बस्ती। सवाल उठ रहा है, कि आखिर मैक्स हास्पिटल के नीरज चौधरी का आका कौन है? क्यों यह व्यक्ति इतनी दंबगई से गलत काम कर रहा है, जब चाहता है, कुदरहा के एमओईसी और डाक्टर को गाली दे देता है, और जब चाहता कुदरहा सीएचसी से मरीज को उठाकर अपने अस्पताल ले जाता है। फार्मासिस्ट को तो यह कुछ समझता ही नहीं। यह भी सवाल उठ रहा है, कि क्या दबदबा बनाने के लिए ही इसने अपने हास्पिटल का उदघाटन बाबूजी से करवाया। तभी तो यह बाबूजी को अपना आका मानता है। बाबूजी के चलते सीएमओ की हिम्मत नहीं पड़ती कि वह इसके अस्पताल पर हाथ डाल सके, इसे डिप्टी सीएमओ डा. एके चौधरी और डिप्टी सीएमओ डा. एसबी सिंह का दुलारा भी कहा जाता है। अगर दुलारा न होता तो बिना सुविधा के अस्पताल न चलाता और न डंके की चोट पर सीएचसी के सामने बिना लाइसेंस के मैक्स पैथालाजी ही चलता, खुले आम बिना लाइसेंस के मेडिकल की दवा की दुकान चला रहा, डीआई तक इससे महीना लेकर जाते है। बाबूजी के चलते इसने सीएचसी के सारे लोगों को अपना गुलाम बना लिया, कोई इसके खिलाफ कार्रवाई करने को कौन कहे, बात भी नहीं करते। इसका नाम तब चर्चा में आया जब एक महिला के बच्चे का घड़ बाहर आ गया और सिर अंदर ही रह गया। दुनिया का यह पहला ऐसा केस होगा, जिसमें स्टाफ नर्स कुसुम की वजह से बच्चा न सिर्फ मर गया, बल्कि प्रसूता को इतना दर्द झेलना पड़ा, कि वह रह-रहकर बेहोष हो जाती। मैक्स हास्पिटल में जब स्टाफ नर्स ले गई तो उस समय बच्चे का धड़ बाहर था, और सिर महिला के पेट में था। ऐसा दर्दनाक वाक्या न तो किसी ने सुना और न किसी ने देखा ही होगा। इसके लिए उन लोगों के खिलाफ जितनी भी कड़ी से कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, जो लोग इस दर्दनाक हादसे के जिम्मेदार है। अस्पताल को तो सील कर दिया, लेकिन न तो मालिक और न स्टाफ नर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाया गया।

इन सबके अतिरिक्त जो सबसे अधिक चौकाने वाली बात है, वह है, सीएमओ और डिप्टी सीएमओ डा. एसबी सिंह की लापरवाही का। घटना हुए एक माह से अधिक हो गया, और सबकुछ जानते हुए सीएमओ और डिप्टी सीएमओ सोते रहें, इनकी नींद तब खुली जब डिप्टी सीएम के निर्देष पर लखनउ की टीम अस्पताल पर छापा मारने आई। जिस अस्पताल को डिप्टी सीएमओ डा. एसबी सिंह को एक माह पहले सील कर देना, उस अस्पताल को लखनउ की टीम के निर्देष पर सील किया। जिस स्टाफ नर्स कुसुम के खिलाफ पहले कार्रवाई कर देना चाहिए था, उसे एक माह बाद सीएचसी से हटाकर टीबी अस्पताल में अटैच कर दिया। लखनउ टीम का जागना और सीएमओ टीम का सोते रहना चर्चा का विषय बना हुआ है। अब वही अस्पताल का मालिक डिप्टी सीएमओ डा. एसबी सिंह के आगे पीछे बाबूजी का हवाला देकर सील को खोलवाने का प्रयास कर रहा है। हो सकता है, कि जिस तरह सल्टौआ के एमओआईसी को मारने वाले अमित हास्पिटल का सील खोल दिया, ठीक उसी तरह मैक्स हास्पिटल का भी आज नहीं तो कल खोल ही दिया जाएगा। अभी तो सौदेबाजी हो रही है, और मामला अभी गर्म भी है। बाबूजी की तो पता ही होगा, कि वह जिस हास्पिटल का उदघाटन करने जा रहे हैं, वह बाद में अनैतिक कार्यो के कारण कितना चर्चा में रहेगा। बाबूजी को चाहिए बजाए मैक्स हास्पिटल के नीरज चौधरी की मदद के उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने का दबाव सीएमओ पर डालना चाहिए, क्यों कि इसने बाबूजी के नाम को खराब किया। यह भी सही है, कि अगर बाबूजी अस्पताल का उदघाटन न करते तो यह इतना मनबढ़ न होता, और न एमओआईसी तक को अपषब्द ही कहता। सीएमओ, डिप्टी सीएमओ डा. एसबी सिंह एवं डिप्टी सीएमओ एके चौधरी को भी चाहिए कि अपने इस दुलारे से किनारा कर लें, और यह तब होगा, जब तीनों पैसे का मोह छोड़ेगें, जो कि संभव नहीं है। एक बार बाबूजी ने इसके लिए नो इंटी कर सकते हैं, लेकिन तीनों किनारा नहीं का सकते। यह पूरा जिला जानता है।