बस्ती। जब रेडक्रास सोसायटी के सभापति का चुनाव नियम से हुआ तो फिर क्यों इतने सारे सवाल उठ रहे हैं? और क्यों सफाई देनी पड़ रही हैं? सवाल उन लोगों पर उठ रहे हैं, जिन लोगों ने रेडक्रास सोसायटी जैसी संस्था को सभापति चयन को कटघरें में खड़ा कर दिया। इतना विवादित बना दिया कि इसके लिए लोगों को आरटीआई का सहारा लेना पड़ रहा है। सर्वसम्मति से और बहुमत के आधार पर चुनाव होना/कराना दोनों अलग बात है। अगर वाकई सभापति के चुनाव में पारदर्षिता बरती गई होती तो इतने सारे सवाल न उठतें। चूंकि रेडक्रास सोसायटी से लोगों को उतना लेना-देना नहीं, जितना पद से। इसी लिए मारामारी हो रही है। आप लोगों को याद दिला दूं, कि जब पहली बार मुख्यालय से रेडक्रास सोसायटी के लोग इस लिए आए थे, ताकि आम सहमति बन सके और चुनाव कराने की आवष्यकता न पड़े, अपने भाषण में कहा था, कि सेवा करने के लिए पद का होना कोई जरुरी नहीं, उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति का नाम भी लिया था, जिन्होंने सेवा में एक मिसाल बनाया, वह भी बिना पद के। अगर वाकई किसी को सेवा करनी होती तो पद के लिए न तो वह परेशान और न लालायित ही रहता। पद तो डा. प्रमोद कुमार चौधरी के पास भी था, लेकिन वह अधिकतर रेडक्रास सोसायटी के कार्यक्रमों में दिखाई ही नहीं पड़ते थे, रक्तदान जैसे कार्यक्रम में अगर सभापति मौजूद न रहे, तो सवाल तो उठेगा ही। रेडक्रास सोसायटी कोई रोटरी क्लब या फिर लायंस क्लब जैसी संस्था नहीं है। जिनका पता तब चलता, जब शपथ-ग्रहण समारोह होता। फिर सवाल उठ रहा है, कि क्यों नहीं साधारण सभा की बैठक बुलाई जाती? और क्यों नहीं साधारण सभा के जरिए सभापति का चयन होता? सिर्फ यह कह देने से काम नहीं चलेगा, कि जो कुछ हुआ वह नियम से हुआ। नियम से तो डा. प्रमोद चौधरी का भी चयन हुआ था, तो फिर उन्हें हटाने के लिए क्यांे इतना बवाल किया? और क्यों अविष्वास प्रस्ताव लाया गया और सामूहिक इस्तीफा दिया गया? पहले और अब में फर्क सिर्फ इतना सा है, कि जो लोग पहले जिसका विरोध करते थे, आज वहीं लोग उन्हीं का समर्थन कर रहे है। पद की तो छोड़िए, जरा सोचकर देखिए कि आखिर निष्ठा क्यों बदली? किसी को क्या हासिल हुआ यश होगा, यह तो पता नहीं लेकिन एकता, प्यार, मोहब्बत और भाईचारा का खून अवष्य हुआ। किस तरह लोग अपने से पराए हुए, यह कुछ दिनों के भीतर लोगों को ही पता चल गया। कहा भी जाता है, कि सामूहिक इस्तीफा और अविष्वास प्रस्ताव देने से पहले यह निर्णय ले लेना चाहिए था, कि अगला सभापति कौन होगा? उस समय तो किसी तरह डा. प्रमोद चौधरी को हटाना और उन्हें नीचा दिखाने का मकसद था। लबनापार निवासी सुदृष्टि नरायन त्रिपाठी ने जन सूचना अधिकारी,(रेड क्रास सोसायटी) अपर जिलाधिकारी, जन सूचना अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6(1) के अंतर्गत इन्डियन रेड क्रॉस सोसायटी, शाखा बस्ती के 23 अप्रैल 2026 में चुनाव के सम्बन्ध में जानकारी मांगा है। पहला, इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी शाखा बस्ती के सभापति उपाध्यक्ष व कोशाध्यक्ष के विरुद्ध दिनांक 8-9 अक्टूबर 2025 को चुने गए सात कार्यकारिणी सदस्यों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव में अभी तक क्या कार्रवाई की गई, अविश्वास पर की गई नोटिंग एंव लिये निर्णय की प्रमाणित छायाप्रति दें, दूसरा, इन्डियन रेड क्रॉस सोसायटी, शाखा बस्ती के चुने गए सभापति डॉ प्रमोद कुमार चौधरी द्वारा दिनांक 20 मार्च 26 को अपना त्यागपत्र अध्यक्ष जिलाधिकारी बस्ती को सौप दिया था डाक्टर प्रमोद कुमार चौधरी सभापति के त्यागपत्र का अभी तक क्या कार्रवाई हुई, प्रमाणित साक्ष्य दें, तीसरा, 23 अप्रैल 26 को जनपद के सोशल मीडिया पर चल रहे समाचार से ज्ञात हुआ है कि उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में नए सभापति का चुनाव हुआ है क्या उक्त चुनाव अध्यक्ष महोदय जिलाधिकारी व उपाध्यक्ष जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी के आदेश से हुआ प्रमाणित साक्ष्य दें, चौथा, उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में 23 अप्रैेल 26 में हुये सभापति के चुनाव हेतु सदस्यों को दिये गये सुचना की प्रति एंव सदस्यों को सुचना की प्राप्ति की प्रमाणित छायाप्रति, पांचवा अविश्वास प्रस्ताव उपाध्यक्ष व कोशाध्यक्ष के लिए भी था, तो किस नियम के अंतर्गत चुने गए कुछ कार्यकारिणी सदस्यों की मीटिंग बुलाकर नियम विरुद्ध सभापति चुनने का अधिकार कहां से प्राप्त है, सब का प्रमाणित साक्ष्य और छठां, इन्डियन रेड क्रॉस सोसायटी, शाखा बस्ती के अध्यक्ष/जिलाधिकारी व उपाध्यक्ष/मुख्य चिकित्साधिकारी संज्ञान में था, उपरोक्त स्थिति में किस नियम के अंतर्गत बिना साधारण सभा को बुलाये यह चुनाव कराया गया, प्रमाणित साक्ष्य दें। जिन बिंदुओं की जानकारी आरटीआई के तहत मांगी गई, उन्हीं बिंदुओं को लेकर विवाद हो रहा है, अगर वाकई नियमों का पालन किया गया, तो क्यों नहीं कार्यकारिणी की बेैठक बुलाकर उसमें स्थित स्पष्ट की जा रही?