मवाना/ मेरठ के थाना हस्तिनापुर और मवाना क्षेत्र में ग्राम हिमायूपुर में जमीन विवाद को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक तरफ ADG मेरठ जोन के जांच आदेशों के बावजूद ग्राम हिमायूपुर में अवैध कब्जे का मामला नहीं रुक रहा, वहीं दूसरी तरफ हस्तिनापुर पुलिस पर पीड़ित को बिना सूचना दिए शिकायत निस्तारित करने का आरोप लगा है।
क्या है पूरा मामला?
मामला हिमायूपुर स्थित खसरा संख्या 374 मि. की जमीन से जुड़ा है। पीड़िता रिंकी पत्नी अमित कुमार का आरोप है कि हापुड़ के निजामपुर निवासी अजयपाल पुत्र रमेश ने उनके प्लॉट पर जबरन कब्जा कर लिया है। आरोप के मुताबिक अजयपाल ने प्लॉट पर बनी दो दुकानों को तोड़ दी। और खेतों की मिट्टी डालकर भराव कर दिया।
रिंकी का दावा है कि उन्होंने 14 सितंबर 2020 को अशोक कुमार व शशि बाला, जहांगीरपुरी दिल्ली से 180.46 वर्ग मीटर और 539.98 वर्ग मीटर जमीन का विधिवत बैनामा कराया था। उनके अनुसार खसरा संख्या 374 की कुल 4250 वर्ग मीटर जमीन में से 2150 वर्ग मीटर अशोक कुमार 2007 में ही बेच चुके हैं। बाकी 2100 मीटर अपने पास रखी थी उसमें से 630 वर्ग मीटर जमीन पुलिस चौकी और 331 वर्ग मीटर सरकारी स्कूल को दी गई थी। शेष बची जमीन का बैनामा रिंकी पत्नी अमित कुमार को कर दिया था जो आबादी में हैं, जिसका स्टाम्प आबादी का दिया गया हैं
ADG के आदेश भी बेअसर
पीड़ित पक्ष का कहना है कि उन्होंने इस मामले की शिकायत SDM मवाना से की थी। इसके बाद ADG मेरठ जोन ने भी जांच के आदेश दिए। इसके बावजूद भू-माफिया पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ित परिवार पिछले कई महीनों से न्याय के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहा है।
आरोप है कि अजयपाल ने लेखपाल से मिलीभगत कर गलत रिपोर्ट लगवाई और आबादी की जमीन पर एकतरफा अवैध कुर्रे करवा लिए। जबकि यह पूरा मामला अभी SDM मवाना न्यायालय में लंबित है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि अजयपाल का बैनामा 22 नवंबर 2022 का है और वह कृषि भूमि का है, न कि आबादी का।
112 पर कॉल के बाद भागे आरोपी
स्थानीय लोगों के अनुसार ताजा घटना तब हुई जब पीड़ित ने 112 नंबर पर पुलिस को सूचना दी। पुलिस के मौके पर पहुंचते ही आरोपी अजयपाल और उसके साथी कब्जा छोड़कर भाग गए। ग्रामीणों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भूमाफिया के खिलाफ जीरो टॉलरेंस के निर्देशों के बावजूद जमीनी स्तर पर प्रशासनिक निष्क्रियता साफ दिख रही है। ADG के आदेश के बाद भी भू-माफिया लगातार भराव कर कब्जा करने में जुटा है।
हस्तिनापुर पुलिस पर गंभीर आरोप
इसी विवाद से जुड़े एक अन्य मामले में हस्तिनापुर थाना पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़ित पक्ष का कहना है कि हस्तिनापुर पुलिस ने जमीन विवाद की शिकायत को बिना सूचना दिए ही निस्तारित कर दिया। आरोप है कि पुलिस ने इस मामले में ADG मेरठ को भी गुमराह किया।
पीड़ित का दावा है कि वह दो बार अपने बैनामे के कागजात लेकर थाने दिवस में गया, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, सिर्फ आश्वासन दिया। पीड़ित का आरोप है कि भूमाफिया अजयपाल पुत्र रमेश पर मुकदमा दर्ज करने के बजाय पुलिस ने उल्टा पीड़ित को ही दोषी ठहरा दिया।
पुलिस का पक्ष
वहीं हस्तिनापुर पुलिस का कहना है कि शिकायतकर्ता से जमीन से संबंधित वैध कागजात और माननीय न्यायालय का स्थगन आदेश प्रस्तुत करने को कहा गया था। पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ता कोई वैध दस्तावेज या स्टे आदेश पेश नहीं कर सका। शिकायतकर्ता ने राजस्व विभाग पर गलत पैमाइश का आरोप लगाया, जो जांच में असत्य, निराधार और तथ्यहीन पाया गया। पुलिस का दावा है कि वर्तमान में मौके पर पूर्ण शांति व्यवस्था कायम है और किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं किया जा रहा है।

पीड़ित के सवाल
पुलिस के इस बयान पर पीड़ित पक्ष ने कई सवाल खड़े किए हैं। पीड़ित का कहना है कि अगर मौके पर शांति है तो भद्रकाली चौकी से लगे दोनों प्लॉट में भराव किसने किया? भराव करने वालों की जानकारी पुलिस को है। पीड़ित ने सवाल उठाया कि अगर शिकायत तथ्यहीन थी तो निस्तारण करने से पहले उसे सूचना क्यों नहीं दी गई? किस आधार पर और किस नियम के तहत शिकायत का निस्तारण किया गया?
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि बिना सूचना दिए जांच पूरी कर शिकायत निस्तारित कर दी गई। इससे साफ है कि पीड़ित को अपना पक्ष रखने का मौका तक नहीं दिया गया।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की भूमिका पर उठ रहा है। एक तरफ ADG स्तर से जांच के आदेश हैं, मामला SDM कोर्ट में लंबित है, 112 पर सूचना देने पर आरोपी मौके से भागते हैं, इसके बावजूद अवैध कब्जे की कोशिश जारी है। दूसरी तरफ पुलिस जांच को तथ्यहीन बताकर शिकायत निस्तारित कर देती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब प्लॉट भद्रकाली चौकी से सटा हुआ है और वहां दिनदहाड़े भराव हो रहा है, तो पुलिस को इसकी जानकारी न होना समझ से परे है। पीड़ित परिवार अब उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार लगा रहा है। मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजर है।
मंजीत सिंह की रिपोर्ट
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