बस्ती। जो खंड विकास अधिकारी यह सोचते हैं, कि अगर उन्होंने सूचना आयोग में माफी मांगकर 25 हजार के जुर्माने से बच जाएगें, तो उन्हें अपनी सोच बदलनी होगी। अगर माफी मिलनी होती तो हर्रैया और बहादुरपुर के तत्कालीन बीडीओ विनय कुमार द्विवेदी को सूचना आयुक्त की ओर से माफी मिल गई होती। मीडिया और सूचना मांगने वाले को आजतक समझ में नहीं आया कि आखिर बीडीओ साहब लोग समय से सूचना क्यों नहीं देतें? और क्यों वह प्रधानों और सचिवों की गलती का खामियाजा 25 हजार का जुर्माने के रुप में चुकाते है। लगभग सभी जनसूचना अधिकारियों को यह मालूम हैं, कि वह सूचना न देकर बच नहीं सकते। सूचना तो उन्हें जुर्माना भरने के बाद भी देना पड़ेगा। जो जनसूचना अधिकारी समझदार होते हैं, वह सूचना उपलब्ध करा देते हैं, और जिन्हें यह डर रहता है, कि अगर उन्होंने सूचना दे दिया तो उनके भ्रष्टाचार का खुलासा हो जाएगा। यह भी सही है, कि अधिकतर सूचना ब्लैकमेल करने के लिए मांगी जाती है, अगर ऐसा नहीं होता तो मैनेज न हो जाते। अब सवाल उठ रहा है, कि आखिर वह माफी मांगने और मैनेज करने वाला काम ही क्यों करतें? तीन साल पुराने मामले में हर्रैया एवं बहादुरपुर के तत्कालीन बीडीओ विनय कुमार द्विवेदी पर सूचना न देने के आरोप में 25 हजार का जुर्माना लगा। इसी जुर्माने की माफी के लिए वह सूचना आयोग गए थे, लेकिन उन्हें माफी नहीं मिली। आयोग ने इनकी अपील का निरस्त कर दिया, और प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास, डीएम और सीटीओ को 25 हजार की धनराशि की वसूली बीडीओ के वेतन से करने का आदेश दिया।
- Loading weather...
- |
- Last Update 11 Apr, 02:51 AM
- |
- |
- खबरें हटके
- |
- ताज़ा खबर
- |
- क्राइम
- |
- वायरल विडिओ
- |
- वीडियो
- |
- + More
0 Comment