बस्ती। लेखपाल को लाख दो लाख दे दीजिए, जो चाहिए सो करवा लीजिए, इतने पैसे में तो लेखपाल कुछ भी कर सकते हैं, पैसा देने वाले के कहने पर किसान को मार सकते हैं, अपनी चार पहिया गाड़ी में बैठाकर घंटों बंधक बना सकते हैं, कब्जा दिलवा सकते हैं, और जेल भी भेजवा सकते, कहने का मतलब जो काम पुलिस पैसा लेकर करती है, वही काम अब लेखपाल करने लगे है। इसी तरह का एक मामला हर्रैया तहसील के बनगवां खास के लेखपाल राम प्रताप सिंह, कानूनगो विधा प्रसाद श्रीवास्तव का सामने आया। प्रदेश के यह पहले ऐसे लेखपाल होगें, जिन्होंने किसान को न सिर्फ बंधक बनाया, बल्कि उसे मारपीटा भी, इतना ही नहीं किसान राजू कुमार पुत्र मुन्ना लाल की जमीन पर पवन कुमार, विशाल, रवि पुत्रगण अयोध्या प्रसाद का अवैध कब्जा करवा दिया, जिसके पास एक इंच जमीन नहीं उसे कई एअर का मालिक बना दिया, चालान करके जेल अलग से भेज दिया, और यह सबकुछ लेखपाल और कानूनगो ने दो लाख के लिए किया। लेखपाल की ऐसी दबंगई इससे पहले कभी नहीं देखी गई, लेखपाल दौड़ाकर किसान को मार रहा है, लेखपाल और कानूनगो को जिन कब्जेदारों के खिलाफ कार्रवाई करके जेल भेजवाना चाहिए था, उन्हें एक षब्द भी नहीं कहा, बल्कि यह कहा कि तुम लोग कब्जा करो, देखते हैं, कि कौन रोकता है? किसान परसरामपुर थाने भी गया, लेकिन वहां से भी उसे कार्रवाई करने के बजाए भगा दिया, किसान ने सीएम, कमिष्नर, डीएम, एसपी और एसडीएम के यहां भी गुहार लगाया, लेकिन किसी ने भी किसान की आवाज नहीं सुनी। जिस किसान के बाबा दादा ने पवन कुमार, विषाल, रवि पुत्रगण अयोध्या प्रसाद के परिवार को बसाया था, उसी परिवार ने जमीन पर कब्जा कर लिया। बहाना करके लेखपाल तो गढढा की पैमाईश करने गए थे, लेकिन जब नोटों की गडडी मिली तो अवैध कब्जा करवा दिया।
अधिकारियों को लिखे पत्र में राजू कुमार पुत्र मुन्नालाल ने कहा कि 20 अप्रेैल 26 को दिन में लगभग डेढ़ बजे हल्का लेखपाल राम प्रताप सिंह, कानूनगो विधा प्रसाद श्रीवास्तव और परसरामपुर के सिपाही राजेश सिंह मेरे घर आए और मौके पर खड़ाकर पवन कुमार, विशाल, रवि पुत्रगण अयोध्या प्रसाद एवं अयोध्या प्रसाद पुत्र दुखी, ओमकार, अमित पुत्रगण सरजू प्रसाद मिलकर जबरदस्ती पैमाईश करवाने लगे। एक राय होकर मेरी जमीन पर नींव खोदने लगे, लाख कहने के बावजूद कि पहले पैमाईश करवा लो फिर नींच खोदो, नहीं माने, जाति सूचक षब्दों का इस्तेमाल करते लेखपाल और सिपाही बाल पकड़कर लात, घूंसों से मारने लगें, फिर लेखपाल अपनी चार पहिया में जबरिया बैठाकर अपहरण कर लिया, जान से मारने की धमकी देने लगे, सूनसान स्थान पर बंधक बनाए रखा। फिर लेखपाल ने फोन से विपक्षी को कहा कि तुम लोग जल्दी से दीवाल बना लो, तब मुझे बताना, तभी पत्नी ने थाने में जाकर सूचना दिया, और हम लोगों का शांतिभगं में चालान कर दिया, उसके बाद एसडीएम को भ्रमित करके जेल भेजवा दिया। पत्र में सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई।
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