बस्ती। एक लेखपाल को एसडीएम साहब ने इस लिए निलंबित कर दिया, क्यों कि उसने सोषल मीडिया पर यह लिख दिया था, कि चाय खतरे में, क्यों कि चीनी 70 रुपये में बिक रहा है? साहब ने इसे लेखपाल का शासन की नीतियों पर व्यंग करने टिपणी माना और त्वरित निलंबित कर दिया, निलंबित करने से पहले साहब ने बेचारे लेखपाल से यह तक नहीं पूछा कि क्यों तुमने लिखा। साहब का कहना है, कि टिपणी करने से पहले अगर अनुमति ले लेता तो कार्रवाई नहीं होती, पता चला कि इस तरह की टिपणी करने से पहले एसडीएम साहब से अनुमति लेनी पड़ती, साहब को यह नहीं मालूम कि कोई भी एसडीएम इस तरह की अनुमति नहीं देता, अगर किसी ने दे भी दिया तो उसे निलंबित होना पड़ेगा। योगीजी की वाहवाही लूटने के लिए साहब ने आव न देखा ताव सस्पेंड कर दिया। साहब अच्छी तरह जानते हैं, कि इस तरह की कार्रवाई हाईकोर्ट में एक मिनट भी नहीं टिक पाती, लेकिन फिर भी निलंबित कर दिया। मामला जौनपुर के शाहगंज तहसील का हैं, और यही के साहब ने अशोक कुमार यादव को इस लिए निलंबित कर दिया, क्यों कि लेखपाल ने सोषल मीडिया पर यह लिख दिया था, ‘मित्रों चाय खतरें में, चीनी पहुंची 70 रुपया’ लेखपाल को जीवनभर याद रहेगा कि उसे क्यों साहब ने निलंबित किया? यह उन सरकारी कर्मचारियों के लिए भी एक सबक हैं, जो अपने मन की बात सोशल मीडिया के जरिए कहना चाहते है। ऐसे लोगों को अपने मन की बात कहने का अधिकार नहीं हैं, बल्कि सुनने का दायित्व है। देष का यह पहला ऐसा मामला होगा, जहां पर लेखपाल को चीनी कर दाम 70 रुपया लिखने पर निलंबित होना पड़ा। अगर लेखपाल को यह मालूम होता कि मन की बात कहना और लिखना कर्मचारी आचार संहिता के खिलाफ हैं, तो षायद वह कभी न लिखता। साहब चाहते तो लेखपाल को बुलाकर समझा बुझा भी सकते थे, लेकिन ऐसा लगता है, साहब योगीजी के सामने हीरो बनना चाहते हो। साहब का मानना है, कि सरकारी सेवक के पद का उल्लेख करते हुए, सार्वजनिक मंच पर शासन की नीति और मंहगाई के लिए की गई टिपणी से आमजन में शासन की नीतियों के प्रति नकारात्मक धारणा बन सकती है। लेखपाल को अब बहाल होने के लिए न जाने कितने 70 रुपया खर्च करना पड़ सकता है।