बस्ती। गनेशपुर की जनता शासन और प्रशासन से पूछ रही हैं, कि आखिर पूर्व प्रधान अब्दुल मुईद उर्फ रहमान और उनकी पत्नी एवं पूर्व प्रधान परवीन खातून को कब भूमाफिया घोषित किया जाएगा? आखिर पति और पत्नी पर इतनी मेहरबानी क्यों? सवाल उठ रहा है, कि जिन पति और पत्नी के खिलाफ दूसरे की जमीनों को कूटरचित दस्तावेजों के जरिए हड़पने के मामले में एक नहीं बल्कि दो-दो मुकदमा दर्ज हो, जिसमें पहला मुकदमा गनेशपुर निवासी राजेंद्र पुत्र स्व दर्शन ने पति और पत्नी के खिलाफ 14 अगस्त 24 को वाल्टरगंज थाने में और दूसरा मुकदमा गनेशपुर के ही समीउल्लाह पुत्र स्व. साबिर अली ने 24 अक्टूबर 26 को कोतवाली में पति और पत्नी के खिलाफ दर्ज कराया, अगर इसके बाद भी प्रशासन ऐसे दंपत्ति को भूमाफिया घोषित नहीं करती तो सवाल पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर उठना लाजिमी। इतना ही नहीं पूर्व प्रधान रहमान पर वाल्टरगंज थाने में एससीएसटी एक्ट के तहत सिकटा निवासी अनिल कुमार पुत्र राम भेज की ओर से अपराध संख्या 281/2012 में दर्ज कराया गया, इस मामले में रहमान के खिलाफ एनबीडब्लू भी जारी हुआ और इन्हें जेल भी जाना पड़ा। रहमान और परवीन शायद प्रदेश के पहले ऐसे पूर्व प्रधान पति और पत्नी होगें, जिनके खिलाफ जमीन हड़पने के आरोप में दो-दो मुकदमा दर्ज हो। पति और पत्नी के प्रधान रहते जमीनों के हड़पने के कई मामले सामने आए। इतना ही नहीं हड़पी गई जमीन को सरजू नहर विभाग को बेच देने का मामला भी दर्ज एफआईआर में सामने आया। बताते हैं, कि पति और पत्नी के द्वारा जितने भी जमीनों के हड़पने के मामले सामने और जिसमें एफआईआर दर्ज कराए गए, वे सभी प्रधान के रहते हुआ। भले ही मुकदमा बाद में दर्ज हुआ। सवाल उठ रहा है, कि जब प्रधान ही गांव वालों की जमीनों को हड़पने लगेगें तो कैसे किसी काष्तकार की जमीन सुरक्षित रहेगी? गांव वालों का कहना है, कि जितनी भी जमीनों को हड़पा गया, वे लगभग सभी चकबंदी के ‘क्वेस’ होने के बाद हुआ। तहसील वालों की मिली भगत से जमीनों को अपने नाम करवाया गया, पैसे और राजनीति के बल दाखिल खारिज भी करवाया गया। बहुत सारे ऐसे काष्तकार हैं, जिन्हें पता ही चला कि उनकी जमीन कैसे पति और पत्नी के नाम हो गई? चूंकि रहमान का दबदबा पूरे जिले में था, और विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में सत्ता और विपक्ष के लोग इनके दबदबे को देखते हुए वोट देने और दिलाने की अपील करते थे, गनेशपुर कभी प्रदेश की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत हुआ करती थी, और इस ग्राम पंचायत में एक विधायक निधि के बराबर विकास के लिए धन आता था, इस लिए धन के दुरुपयोग का भी खूब आरोप गांव वाले लगाते रहें। गांव वालों का कहना है, कि पति और पत्नी ने प्रधान होने का खूब लाभ उठाया, एक तरह से दोनों ने गनेशपुर में अपना साम्राज्य खड़ा किया। जिस दमदारी से पति और पत्नी ने प्रधानी किया, उसे गांव वाले अभी तक नहीं भूले। पति और पत्नी जो चाहते थे, वही होता था, चकबंदी, तहसील और पुलिस चौकी तो मानों इनकी जेब में रहा हो। राजनेताओं और अधिकारियों का इन्हें खूब सपोर्ट मिला।

14 अगस्त 24 को राजेंद्र पुत्र स्वं दर्शन के द्वारा पति और पत्नी के खिलाफ दर्ज कराए गए मुकदमें में कहा गया, कि पत्नी परवीन खातून 2000 से 2005 तक प्रधान रही, और प्रधानी का सारपा कामकाज इनके पति रहमान देखते थे, 2005 से 2010 तक रहमान प्रधान रहे, तब इन्होंने और भगौती पुत्र स्व. झकड़ी ने मिलकर कूठरचित एवं धोखाधड़ी से अपने कार्यकाल में माता अमीना खातून तथा परवीन खातून ने अपने कार्यकाल में अपनी सास यानि रहमान की माता अमीना खातून के नाम खतौनी में दर्ज करवा लिया, और रहमान ने एवं परवीन खातून एवं भगौती ने धोखाधडी एवं फर्जी दस्तावेज के आधार पर सरजू नहर खंड-सात बस्ती को बैनामा करके लाखों का मुआवजा हड़प लिया। जब कमिश्नर ने इसकी जांच कराई तो तीनों दोशी पाए गए। जिसके तहत तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। जो मुकदमा समीउल्लाह पुत्र स्वं साबिर अली की ओर से कोतवाली में 24 अक्टूबर 26 को रहमान और उनकी पत्नी परवीन खातून के खिलाफ दर्ज कराया गया, वह पुलिस ने नहीं बल्कि कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ, उसमें कहा गया कि उसकी पुस्तैनी प्रापर्टी गाटा संख्या 135 जो गनेशपुर में हैं, और पूर्व में इस प्रापर्टी के मालिक साबिर अली पुत्र वसीर अली एवं जैनेब प़त्नी गुलाम अली थे, जैनेब ने अपने हिस्से की जमीन को साबिर अली के नाम पंजीकृत वसीयत कर दिया, साबिर अली के वारिसान गुलाम अहमद, रफीक अहमद, सफीक अहमद, समीउल्लाह एवं फिरोजा है। इन लोग्रों का नाम खतौनी में दर्ज है। कहा कि पूर्व प्रधान पति और पत्नी ने एक साजिश के तहत उाके गाटा संख्या 135 को 2005 में बैनामा होना दिखाकर जमीन को 11 मई 2005 को अपनी माता अमीना खातून पत्नी रहमान के नाम दाखिल खारिज में चढ़वा दिया। जिस समय दाखिल खारिज हुआ उस समय रहमान की पत्नी परवीना खातून गांव की प्रधान थी। प्रधान के साथ-साथ यह भूमि प्रबंधन समिति की अध्यक्ष भी थी, और प्रधान की देखरेख में दाखिल खारिज होता है। खास बात यह है, कि दस रुपये के स्टांप पर बेचीनामा साबिर अली व जैनेब का 11 मई 2005 में तैयार किया गया। कहा गया कि उक्त बैनामा कराने में रहमान और परवीन का पूरा सहयोग रहा, उक्त बैनामा करने के पष्चातअमरना खातून, रहमान और परवीन खातून ने सरकारी धन चार लाख 89 हजार 921 रुपया हड़प् लिया। कहा गया कि रहमान और परवीन दोनों भूमाफिया है। गरीब असहाय लोगों की जमीनों को कूटरचित दस्तावेजों के जरिए अपने नाम करा लेते है। फर्जी नाम चढ़वाने के बाद उसे कीमती दामों में बेच देते है।