बस्ती। कृषि विभाग में वही काम होता, जिसमें कमीषन मिलता, कमीशन मिल जाए तो साहब लोग अपनी नौकरी को भी दांव पर लगा दें। बार-बार मीडिया कह रही है, कि जिस विभाग का मंत्री भ्रष्ट हो, उस विभाग के अधिकारी और बाबू कैसे ईमानदार हो सकते है? कृषि विभाग में चार सालों से जड़ें जमाए बैठे लेखाकार मनोज कुमार गौतम कंठ भर भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं। विभाग व किसानों को चूना लगाने वाले बाबुओं को लूटने में मनोज का कोई सानी नहीं है। खुद वित्तीय अनियमितता के दोषी हैं, फिर भी 10 प्रतिशत कमीशन लेने से नहीं हिचकते हैं। कृषि विभाग के बाबू लेखाकार से ख़फा चल रहे हैं। उनका नाराज होना भी जायज है। वह बताते हैं कि अन्य जिलों में तीन प्रतिशत की दर से कमीशन चल रहा है। लेकिन, बस्ती में सीधे 10 प्रतिशत लिया जा रहा है। न देने पर उनके वित्तीय बिल पास नहीं किए जाते हैं। बताते हैं कि शासन ने पंचायत राज विभाग में लेखाकार मनोज कुमार गौतम को हफ्ते में तीन दिन कार्य करने का निर्देश दिया है। लेकिन पंचायत राज विभाग में कमीशन बहुत कम होने के कारण वह वहां नहीं जाते हैं। अगर सहायक लेखाधिकारी बद्रीनाथ कार्यालय आकर नियमित कार्य शुरू कर दें तो लेखाकार की मनमानी पर विराम लग सकता है। लेकिन बद्रीनाथ को हर महीने बिना कार्य किए हुए ही वेतन मिल जा रहा है। ऐसे में वह काम के बोझ तले दबने को तैयार नहीं हैं।उच्चाधिकारियों का संरक्षण उन्हें और भी मजबूती प्रदान कर रहा है। बद्रीनाथ की अनुपस्थिति के कारण ही उच्चाधिकारी व लेखाकार पजामें में अतिरिक्त जेब सिलवा लिए हैं। हफ्ते के छह दिन सब अतिरिक्त जेब भरते हैं और हर शनिवार को इसे खाली करने लखनऊ स्थित घर चले जाते हैं। स्थिति यह है कि किसी भी योजना का बिल भुगतान करने से पहले लेखाकार और उप कृषि निदेशक आपस में मंत्रणा करते हैं। फिर कमीशन सेट होता है। इसके बाद एक्सेल सीट पर सबकी हिस्सेदारी लिखी जाती है। बिल का भुगतान होते ही सबको अपना अपना हिस्सा मिल जाता है। बीते दिनों इसका एक स्क्रीन शॉट भी वायरल हुआ था।
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- Last Update 03 Nov, 11:13 PM
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