‘प्रधान’ हो तो मनोज कुमार दूबे ‘जैसा’
ग्राम पंचायत पटखौली के प्रधान मनोज कुमार दूबे को देखकर कहा जा रहा है, कि प्रधान हो तो दूबेजी जैसा। जांच रिपोर्ट देखकर आप लोग लग जाएगा कि प्रधान कितना बड़ा भ्रष्टाचारी है। 15वां वित्त आयोग पर नजर डाले तो प्रधान के नीजि खाते में सबसे पहले 23 मई 22 को मजदूरी का 12648 रुपया गया, यह पैसा इन्होंने सीसी रोड दुबौली दूबे सियाराम दूबे ‘शिवराम’ के घर होते हुए बंजर भूमि तक हृयूम पाइप और नाली निर्माण में मजदूरी करके कमाया। इन्होंने सोख्ता निर्माण में मजदूरी के रुप में पहले 10 जनवरी 23 को 3570 और दूसरी बार में 5700 रुपया 28 फरवरी 24 को, देवेंद्र नाथ त्रिपाठी के घर से दुर्गेश दूबे के बाग तक हृयूम पाइप नाली पर मजदूरी का 3588 रुपया 23 मई 23 को, शंभूनाथ पाठक के घर से कोदई पाठक के घर होते हुए हृयूम पाइप नाली पर मजदूरी का 9486 रुपया 23 मई 22 को, रघुनाथ के घर से बंजर भूमि तक नाली निर्माण पर मजदूरी का 5135 रुपया 23 मई 22 को, राम शब्द के घर के पीछे से पिच रोड तक हृयूम पाइप नाली निर्माण पर मजदूरी का 7740 रुपया 26 अप्रैल 24 को, हैंडपंप की चौकी पर मजदूरी का 2280 रुपया 28 फरवरी 24 को, कूप मरम्मत पर मजदूरी का 3400 रुपया 28 फरवरी 24 को एवं प्राथमिक विधालय पर दिव्यांग शोचालय निर्माण पर मजदूरी का 15980 रुपया प्रधान के खाते में 28 फरवरी 24 को भेजा गया। पंचम वित्त आयोग के धन से कराए गए पंचायत भवन पर टाइल्स निर्माण पर मजदूरी के रुप में 26899 रुपया पांच सितंबर 22 को और पटखौली राजा के प्राथमिक विधालय परिसर में शोचालय निर्माण में मजदूरी का प्रधान के खाते में 7378 रुपया भेजा गया। इसी तरह राज्य वित्त आयोग के धन से राम नरायन पाठक के घर से राम अवतार के बाग तक हृयूम पाइप नाली निर्माण पर मजदूरी का 31920 रुपया और 17790 रुपया नौ अप्रैल 24 को एवं कमला दत्त पाठक के घर से लच्छन के बाउंडी तक सीसी रोड निर्माण पर प्रधान के खाते में 37170 रुपया भेजा गया।
बस्ती। जिले में ऐसे भी प्रधान हैं, जिनका परिवार मुफलिसी और गरीबी के बीच जीवन यापन कर रहा है। यह इतने गरीब होते हैं, कि अगर मजदूरी न करें तो शायद इनका परिवार भरपेट भोजन भी न कर पाए। कप्तानगंज ब्लॉक के ग्राम पंचायत पटखौली राजा के प्रधान मनोज कुमार दूबे का भी नाम उन गरीब प्रधानों में दर्ज हैं, जिन्होंने न सिर्फ दिहाड़ी मजदूरों की तरह मजदूरी की, बल्कि उस मजदूरी के धन से अपने परिवार का भरण-पोषण भी किया। जिसका सबूत इनके खाते में मजदूरी का लाखों रुपया पैसा है। प्रधानजी ने यह पैसा यूंही नहीं कमाया, बल्कि 15वां वित्त, पंचम वित्त और राज्य वित्त आयोग से ग्राम पंचायत में कराए गए कामों से मजदूरी के रुप में कमाया। बहुत कम ऐसे प्रधान होगें जिन्होंने पैसा कमाने के लिए फावड़ा चलाया होगा, और सिर पर मिटटी ढ़ोया होगा। कहना गलत नहीं होगा कि पंडितजी ने मजदूरी करके पूरे देष में एक मिसाल कायम किया है। इनके खाते में साल 22, 23 और 24 में मजदूरी का 15 बार में एक लाख 90 हजार 682 रुपया गया। सबसे अधिक राज्य वित्त आयोग का मात्र तीन चरणों में 86880 रुपया गया। 15वां वित्त आयोग का 10 बार में 69525 एवं पंचम वित्त आयोग का दो बार में 34277 रुपया गया। यह हम नहीं बल्कि वह जांच रिपोर्ट कह रही है, जिसमें प्रधान को दिहाड़ी मजदूर बताया गया, और जिनके खाते में मजदूरी का लगभग दो लाख भेजा गया। प्रदेश के यह पहले ऐसे गरीब प्रधान होगें, जिनके खाते में सिर्फ मजदूरी का इतना रुपया भेजा गया। अभी तक सचिव लोगों के बारे में यह सुना गया था, कि वह भी मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं, पूनम सिंह नामक महिला सचिव के खाते में मजदूरी का भारी रकम भेजा गया। लेकिन अब तो प्रधानों के बारे में पता चल रहा है कि वह भी मजदूरी करके परिवार चला रहे है। यह हम नहीं बल्कि वह जांच रिपोर्ट कह रही है, जिसमें प्रधान को दिहाड़ी मजदूर बताया गया, और जिनके खाते में मजदूरी का हजारों रुपया भेजा गया। यह पहले ऐसे गरीब प्रधान होगें, जिनके खाते में आज भी लाखों रुपया जमा है। अब यह गांव वालों को सोचना होगा कि उन्हें मनोज कुमार दूबे जैसा प्रधान चाहिए या फिर सदर ब्लॉक के ग्राम पंचायत ओठखनपुर कला जैसा प्रधान जिसने नीजि धन से गांव को पूरे प्रदेश में माडल बनाया। प्रधानों को भी इतना नीचे नहीं गिरना चाहिए, कि चाहें तो भी गांव वालों के सामने उठ न सके। प्रधानों का बस चलता तो मनरेगा की मजदूरी भी अपने खाते में जमा कर देते।
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