बस्ती। क्या आप लोगों ने कभी यह सुना है, कि सरकारी अस्पताल में जनरेटर मरीजों के कहने पर नहीं बल्कि बाबू के चाहने पर चलता है। बाबू चाहेगा तो चलेगा अगर नहीं चाहेगा तो नहीं चलेगा, भले ही आपरेशन वाली महिलाएं और उनके तीमारदार गर्मी में पसीना बहाते रहे। अब आप लोग समझ ही गए होगें कि वह बाबू कौन है, और वह सरकारी अस्पताल कौन? चलिए हम आपको बताते हैं, उस बाबू और अस्पताल का नाम। बाबू का नाम बजंरग प्रसाद और अस्पताल का नाम 100 बेड एमसीएच हर्रैया अस्पताल। जिले के यह पहले ऐसे पावरफुल बाबू हैं, जिनके बिना अस्पताल में एक पत्ता भी नहीं हिल सकता। जाहिर सी बात हैं, कि जो बाबू इतना पावरफल होगा, वह जाहिर सी बात हैं, कि सीएमएस के काफी करीब होगा। आप लोग बिलकुल यह न सोचिए कि अस्पताल का जनरेटर खराब है, या चलता नहीं होगा, जनरेटर खराब भी नहीं हैं, और यह चलता भी है। अब आप लोग सोच रहे होगें, जब मरीज के कहने पर लेबर रुम तक में जनरेटर नहीें चलता तो चलता किसके लिए है। आप लोगों को जानकर हैरानी होगी, जनरेटर रोज दो से तीन घंटा चलता, लेकिन यह सिर्फ कागजों में ही चलता है, और बकायदा लागबुक भी बजंरब बाबू भरते हैं, ईधन भी खरीदा जाता हैं। मान लीजिए अगर तीन घंटा भी जनरेगटर कागजों में चला तो 60 लीटर ईधन खर्च हुआ। 60 लीटर ईधन का दाम लगभग पांच हजार हुआ। यानि रोज पांच हजार के ईधन की चोरी की जाती है, इस चोरी में कितना हिस्सा सीएमएस का है, यह तो नहीं बता चला, लेकिन चोरी होती है, यह तो सबको पता है। इस तरह जनरेटर अगर कागजों में महीना भर चला तो डेढ़ लाख का बंदरबांट हुआ। इस तरह साल भर में सिर्फ जनरेटर के ईधन के नाम लगभग 18 लाख की चोरी हुई। मान लीजिए कि अगर साल भर में पांच लाख का भी ईधन का उपयोग हुआ तो फिर भी 13 लाख बजरंग बाबू की जेब से होते हुए सीएमएस की जेब में पहुंचा। यही वह चोरी का पैसा होता, जिससे कोई भी सीएमएस एक करोड़ देकर सीएमओ की कुर्सी खरीदता है। इस अस्पताल और जिला महिला अस्पताल के मैनेजमेंट को लेकर अगर नंबर दिया जाए तो जिला अस्पताल के सीएमएस का मैनेजमेंट हर्रैया के अस्पताल से अधिक मिलेगा। चोरी तो दोनों अस्पतालों में होती है, लेकिन खुले आम चोरी सिर्फ हर्रैया अस्पताल में ही होती है। यहां पर सीएमएस बराबर चेंबर में बैठते हैं, लेकिन हर्रैया वाली सीएमएस कब आती और कब जाती है, किसी को पता ही नहीं चलता, सिवाय बजंरग बाबू के। हर्रैया महिला अस्पताल में आज भी दो बजे के बाद सुरक्षा कर्मी और स्टाफ नर्स को छोड़कर कोई दिखाई नहीं देता। दो बजे के बाद अगर किसी प्रसूता को इलाज, दवा और खून की जांच एवं अल्टासाउंड की जरुरत पड़ जाए तो कोई नहीं मिलेगा। अस्पताल के लोग इस लिए इतना लापरवाह हैं, क्यों कि अस्पताल की सीएमएस लापरवाह है। इस अस्पताल का हर कर्मचारी पैसा ढूढ़ता हैं, कहां से पैसा आए, कि तलाष में रहता है, इसके लिए वह काउंटर पर मरीज भी देखता और बाहर की दवाएं भी लिखता। कहा भी जाता है, कि इस अस्पताल का निजाम इतना बिगड़ चुका है, कि अगर कोई ईमानदार और टाइट सीएमएस आ गया तो कामचोर और ईधन चोर का क्या होगा?
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