बस्ती। लोग पूछ रहें हैं, और चर्चा कर रहे हैं, कि आखिर स्वास्थ्य विभाग में हो क्या रहा है? क्यों लोग जहां पा रहे हैं, वहीं मरीजों को या फिर मरीजों के नाम पर आए धन को लूट रहे है? हर कोई गरीब मरीजों के नाम पर लूटपाट कर रहा है। सवाल उठ रहा है, कि ऐसे लूटपाट के माहौल में गरीब मरीज जाए तो जाए कहां। पीएचसी और सीएचसी में एमओआईसी, डाक्टर्स, स्टाफ नर्स और फार्मासिस्ट लूट रहे हैं, तो इन अस्पतालों के बाहर अवैध रुप से संचालित मेडिकल स्टोर वाले लूट रहे है। क्षेत्र के अल्टासाउंड, पैथालाजी और प्राइवेट अस्पतालें न सिर्फ मरीजों को लूट रही है, बल्कि जज्जा बच्चा की जान तक ले रही है। जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, 100 बेड एमसीएच अस्पताल हर्रैया, टीबी अस्पताल के एसआईसी और सीएमएस लूट मचाए हुए है। कोई मरीजों के भोजन के नाम पर तो कोई सर्जिकल सामानों के नाम पर तो कोई आपरेशन के नाम पर जो चाह रहा है, वही मरीजों की चडडी और बनियाइन उतार ले रहा हैं। आपरेशन करने से पहले सौदा होता है, और जब तक सौदे के मुताबिक धन नहीं मिल जाता, तब तक डाक्टर साहब कैंची तक नहीं उठाते। जिस जिला अस्पताल में मरीज डाक्टर्स को कसाई कहता हो, उस अस्पताल का निजाम कैसा होगा? यह सोचने वाली बात है। एसआईसी साहब का सिर्फ एक ही काम हैं, कि वह साढ़े आठ बजे से पहले डाक्टर्स की हाजीरी लगवा देते। मतलब जो डाक्टर पहले दस बजे से पहले नहीं आते थे, अब साढ़े आठ बजे ही अपने चेंबर में बैठ जाते है। यही इस अस्पताल की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, बाकी अन्य व्यवस्था से एसआईसी को कोई लेना देना नहीं। वार्डो का निरीक्षण करना भी इनके डेली रुटीन में शामिल है। यहां पर सिविल और विधुत के ठेकेदारों का बोलबाला है। एसआईसी सिविल और विधुत के ठेकेदारों के साथ मिलकर हर साल 15 से 20 करोड़ का फर्जीवाड़ा करते है। हर्रैया के 100 बेड एमसीएच अस्पताल में तो डाक्टर्स इतने निर्दयी हैं, कि अगर कोई गर्भवती महिला बाहर से ‘हिंद अल्टासाउंड सेंटर’ के बजाए किसी और सेंटर से अल्टासाउंड सस्ते में करा लिया तो उसकी रिपोर्ट को ही गलत बताकर फाड़कर फेंक दिया जाता है, और कहा जाता है, कि जाओ ‘हिंद सेंटर’ से अल्टासाउंड कराकर लाओ तभी इलाज होगा। ऐसा इस लिए डाक्टर्स करते हैं, क्यों कि हिंद वाला उन्हें 50 फीसद कमीशन देता। इस अस्पताल में तो डीजल तक की चोरी बाबू बजरंग प्रसाद की अगुवाई में हो रही है। इसी अस्पताल में एक फार्मासिस्ट शुक्लाजी हैं। यह जो चाहते हैं, अस्पताल में वही होता है। यह खुद तो नियम विरुद्व मरीज देखते और बाहर की दवाएं भी लिखते हैं, बल्कि इनके कहने पर ही आनलाइन और आफलाइन पर्ची कटती हैं। प्रदेश का यह पहला ऐसा अस्पताल होगा, जहां पर आनलाइन इस लिए पर्ची नहीं कटती, क्यों कि डाक्टर समय से नहीं आते, जब 11-12 बजे डाक्टर आ जाते हैं, तो आनलाइन पर्ची काट