बस्ती। पांच साल तक सूखे की जिंदगी काटने वाले प्रमोद कुमार मिश्र का जब सूखा कटने की दिन आया तो प्रेम बहादुर सिंह कंुडली मारकर बैठ गए। पांच साल तक तो प्रेम बहादुर सिंह ने प्रमोद कुमार मिश्र की गैरहाजीरी में खूब मलाई काटा, लेकिन जब इनकी बारी आई तो दुकान का षटर ही गिरा दिया। मिश्राजी के दुकान के शटर की चाबी प्रेमजी के पास है, और प्रेमजी चाबी देने को तैयार नहीं, इन्हें डर है, कि अगर चाबी दे दिया और दुकान खुल गई, तो जेल की हवा तक खानी पड़ सकती है। प्रमोदजी चाहें जितना चिल्लाएगें, नेताओं के पास जाएगें, लेकिन इन्हें शटर की चाबी मिलने वाली नहीं है, और जब तक चाबी नहीं मिलेगी, इनकी बोहनी नहीं होगी, अब जरा अंदाजा लगाइए कि जो बाबू पांच साल तक एक रुपया नहीं पाया, और जब कुछ मिलने की बारी आई तो प्रेमजी ने षटर ही बंद कर दिया, बोहनी तभी होगी जब दुकान का शटर खुलेगा। सीएमओ साहब भी चाह रहे हैं, कि प्रमोद के दुकान का शटर खुल जाए और उनकी भी बोहनी हो जाए, और इसके लिए उन्होंने प्रेम से कहा भी कि पत्रावली रुपी चाबी दे तो, लेकिन लिखकर नहीं दे रहे है, क्यों नहीं लिखकर यह सोचनीय बात है। प्रमोद मिश्र दुकान का शटर खुलवाने के लिए पिछले डेढ़ माह से प्रयास कर रहे हैं, लेकिन सफल नहीं पा रहे है। ऐसा भी नहीं कि प्रेमबहादुर सिंह के दुकान का शटर खुला हुआ है। इनका भी षटर बंद है। यह न अपना शटर खोल पा रहे हैं, और न प्रमोद का खेलने दे रहे है। कागज में तो प्रमोद के दुकान की शटर खुली हुई हैं, लेकिन भौतिक में बंद है। जब प्रमोद ने प्रेम बहादुर से पत्रावली मांगी तो इनके एक चहेते ठेकेदार तिलमिला उठे और प्रमोद से इतना तक कह डाला कि आप की हिम्मत कैसे हुई प्रेम से पत्रावली मांगने की। इसी पत्रावली में कईयों की कुंडली बंद हैं, और प्रेम बहादुर सिंह अच्छी तरह जानते हैं कि अगर कुंडली खुल गई, तो इसकी चपेट में कई लोग आ जाएगें, वैसे अगर इन लोगों ने विजिलेंस के एसपी को पत्रावली नहीं दी तो सभी के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हो सकता है, और मुकदमा दर्ज कराने के लिए शिकायतकर्त्ता एमएलसी प्रतिनिधि हरीश सिंह ने एसपी को पत्र भी लिखा है। इसी पत्रावली में एक करोड़ 68 लाख का राज भी छिपा हैं, जिसे वेलनेस सेंटर के लिए उपकरण का 10-10 लाख के कोटेशन पर आर्डर दिया गया, जिसमें सामान ही नहीं आया, जबकि नियम हैं, कि एक वित्तीय साल में एक ही फर्म को सिर्फ एक बार ही कोटेशन पर आर्डर दिया जाए, लेकिन चोरी चमारी करने के लिए सीएमओ और बाबू सारे नियम कानून को तोड़ देते है। कभी सीएमओ कार्यालय चले जाइए, घुसते ही आप को भ्रष्टाचार की बदबू आने का एहसास होने लगता है। जिसका टेंडर होना चाहिए था, उसे कोटेशन पर आर्डर दिया, ताकि 50 फीसद कमीशन मिल सके। कहा भी जाता है, कि प्रेमबहादुर सिंह, अजय मिश्र, संदीप राय, अनिल चौधरी जैसे लोग समाज और सरकार दोनों के दुष्मन है, इनके खुले में रहने का मतलब लूटपाट करना। जब तक कोई ईमानदार सीएमओ नहीं आएगा, तब तक बेईमानों की चौकड़ी फलती फूलती रहेगी। अगर यह लोग पत्रावली नहीं भी देगें, या फिर जला देगें तो भी नहीं बच पाएगें। क्यों कि षासन स्तर पर कार्रवाई चल रही है।