बनकटी/बस्ती। लालगंज थाना क्षेत्र के थाल्हापार गांव में जन्मेजय की मौत ने पुलिस की कार्यप्रणाली को भी सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। परिजनों का आरोप है कि मारपीट के दौरान जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया और तहरीर देने के बावजूद पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। बुधवार भोर लखनऊ ले जाते समय जन्मेजय की मौत की खबर जब गांव में पहुंची तो आक्रोश फूट पड़ा। ग्रामीणों ने आरोपितों की गिरफ्तारी की मांग पर बनकटी-अहरा मार्ग को करीब चार घंटे तक जाम रखा। मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों को हालात संभालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। अब सवाल है कि तहरीर पर समय रहते कार्रवाई हुई थी या नहीं और युवक की मौत के मामले में पुलिस आगे क्या कदम उठाती है। थाल्हापार निवासी रामबहाल ने मंगलवार को लालगंज थाने में दी गई तहरीर में आरोप लगाया था कि सोमवार रात करीब आठ बजे उनका पुत्र जन्मेजय अपनी ससुराल से घर लौट रहा था। गांव के पास सरयू नहर पर पहुंचने पर गांव निवासी बालगोबिंद चौधरी, उनकी पत्नी इंद्रासनी और उनकी बेटियां ममता व साक्षी ठेला लेकर जा रही थीं। आरोप है कि उन्होंने जन्मेजय से ठेला धकेलने को कहा। मना करने पर लाठी-डंडे और कुदाल के पासे से उसकी पिटाई कर दी। रामबहाल ने तहरीर में जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने और जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया है। रामबहाल के मुताबिक, शोर सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे। जानकारी मिलने पर वह भी वहां पहुंचे तो उनका पुत्र बेहोशी की हालत में पड़ा था। आरोप है कि घायल बेटे को उठाने का प्रयास करने पर उनके साथ भी गाली-गलौज की गई और जान से मारने की धमकी दी गई। ग्रामीणों के बीच-बचाव के बाद घायल जन्मेजय को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनकटी ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उसे जिला अस्पताल बस्ती रेफर कर दिया। वहां से मेडिकल कॉलेज गोरखपुर भेजा गया। इसके बाद उसे लखनऊ ले जाया जा रहा था, तभी बुधवार भोर रास्ते में उसकी मौत हो गई। युवक की मौत के बाद परिवार और ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई। मृतक के पिता रामबहाल का आरोप है कि उन्होंने घटना के संबंध में मंगलवार को लालगंज थाने में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। हालांकि, इस आरोप पर पुलिस का पक्ष सामने आना बाकी है। मारपीट के दौरान जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप लगाए जाने के कारण मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम समेत अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग उठ रही है। आरोपों की पुष्टि और मामले में लागू धाराओं का निर्धारण पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। बुधवार सुबह जन्मेजय की मौत की खबर गांव पहुंचते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए। आक्रोशित लोगों ने गांव के पास बनकटी-अहरा मार्ग पर बल्ली और झाड़ियां रखकर जाम लगा दिया। ग्रामीण आरोपितों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े रहे। जाम की सूचना पर अपर पुलिस अधीक्षक श्यामाकांत, सीओ रुधौली अनिल कुमार सिंह, सीओ हरैया स्वर्णिमा सिंह, सीओ कलवारी बृजेश कुमार सिंह, ट्रैफिक पुलिस के कुलदीप सिंह यादव, महिला थाना प्रभारी शालिनी सिंह तथा लालगंज प्रभारी निरीक्षक दिनेश चंद्र चौधरी समेत विभिन्न थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद आरोपितों की गिरफ्तारी का आश्वासन मिलने पर ग्रामीणों ने जाम समाप्त कर दिया। इसके बाद मार्ग पर आवागमन बहाल हो सका। घटना की गंभीरता को देखते हुए गांव में पुलिस की मौजूदगी बनी रही। ेजन्मेजय की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पिता रामबहाल, मां बासमती देवी, पत्नी प्रमिला भारती और 13 वर्षीय पुत्र प्रिंस, 11 वर्षीय पुत्री श्रेया तथा आठ वर्षीय पुत्री प्रिया का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के सामने अब बच्चों के भविष्य और जीवनयापन की चिंता भी खड़ी हो गई है। ग्रामीणों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। अब सबकी नजर पुलिस की अगली कार्रवाई और आरोपितों की गिरफ्तारी पर टिकी है।
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