इस साजिश में सीएमओ डा. राजीव निगम, एनएचएम के आरसीएच डा. बृजेश शुक्ल, एनएचएम बाबू संदीप राय और चीफ फार्मासिस्ट अजय मिश्र शामिल रहे
-पिछले साल 15वां वित्त आयोग के पांच करोड़ के बंदरबांट की साजिश का खुलासा एमएलसी प्रतिनिधि हरीश सिंह कर चुके, जिसमें तत्कालीन सीएमओ आरएस दूबे सहित अन्य दोषी पाए जा चुके
-इसी घोटाले में अजय चौबे नामक ठेकेदार ने आरसीएच को लगभग 15 लाख का कार उपहार में दिया था, जिसके बदले ढ़ाई करोड़ का फर्जीवाड़ा करने दिया था
-इस पांच करोड़ के फर्जीवाड़ा में सीएमओ पहले ही एडवांस में चार पांच ठेकेदारों से भारी कमीशन ले चुकें
बस्ती। जब भी 15वां वित्त आयोग के धन से सामान सहित अन्य उपकरण खरीदने के लिए पांच करोड ़के बंदरबांट करने का मामला सामने आता, तो उसमें सबसे पहले चीफ फार्मासिस्ट एवं स्टोर प्रभारी अजय मिश्र का नाम आता है। कहा जाता है, कि बिना मिश्राजी को साजिश में शामिल किए, कोई सौ रुपये के सामान की हेराफेरी नहीं कर सकता है। यह भी कहा जाता है, कि जिस दिन मिश्राजी का जमीर जागा, उस दिन कईयों की दुकानें बंद हो जाएगीं, अब सवाल उठ रहा है, कि मिश्राजी का जमीर कब जागेगा? जागेगा भी नहीं? कहते हैं, कि अगर मिश्राजी का जमीर जागना होता तो बहु और बेटे के नाम फर्जीवाड़ा करने के लिए फर्म न खुलवाते। वैसे भी आजतक स्वास्थ्य विभाग के किसी का भी जमीर नहीं जागा, कहना गलत नहीं होगा, इस विभाग में अगर कुछ बिकता है, तो वह हैं, जमीर और ईमान, और जिस व्यक्ति ने अपना जमीर और ईमान बेच दिया, उसपर कभी विष्वास नहीं किया जा सकता है, ऐसे लोग ही होते हैं, जो पैसे के लिए देश को भी बेचने को तैयार हो जाते है। लगभग पांच-छह माह पहले 15वां वित्त आयोग का पांच करोड़ सीएमओ को मिला, हर साल दो चरणों में सीएमओ को दस करोड़ मिलता है। इस धन से सीएचसी और पीएचसी में आवष्यक सामानों और उपकरणों की खरीद होती है। नियम तो अगर एक मुष्त 10 लाख से अधिक का बजट मिलता है, तो उसका टेंडर आफ लाइन और आनलाइन दोनों होना चाहिए। लेकिन यह तब होता हैं, जब ईमानदार सीएमओ होते है। अब तक 99 फीसद लोग बेईमान ही सीएमओ निकले, इसी लिए बजट मिलने से पहले सीएमओ पांच करोड़ का बंदरबांट करने की योजना बना लेते हैं, चूंकि यह बजट एनएचएम का होता है, इस लिए इस फर्जीवाड़े में एनएचएम के आरसीएच, एनएचएम के टेंडर बाबू और चीफ फार्मासिस्ट का होना जरुरी होता है। इसमें सबसे अधिक जिम्मेदारी की भूमिका चीफ फार्मासिस्ट/स्टोर इंचार्ज की ही होती, लेकिन यह जिले वालों का दुर्भाग्य रहा है, कि जिसकी सबसे अधिक जिम्मेदारी है, उसी पर सबसे अधिक आरोप लगता है। फिर कहा जा रहा है, और बार-बार कहा जाएगा, कि अगर चीफ फार्मासिस्ट ईमानदारी से अपनी भूमिका निभा दें तो कितने ठेकेदारों को जिला छोड़ना पड़ सकता है। इनकी भूमिका को इस लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, क्यों कि सामानों और उपकरणों के आने और जाने की सारी जिम्मेदारी इन्हीं की होती है। बहरहाल, जब तक इनके जीजा कहे जाने वाले राज्यपाल हैं, तक तक यह चाहें जितना मनमानी कर लें, जिस दिन जीजाजी नहीं रहे, उस दिन इनकी उल्टी गिनती शुरु हो जाएगी।
अब हम आपको एक दिन पहले यानि रविवार के दिन सीएमओ के आवास पर पांच करोड़ के बजट के बंदरबांट करने की साजिष के बारे में बताते है। चूंकि यह अंदर की खबर है, इस लिए इसे पूरी तरह गलत भी नहीं ठहराया जा सकता। लगभग 12 बजे दिन में सीएमओ डा. राजीव निगम, एनएचएम के आरसीएच डा. बृजेश शुक्ल, एनएचएम बाबू संदीप राय और चीफ फार्मासिस्ट अजय मिश्र एक साथ मिलते है। खासबात यह है, कि फर्जीवाड़े की आशंका को देखते हुए सीडीओ ने कई माह तक पत्रावली पर हस्ताक्षर नहीं किया था, जैसे ही हस्ताक्षर हुआ, वैसे सीएमओ आवास पर एमरजेंसी मीटिगं बुलाई गई। चूंकि सीएमओ पहले ही कई ठेकेदारों से एडवांस में कमीशन ले चुके थे, इस लिए बिना देरी किए, किस ठेकेदार को कितना काम देना है, का खाका तैयार किया गया। बताते थे, कि पिछले साल इसी पंाच करोड़ में से लगभग ढ़ाई करोड़ का काम अजय चौबे नामक ठेकेदार को दिया गया, इसके एवज में बताते हेैं, कि ठेकेदार ने अपने चालक कृष्ण कुमार के नाम से लगभग 15 लाख की कीमत वाली एक्सएल-6 मारुति आरसीएच को तोहफे में दिया। पिछले साल 15वां वित्त आयोग के पांच करोड़ के बंदरबांट की साजिश का खुलासा एमएलसी प्रतिनिधि हरीश सिंह कर चुके, जिसमें तत्कालीन सीएमओ आरएस दूबे सहित अन्य दोषी पाए, इसी की जांच विजिलेंस के एसपी कर रहे है। इस पूरे मामले में टेंडर की प्रक्रिया को अपनाने के बजाए जेम पोर्टल का सहारा लेकर टुकड़ों-टुकड़ों में उन ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया गया, जिन्होंने कार और कमीशन दिया था। अब वही खेल फिर से खेलने की साजिश रची गई। इस पूरे खेल में सबसे अधिक भूमिका और सीएमओ का सबसे खास कहे जाने वाले लखनऊ के ठेकेदार वीमान दूबे का नाम सामने आ रहा है। यही सीएमओ के सारे कामों की डिलीगं करता है, सीएमओ को बस्ती में रहना है, कि नहीं, इसकी व्यवस्था करता है। एक और नाम जो सामने आ रहा है, कि वह आरसीएच के भतीजा सभासद का है। लखनऊ के निर्मल पांडेय और सुल्तानपुर के ठेकेदार सुनील तिवारी का भी सामने आ रहा है।
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