बस्ती। जिले का इतिहास गवाह है, कि यहां की जनता ने आज तक किसी धनपशु को न तो एमपी बनाया और न ही एमएलए। एक से एक धनपशु ने माननीय बनने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया, लेकिन जनता ने उनके पैसे का तो उपभोग कर लिया, लेकिन माननीय नहीं बनाया। माननीय बनने की तमन्ना लेकर आधा दर्जन धनपशु बोरे में नोट भरकर लाए, न जाने कितनी बोरी खाली हो गई, लेकिन उनका माननीय बनने का सपना जनता ने पूरा होने नहीं दिया, और न भविष्य में पूरा होने के आसार नजर आ रहे है। कोई भी धनपशु जिले की जनता को बेवकूफ न समझे, यहां की जनता सब जानती और समझती है। कहा भी जाता है, कि अगर नोटों से चुनाव जीता जा सकता, तो दयाशंकर पटवा, फूलन देवी के पति उम्मेद सिंह, बसंत चौधरी, विपिन शुक्ल, खरवार और जहीर अहमद उर्फ जिम्मी कब का सांसद और विधायक बन गए होते। फूलन देवी के पति उम्मेद सिंह जब लोकसभा का चुनाव हार कर वापस जाने लगे तो उन्होंने पत्रकारों से कहा था, कि जिले वालों ने एक डाकू के पति को लूट लिया। कहा कि जितना पैसा खर्चा किया, अगर उसका आधा वोट भी मिल जाता तो तसल्ली होती। अब जरा अंदाजा लगाइए, ठगबाज ‘जिम्मी’ अगर कप्तानगंज विधानसभा क्षेत्र से विधायक बन जाते तो क्षेत्र का क्या होता, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। जनता का मानना हैं, कि जितने भी धनपशु चुनाव हार कर गए, उनमें एक भी माननीय बनने लायक नहीं रहें। इसके लिए जिले की जनता बधाई की पात्र है, कि उन्होंने एक भी धनपशु को माननीय नहीं बनने दिया, अगर दिया होता जो आज हर धनपशु बोरे में नोट भरकर लाता और जीत कर चला जाता। जिले की जनता ने उन धनपशुओं को बता और दिखा दिया कि धन से जिला पंचायत अध्यक्ष और प्रमुख तो बना जा सकता है, लेकिन सांसद और विधायक नहीं। जो लोग अभी भी पैसे के बल पर चुनाव जीतने का सपना देख रहे हैं, उन्हें सपना देखने से पहले दयाशंकर पटवा, फूलन देवी के पति उम्मेद सिंह, बसंत चौधरी, विपिन शुक्ल, खरवार और जहीर अहमद उर्फ जिम्मी जैसे लोगों का हश्र देख लेना चाहिए। जिले की जनता को बेस से स्पेस तक ले जाने का सपना दिखाने वालों को यह नहीं भूलना चाहिए, कि जो काम मोदी और योगी नहीं कर सकते, वह काम आप कैसे कर पाएगें? अगर इस सवाल का जबाव बारीकी से तलाषेगें तो आप को सच्चाई का पता चल जाएगा। खुद सपना देखना और दूसरों को दिखाना दोनों अलग बात है। सपना देखने में कोई पांबदी नहीं हैं, लेकिन दिखाने में है। किसी भी नेता को ऐसा कोई भी सपना नहीं दिखाना चाहिए, जो पूरा ही न हो सकें। सपना उतना तक ही देखिए जो सच हो सके, वरना समाज में हंसी का पात्र बनकर रह जाएगें। वही लोग आप का मजाक उड़ाएगें, जिन्हें आप ने बेस से स्पेस तक ले जाने का सपना दिखाया। मीडिया के बल पर चुनाव जीतने वालों को यह समझ लेना चाहिए, कि आज तक मीडिया ने न तो किसी को चुनाव जीताया और न हरवाया। इस लिए मीडिया से जितना भी दूर रहेगें, आप की छवि उतनी अच्छी बनेगी, क्यों कि समाज में मीडिया की जो छवि हैं, वह किसी से छिपी हुई नहीं है। आज 10 में आठ व्यक्ति यह कहता हुआ मिलता है, कि मीडिया चोर और दलाल हो गई, इन्हें हजार पांच दीजिए और इनसे कुछ भी छपवा और चलवा लीजिए। अगर समाज में मीडिया की ऐसी छवि बनी है, तो सोच सकते हैं, कि मीडिया कहां जा रही है। जो नेता जितना भी मीडिया में रहना चाहते हैं, समाज उन्हें कुछ और समझती है। वर्तमान में जिन लोगों को पैसे के बल पर चुनाव लड़ने की संभावना की जा रही है, उनमें मनीश मिश्र, विपिन षुक्ल, तेजा और चांदनी चौधरी पत्नी मनोज चौधरी का नाम सबसे तेजी से उभर रहा है। इनमें कोई भी ऐसा नहीं हैं, जो चुनाव नहीं लड़ेगा, अभी से यह लोग प्रचार-प्रसार पर इतना पैसा खर्चा कर रहे हैं, कि चुनाव आते-आते न जाने कितना पैसा खर्च कर देगें, फिर भी जीतने की गांरटी नहीं है। इनमें चांदनी चौधरी हर हाल में चुनाव लड़ेगी, अगर इन्हें किसी दल से टिकट मिल गया तो ठीक वरना निर्दल लड़ेगी, लेकिन लड़ेगी जरुर। कहा जाता है, कि इनके पति मनोज चौधरी का अफ्रीका में बहुत बड़ा कारोबार है। मनीष मिश्र के बारे में कुछ बनाना ठीक नहीं है। महादेवा विधानसभा से तेजा नामक व्यक्ति चुनाव लड़ने के लिए इतने उतावले हैं, कि इनके साथ अभी से लक्जरी वाहनों का काफिला चलता है। इन्होंने अपना होडिगं और पोस्टर पूरे जिले में लगा रखा है। रही बात विपिन शुक्ल का तो यह पहले भी हर्रैया से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं, और इस बार भी इन्होंने ताल ठोंक दी है। इनके पास भी पैसे की कोई कमी नहीं है। इन्हीं का पांच करोड़ कप्तानगंज से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके जहीर उर्फ जिम्मी ठग लिया है। जिसका एफआईआर भी दर्ज है। अब आप समझ सकते हैं, कि इनके पास कितना धन होगा। अगर कोई मोबाइल, टेबलेट, सिलाई मशीन, साइकिल, चष्मा, आरसीसी बेंच, कंबल और साड़ी बांट कर चुनाव जीता जा सकता तो हर कोई इसी तरह चुनाव जीतना चाहेगा।