बस्ती। छह मई 2016 की जांच रिपोर्ट में टस्ट एसोसिएशन की भूमि को कानूनी तरीके से हासिल करने का उल्लेख किया गया हैं, कहा गया है, कि टस्ट को उससे संबधित संपत्ति को मार्गेज, लीज, एक्चेंज एवं डिस्पोज आफ करने का अधिकार हैं, तथा टस्ट एसोसिएशन के चर्च समिति को विक्रय, तबादला, बटवारा पटटा आदि करने का भी अधिकार दिया गया, मगर इसके लिए डीएम की अनुमति आवष्यक है। बिना डीएम के अनुमति के न तो विक्रय और न तबादला ही किया जा सकता है। इसी लिए लखनऊ डाइयोसिएन टस्ट एसोसिएषन लखनऊ कैंप के सचिव ‘लियाकत मारक्यूज खान’ ने ग्राम सिविल लाइन तप्पा हवेली स्थित गिरजाघर की भूमि को आधा प्रसाद चौधरी पुत्र बुद्वु चौधरी एवं विजयपाल चौधरी पुत्र राम लखन चौधरी के पक्ष में विक्रय करने की अनुमति मांगी थी, जिसे नहीं दी गई। अगर दे दी गई होती तो आज गिरजाघर की जमीन का मालिकाना हक आधा प्रसाद चौधरी पुत्र बुद्वु चौधरी एवं विजयपाल चौधरी पुत्र राम लखन चौधरी के पास होता। इसका मतलब यह हुआ, कि गिरजाघर की जमीन बेचने का कुचर्क पहले भी रचा गया। अब सवाल उठ रहा है, कि जब डीएम ने कोई अनुमति ही नहीं दी तो कौन चर्च की जमीन पर दुकान बनवाकर बेच रहा है? और क्यों बेच रहा है? सवाल यह भी उठ रहा है, कि क्या यह चर्च के विकास के लिए किया जा रहा है, या फिर नीजि लाभ के लिए? अगर चर्च के विकास के लिए किया जा रहा है, तो उसका खाता भी होना चाहिए, जिसमें दुकानों से हुई विक्री का धन जमा हो? स्कूल से होने वाली आय जमा हो, चर्च से होने वाले लाभ का पैसा जमा होना चाहिए, सबका हिसाब किताब हो, लेकिन जब तत्कालीन एसडीएम से यह सब मांगा तो उन्हें नहीं दिया गया। अगर यह सब कुछ नहीं है, तो यह माना जा सकता है, कि कुछ लोग दंगबगई से चर्च की जमीन पर दुकानें बनवाकर अनधिकृत रुप से धन कमाने की मंषा रखते है। यह कुछ ऐसे सवाल हैं, जो चर्च के उन लोगों पर उठ रहें हैं, जो चर्च की संपत्ति का नीजि तरीके से इस्तेमाल करके उससे लाभ पाना चाह रहे हैं। अगर इस जांच रिपोर्ट को अधिकारी पढ़ ले तो मिनटों में सालों की समस्या का निस्तारण हो सकता है, दिक्कत यह है, कि कोई अभिलेख को देखना ही चाहते हैं, अगर देखे होते तो कब का निस्तारण हो गया होता और चर्च की संपत्ति दुरुपयोग होने से बच जाती। देखा जाए तो वर्तमान में चर्च की संपत्ति का लाभ दो लोगों की जेबों में जा रहा, पहला अनिल लाल और दूसरा दुकानों का निर्माण कराने वाला ठेकेदार। 2016 में भी लाभ अनिल लाल और ठेकेदारों ने मिलकर लाभ कमाया था, और 2026 में भी दोनों मिलकर लाभ कमा रहे है। 2016 में जिस तरह गरीब दुकानदारों का लाखों रुपया डूब गया, ठीक इसी तरह 2026 में भी डूबने वाला है। इसी लिए बार-बार कहा जा रहा है, कि दुकानदार 2016 वाली गलती न करें, ओैर किसी को भी दुकान के लिए पैसा न दें। नहीं तो रोना पड़ेगा। कोई दुकानदार यह न समझे कि उन्होने जो 2016 में अनिल लाल को एक-एक दुकान के दो-दो लाख दिया था, वह इस बार के दुकान में एडजस्ट हो जाएगा। जैसा कि भोला चाय वाले ने 2016 में अनिल लाल को दो लाख दिया, दुकान और पैसा दोनों हाथ से चला गया। पूछने पर अनिल लाल कहते हैं, कि इस बार के दुकान में एडजस्ट हो जाएगा। चाय वाला पान वाला न जाने कितने ऐसे गरीब दुकानदार हैं, जिनसे पैसा तो ले लिया गया, लेकिन न तो उन्हें रसीद दी गई, और न पैसा ही वापस किया गया। सोमवार को मीडिया जब कमिष्नर से मिला तो उनसे एक ही बात कहा कि किसी तरह दो सौ साल पुराने चर्च की संपत्ति को बचा लीजिए, क्यों कि कुछ अनधिकृत लोग चर्च की जमीन पर दुकान का निर्माण करवाकर क्षति पहुंचा रहे है। यह भी कहा कि चर्च के विकास के लिए जो भी करना पड़े कीजिए, लेकिन चर्च की संपत्ति का दुरुपयोग मत होने दीजिए। कहा गया, कि जो पैसा चर्च के खाते में जाना चाहिए, वह करोड़ो रुपया ठेकेदार और अनिल लाल के खाते में जा रहा है। एक-एक दुकान की कीमत सात से आठ लाख वसूली जा रही है। उन्होंने कहा भी हम और मैडम डीएम चाहती है, कि चर्च की संपत्ति का दुरुपयोग न हो, कहा कि मेरे निर्देष पर ही निर्माण रुकवाया गया, लेकिन जब उन्हें बताया गया, कि निर्माण तो अंदर-अंदर जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि कोई पक्षकार उनके सामने सारे अभिलेख लेकर आ ही नहीं रहा है।