दी जाती है। इसी अस्पताल में सीएमएस की मेहरबानी से पीओ सिटी और पीओ सीएल नामक दो लैब रिजेंट के नाम पर लूटपाट मचा रखा है। यही वह अस्पताल है, जहां पर दो बजे के बाद न तो डाक्टर्स और न फार्मासिस्ट ही मिलते हैं। अगर किसी गर्भवती महिला को एमरजेंसी पड़ जाता है, तो उसके तीमारदार मरीज को अस्पताल से उठाकर प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवाने ले जातें है। कहा भी जाता है, कि जब अस्पताल का मुखिया ही नहीं रहेगा तो डाक्टर्स और फार्मासिस्ट कहां से रहेंगे। मरीजों के लिए यह अस्पताल, अस्पताल नहीं हैं, बल्कि डाक्टर्स के लिए लूट का अडडा है। एक दिन पहले सीएमओ ने 11 बजे दिन में निरीक्षण किया, जानकर हैरानी होगी कि सिर्फ दो डाक्टर्स ही मिले, बाकी सभी अन्य दिनों की तरह गायब रहें, लेकिन शुक्लाजी की मेहरबानी से गायब रहने वाले डाक्टर्स और मैडम की हाजरी लग जाती है। जिला महिला अस्पताल में भी सिविल और विधुत के ठेकेदारों का कब्जा है। यहां पर भी सीएमएस की मेहरबानी से पीओ सिटी और पीओसीएल नामक दो लैब है। मरीज से अधिक रिजेंट की खरीद की जाती है। यहां के पैथालाजिस्ट लैब के जांच रिपोर्ट पर हस्ताक्षर नहीं करते, बल्कि दोनों लैब के अप्रशिक्षित लड़के जांच करते है। पीओसीएल लैब का तो पंजीकरण आफलाइन होता है। जबकि नियम आनलाइन करने का है। इन दोनों लैब के लड़के जमकर रिजेंट की चोरी करते है। आवष्यकता से अधिक रिजेंट खरीदते है। आ जाइए टीबी अस्पताल, यहां के सीएमएस और ठेकेदार मरीजों का अंडा और मटन खा जाते है। अब आ जाइए, सीएमओ कार्यालय पर। यही वह कार्यालय हैं, जहां पर प्राइवेट अस्पताल, अल्टासाउंड एवं पैथालाजी के लाइसेंस के नाम पर खुला रेट है। एक दिन पहले शिकायतकर्त्ता उमेश गोस्वामी ने डीएम को एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएमओ और नोडल डा. एके चौधरी एक लाइसेंस पर तीन लाख लेते है। इस लिए इनका जो भी लाइसेंस आए उस पर हस्ताक्षर छानबीन के बाद ही करें। यही वह सीएमओ कार्यालय हैं, जहां पर एनएचआरएम के धन का जमकर बंदरबाट इसके प्रभारी डा. बृजेश शुक्ल और बाबू संदीप राय की मिली भगत से होता है। यही वह सीएमओ कार्यालय हैं, जहां पर सीएमओ के तीन अनमोल रतन है। एक डा. एके चौधरी, दूसरा डिप्टी सीएमओ डा. एसबी सिंह और तीसरा डा. बृजेश शुक्ल। यह वही सीएमओ कार्यालय जहां पर जांच के नाम मरे हुए मरीजों के साथ सौदा होता है। यह वही कार्यालय हैं, जहां के सीएमओ कप्तानगंल सीएचसी के एमओआईसी डा. अनूप चौधरी के मरे हुए बच्चे के साथ पीएमसी वालों से सौदा किया। इस कार्यालय में इतने पाप होते हैं, कि जिसका इसाफ उपर वाला करेगा। यह वही कार्यालय है, जहां पर सल्टौआ पीएचसी के एमओआईसी को मारने पीटने वाले अस्पताल वालों के खिलाफ मुकदमा तक नहीं दर्ज करवाया। कहने का मतलब इस विभाग में किसी को भी छोड़ा जाता है। मौके मिलने पर हलाल अवष्य किया जाता है।