ओमप्रकाश गौतम
भारत के इतिहास में 14 अक्टूबर का दिन विश्व स्तरीय महत्वपूर्ण दिन है। बाबा साहेब डॉ अंबेडकर ने आज ही के दिन पांच लाख उपासकों के संग नागपुर में बौद्ध धर्म अपनाया था। देश की आजादी से पहले और बाद में भी कुरीति,पाखंडवाद,छुआछूत जाति, धर्म में भेदभाव का जोर था। नौ भाषा और 22 डिग्री लेकर बाबा साहेब ने अध्ययन के बाद बौद्ध धर्म सत्य का मार्ग जो जीवों पर दया करने के साथ इंसानियत का पैगाम देता है को अंगीकार करने का निर्णय लिया। भारत रतन बाबा साहेब अबेंडकर ने महाराष्ट्र के नागपुर में 14 अक्टूबर को आयोजित धम्म कार्यक्रम में पांच लाख उपासकों के साथ बौद्ध धर्म स्वीकार किया। बाबा साहेब ने  कहा कि हिंदू धर्म में पैदा हुआ जो मेरे वश में नहीं था मगर हिन्दू धर्म में मरूंगा नहीं यह मेरे वश में है। एक मंच पर पांच लाख उपासकों के साथ बौद्ध धर्म अपनाने का विश्व में महत्वपूर्ण बना। भारत की आबादी उस समय 30 करोड़ थी आज आबादी बढ़कर 144 करोड़ हो गई। पांच लाख एक मंच पर आज भी बड़ी संख्या होती है। बाबा साहेब ने परिवार से समाज और समाज से ज्यादा देश को ऊपर रखा और समर्पित हुए।