बस्ती। आज हम आप लोगों को ऐसी सड़क के बारे में बताने जा रहा है, जिसे चार-चार संस्थाओं ने बनाया, पहले ग्राम पंचायत ने, फिर उसी को क्षेत्र पंचायत ने, फिर उसी को जिला पंचायत ने और अंत में सांसद निधि से बना। अब जरा अंदाजा लगाइए कि क्या किसी देश या प्रदेश में कभी एक ही सड़क पर चार-चार कार्यदाई संस्थाओं ने बनाया और भुगतान लिया, सवाल उठ रहा है, कि क्या किसी भी कार्यदाई संस्था ने सड़क बनाने से पहले एनओसी नहीं लिया, अगर क्षेत्र पंचायत, ग्राम पंचायत से एनओसी ली होती तो क्या क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत और सांसद निधि से एक ही सड़क चार बार बनती। देश और प्रदेश में इससे बड़ा सड़क घोटाला नहीं मिलेगा, हैरानी की बात यह है, कि एक भी संस्था के ठेकेदार के खिलाफ न तो कार्रवाई हुई, और न धन की रिकवरी ही हुआ। यह सड़क क्षेत्र पंचायत गौर के सेखुई ग्राम पंचायत का है। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं, कि किस तरह सरकारी धन का बंदरबांट सड़क के निर्माण में हो रहा हैं। जिस सड़क को ग्राम पंचायत ने तीन लाख में बनाया, उसी सड़क को क्षेत्र पंचायत ने छह लाख में, जिला पंचायत ने 12 लाख में और सांसद निधि से आठ लाख में बना। यानि एक सड़क पर 29 लाख का फर्जी भुगतान हुआ, क्यों कि सड़क तो सिर्फ ग्राम पंचायत ने बनाया, बाकी अन्य संस्थाओं ने फर्जी निर्माण दिखाकर धन का बंदरबांट कर लिया। आप लोगों को इस बात की हैरानी होगी कि प्रशासन के पास ऐसी कोई भी रिकार्ड नहीं जिससे पता चल सके कि कितने सड़कों का निर्माण हो चुका है, और कितने का होना बाकी है। जिस प्रशासन के पास सड़कों का कोई रोड मैप न हो, वहां तो एक सड़क चार-पांच बार बनेगी ही और वह भी एक वित्तीय साल में। यह है, बस्ती, यहां पर वो भ्रष्टाचार के रिकार्ड बनते हैं, जो कहीं नहीं बन सकते।