बस्ती। तेज तर्रार नवागत कमिश्नर वैभव श्रीवास्तव ने जिला महिला अस्पताल और हर्रैया के महिला अस्पताल में अवैध रुप से संचालित हो रहे पीओ सीएल लैब की जांच शुरु कर दी। मंगलवार को उन्होंने सीएमओ को महिला अस्पताल के सीएमएस और पीओ सीएल से संबधित पत्रावली के साथ उपलब्ध होने का फरमान सुनाया। इससे पहले वह इसकी जांच अपर आयुक्त को दे चुके थे, और उन्होंने अपर आयुक्त से कहा कि महिला अस्पताल जाइए, और देखकर आइए कि क्या वहां पर दो प्राइवेट लैब संचालित हो रहे हैं? जैसे ही अपर आयुक्त जाने को तैयार हुए, तो कमिश्नर ने कहा कि रुक जाइए, पहले सीएमओ से बात कर लूं, उसके बाद उन्होंने सीएमओ से पूछा कि क्या दोनों सरकारी अस्पतालों में प्राइवेट लैब संचालित हो रहे हैं, इस पर सीएमओ ने हां में जबाव दिया, फिर पूछा कि पीओ सीएल लैब को संचालित करने और रिजेंट का करोड़ों का आर्डर और भुगतान किसके आदेश और किसके कहने पर दोनों सीएमएस कर रहे हैं? इस पर सीएमओ ने कहा कि इसकी जानकारी उन्हें नहीं हैं, इस पर कमिश्नर ने कहा कि आप जिले के नोडल हैं, और आप को इतना तक नहीं मालूम कि कैसे संचालन और भुगतान हो रहा है। यह भी पूछा कि क्या सरकारी अस्पताल में कोई प्राइवेट व्यक्ति काम कर सकता है, पर कहने लगे, नहीं, तो फिर कैसे पीओ सिटी और पीओ सीएल के कर्मी लैब की जांच और रिपोर्ट बना रहे हैं, और क्यों नहीं रिपोर्ट पर पैथालाजिस्ट की साइन हो रहा है? यह भी कमिश्नर को बताया गया, कि दोनों प्राइवेट फर्म ने जांच करने वाली मषीन को दान किया, और दान करने वाली फर्म रिजेंट का कारोबार नही कर सकती। बताया गया, कि अस्पताल सरकार का, मरीज सरकार का, व्यवस्था सरकार की और मलाई दोनों प्राइवेट फर्म काट रही है। यह भी बताया कि दोनों अस्पतालों में लगभग आठ एलटी कार्यरत हैं, जिनका काम ही खून निकालना और उसकी जांच करना हैं, सरकार एक एलटी में एक लाख से अधिक वेतन पर खर्च कर रही हैं, यानि सरकार हर माह आठ लाख वेतन पर खर्च कर रही है, और काम सौ रुपये का भी नहीं कर रहे हैं, यह लोग क्या करते हैं, किसी को नहीं मालूम, अगर यह लोग एलटी का काम ईमानदारी से करते तो प्राइवेट व्यक्ति नहीं कर पाते, और यही प्राइवेट व्यक्ति रिजेंट की हेराफेरी भी करतें है। जिस तरह कमिश्नर ने सीएमओ की क्लास ली है, उससे परिणाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है। कमिश्नर के संज्ञान में यह भी लाया कि दोनों अस्पतालों में नियम विरुद्व संचालित हो रहे पीओ सीएल को स्थापित कराने में जिला अस्पताल में तैनात फार्मासिस्ट शैलेंद्र राय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन्हें पीओ सीएल का पार्टनर भी कहा जाता है। अब देखना होगा, कि दोनों अस्पतालों के सीएमएस कमिश्नर के सामने कौन सी सफाई प्रस्तुत करतें हैं। मीडिया बार-बार कहती आ रही है, कि जिस पीओ सीएल का आरसी यानि सरकार से रेट कांटेक्ट ही नहीं, उससे किस दर में रिजेंट खरीदा जा रहा है, और क्यों ऐसे फर्म से रिजेंट खरीदा जा रहा है, जिसके दर का अनुबंध ही नहीं है? सबसे बड़ा सवाल यह है, कि जब दान देने वाले फर्म से कोई कारोबार ही नहीं किया जा सकता, तो फिर क्यों और किस लालच में किया जा रहा हैं? क्यों अनुबंधित दर वाले पीओ सिटी के दर से अधिक दर पर रिजेंट खरीदा जा रहा है? क्यों नहीं सीधे कंपनी से रिजेंट खरीदा जा रहा है? यह कुछ ऐसे सवाल हैं, जिसका जबाव न तो सीएमएस और सीएमओ के पास है। इससे बड़ा सवाल यह उठ रहा है, कि बगल के संतकबीरनगर और जनपद सिद्वार्थनगर के अस्पतालों में क्यों नहीं पीओ सीएल संचालित हो रहे हैं? क्यों सिर्फ बस्ती के दोनों महिला अस्पताल में ही संचालित हो रहे हैं? जाहिर सी बात अन्य जनपदों में डा. सुषमा जायसवाल और डा. अनिल कुमार एवं शैलेंद्र राय जैसा सीएमएस और फार्मासिस्ट नहीं होगें। जांच का परिणाम चाहें जो निकले वह अलग बात हैं, लेकिन जिस तरह से सीएमएस और फार्मासिस्ट का फर्जीवाड़ा सामने आया, वह काफी चौकाने वाला रहा। प्रदेष का बस्ती पहला ऐसा जनपद हैं, जहां के दो अस्पतालों में अवैध रुप से पीओ सीएल का लैब संचालित हो रहा है।