बनकटी/बस्ती। कहा भी जाता है, कि जब आरोपी को ही जांच अधिकारी बनाया जाएगा तो वह इतना बड़ा महान तो होगा नहीं कि खुद को गुनहगार साबित कर दें। जाहिर सी बात हैं, कि दरोगा साहब क्लीन चिट देगें ही। गलती आरोपी दरोगा की नहीं बल्कि एसओ मुंडेरवा की है, जिन्होंने एसडीएम के आदेष को ताक पर खुद न जांच करके उस दरोगा को जांच बना दिया जिसके उपर शिकायतकर्त्ता ने आरोप लगाया था। मुंडेरवा थाना क्षेत्र में एक वीडियो प्रकरण की जांच प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले में समाजसेवी गंगाराम यादव ने लालगंज थाना प्रभारी निरीक्षक विनय कुमार पाठक पर जांच में लापरवाही, पक्षपातपूर्ण रवैया तथा वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अनदेखी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। जानकारी के अनुसार, 23 अप्रैल 2026 को एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था, जिसमें एक मंदिर के पुजारी से जुड़ी कथित संदिग्ध गतिविधियों के आरोप लगाए गए थे। इस संबंध में 24 अप्रैल को आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी गई। प्रारंभिक जांच मुंडेरवा थाने के उपनिरीक्षक जावेद खान को सौंपी गई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि बिना पर्याप्त साक्ष्यों की गहन जांच किए ही मामले को निराधार बताते हुए रिपोर्ट प्रेषित कर दी गई। इसके बाद असंतुष्ट शिकायतकर्ता ने संपूर्ण समाधान दिवस (तहसील दिवस) में पुनः प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। इस पर एसडीएम सदर द्वारा निर्देश दिए गए कि लालगंज थाना प्रभारी स्वयं मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। हालांकि, शिकायतकर्ता गंगाराम यादव का आरोप है कि प्रशासनिक आदेशों के बावजूद जांच प्रक्रिया को गंभीरता से नहीं लिया गया और पुनः मुन्डेरवा थाना के एस आई जावेद खान को सौंप दिया। जिसे जावेद खान द्वारा पुनः दूसरे बार फिर मामले को निराधार करार दे दिया गया। इससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायतकर्ता ने बताया कि 25 मई 2026 को उन्होंने पुलिस अधीक्षक से मिलने का प्रयास किया, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने क्षेत्राधिकारी रुधौली को वीडियो साक्ष्य, दस्तावेज तथा ग्रामीणों के हस्ताक्षर युक्त अभिलेख भी सौंपे।

गंगाराम यादव का यह भी आरोप है कि तहसील दिवस में दिए गए प्रार्थना पत्र पर सीडीओ एवं एसडीएम द्वारा स्पष्ट निर्देशों के बावजूद उनका अनुपालन नहीं किया गया। शिकायतकर्ता ने कहा कि बार-बार एक जैसी रिपोर्ट प्रस्तुत कर मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित नहीं की गई तो वे न्यायालय का सहारा लेंगे। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण पर पुलिस या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामला स्थानीय स्तर पर जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रशासनिक आदेशों के अनुपालन को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।