान मसाला सिगरेट पर टैक्स बढ़ाया गया तभी से थोक व फुटकर विक्रेताओं द्वारा लगातार मिलकर जनता को लूटा जा रहा। इस खुले आम लूट से जनता बेहाल है, मजबूरी में उसे अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। बढ़े हुए मूल्य को लेकर थोक व फुटकर विक्रेताओं का अलग-अलग तर्क थोक विक्रेता का कहना है कि आगे से महंगा मिल रहा है इसलिए महंगा बेचना पड़ रहा फुटकर विक्रेताओं का कहना है कि थोक विक्रेता महंगा दे रहे हैं इसलिए महंगा बेचना पड़ रहा है अब प्रश्न यह उठता है कि किसकी बात सही और किसकी बात गलत यह निर्णय कैसे लिया जाए यह जांच का विषय है इस पर तत्काल छापेमारी कर पूछताछ करने की सख्त आवश्यकता है तब जाकर कहीं सच्चाई सामने आ सकती है की बढ़े हुए मूल्य पर थोक विक्रेता निर्धारित एमआरपी मूल्य से कितना अधिक मूल्य फुटकर विक्रेता वसूल कर रहा जिससे फुटकर विक्रेता आम नागरिकों को अधिक मूल्य पर पान मसाला सिगरेट की बिक्री कर रहा। यह एक गंभीर मुद्दा है केंद्र और राज्य सरकार के साथ कंपनियां भी चाहती हैं की एमआरपी निर्धारित मूल्य पर बिक्री की जाए जनता के साथ किसी प्रकार की लूट खसोट ना की जाए लेकिन उसके उलट यहां पर बढ़े हुए मूल्य पर संशय बरकरार है और जनता के साथ की जा रही लूट खसोट पर अंकुश नहीं लग पा रहा । बढ़े हुए मूल्य पर एक नजर डालें तो बजट से पूर्व बिक रहे लगभग पान मसाला 10 रुपये के चार पाउच मिलते थे जो अब घटकर तीन रह गये अब 10 रुपये की खरीद पर हो रहा दो रुपए पचास पैसे का शुद्ध घाटा इसी प्रकार से पांच के मूल्य में मिलने वाला एक पान मसाले का पाउच अब मिल रहा लगभग सात रुपये या उससे अधिक मूल्य पर जिससे हो रहा दो रुपए या उससे अधिक का घाटा। 15 रुपये मूल्य में मिलने वाला एक जिपर पैक अब मिल रहा 17 से 18 रुपये में यानी कि दो से तीन रुपए के महंगे दाम पर इस पर भी हो रहा दो से तीन रुपए का घाटा। सिगरेट की भी ऐसी ही स्थिति बनी हुई है पांच रुपये के मूल्य में सर्वाधिक बिकने वाली प्रतिष्ठित कंपनी की सिगरेट अब दिख रही है 07 रुपये के मूल्य पर इसी प्रकार से पांच रुपये के मूल्य में बिकने वाली दूसरी सिगरेट बिक रही है छह से सात रुपए के मूल्य पर जो भाव बिक जाए बेच लो और जनता को लूट लो, इसी प्रकार से आठ रुपये मूल्य में बिकने वाली एक सिगरेट का वसूला जा रहा 10 रुपए और 10 रुपये मूल्य में बिकने वाली एक सिगरेट का वसूला जा रहा। 12 रुपये इसी प्रकार से सभी कंपनियों की सिगरेट को अधिक से अधिक दामों पर बेच कर जनता से वसूला जा रहा अधिक दाम। बस्ती क्षेत्र के साथ संपूर्ण जनपद की जनता को जमाखोरों द्वारा खुलेआम लूट जा रहा इतने बड़े पैमाने पर हो रहे भ्रष्टाचार को रोकने वाला कोई नहीं।
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