बस्ती। सीएमओ कार्यालय में अगर कोई घोटाला निकलता है, तो लोग हैरान नहीं होते, हैरान इस लिए नहीं होते क्यों कि इस कार्यालय में जिस तरह आए दिन घोटाले की खबरे आती है, उसे देख अब लोग यह कहने लगे हैं, कि घोटाला होना इस कार्यालय के लिए कोई नई बात नहीं है। कोई ऐसा घोटाला नहीं जो इस कार्यालय में न हुआ हो, लोग अब इस कार्यालय को घोटाले वाला कार्यालय कहने लगे है। अगर किसी विभाग में छोटा-मोटा भी घोटाला निकल जाता तो उसे कार्यालय के अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक परेषान हो जाते, लेकिन सीएमओ कार्यालय के अधिकारी और बाबू परेशान नहीं होते बल्कि उसे अनसुना कर दूसरे घोटाले में लग जाते है। इस कार्यालय के सीएमओ पर भी कोई फर्क नहीं पड़ता। अभी तक आप लोगों ने न जाने कितने घोटालों के बारे सुना और पढ़ा होगा, लेकिन आज हम आप ऐसे घोटाले के बारे में बताने जा रहा हैं, जिसे सुनकर आप सभी भी चौंक जाएगें। क्या आप लोगों ने कभी यह सुना होगा कि किसी विभाग में अधिकारियों के इंकम टैक्स कटने में घोटाला हुआ होगा। अगर नहीं सुना तो हम आप सुनाते हैं, ऐसा घोटाला सीएमओ कार्यालय में हुआ, और इस करोडों के घोटाले की खबर डाक्टर्स को 13 साल बाद उस समय हुई, जब इंकम टेैक्स विभाग ने टैक्स जमा न करने का नोटिस थमाया। जब डाक्टर्स ने इसकी छानबीन सीएमओ कार्यालय में किया और सीएमओ को ईमेल और पत्रों के जरिए इंकम टेैक्स को जमा न करने के बारे में पूछा तो ऐसा जबाव मिला, जिसे सुनकर डाक्टर्स चकरा गए, सीएमओ ने बताया कि वित्त का काम देखने वाले तत्कालीन बाबू आकाष श्रीवास्तव वित्त रजिस्टर को आलमारी में बंद करके चला गया, आप लोगों को सुनकर और जानकर हैरानी होगी, कि 13 साल से बाबू की आलमारी में ताला लगा हुआ हैं, और किसी सीएमओ ने अभी तक ताला नहीं खुलवाया। इंकम टैक्स विभाग का नोटिस पाने वाले रिटायर डाक्टर मनोज मोहन मिश्र को जब आईटी विभाग का नोटिस मिला तो वह भी अन्य डाक्टर्स की तरह घबड़ा गए, वैसे भी आईटी, सीबीआई और ईडी का नाम सुनते ही लोगों के पसीने छूटने लगते है। लगभग 20 डाक्टर्स को आईटी विभाग से नोटिस मिला। डा. मनोज मोहन ने बताया कि जुलाई 2012 में वह सिद्वार्थनगर से तबादला होकर बस्ती आए थे, और उनकी पोस्टिगं रुधौली में हुई। साल 2012-13 का उनका और उनके साथ के लगभग 20 से 25 डाक्टर्स का इंकम टैक्स कटा, लगभग चार लाख का टैक्स प्रत्येक डाक्टर्स का कटा। बताया कि आईटी विभाग से जो उन्हें नोटिस मिला, उसमें कहा गया कि आप ने अभी तक 2013 का टैक्स जमा नहीं किया, और विभाग के पोर्टल पर भी टेैक्स जमा होना नहीं बता रहा है। बताया कि हम लोगों की परेषानी यह है, कि जब हम लोगों का टैक्स वेतन से कट गया तो वह टैक्स क्यों नहीं आईटी विभाग में जमा किया गया? कहा कि अगर जमा किया गया होता तो आईटी विभाग के पोर्टल पर अवष्य दर्षाता। बताया कि जब हमने इसकी जानकारी वर्तमान सीएमओ से पत्रों और ईमेल के जरिए मांगी तो गोलमोल में जबाव दिया, कभी कहते हैं, कि बाबू ताला बंदकर चला गया, कभी कहते हैं, कि बाबू को बुलवाकर ताला खोलवा रहा हूं, कभी कहते हैं, कि चाबी नहीं मिल रही है। सवाल यह उठ रहा है, कि अगर आकाष श्रीवास्तव जिले से बाहर तबादला होकर गए तो चार्ज भी देकर गए होगें, और चार्ज षीट पर सीएमओ के हस्ताक्षर भी होगें, ऐसा तो हैं, नहीं कि बिना चार्ज के आदान प्रदान के बाबू आलमारी में ताला बंदकर चला गया होगा, मान लीजिए चला भी गया हो, तो फिर सीएमओ ने क्यों नहीं अभी मजिस्टेट की देखरेख में आलमारी का ताला तोड़वाया, अगर 13 साल तक आलमारी का ताला नहीं खुलता तो किसी बड़े साजिश की ओर ईषारा करता है, वित्त रजिस्टर लेकर चले जाना, गंभीर अपराध माना जाता है, उससे बड़ा सवाल अभी तक क्यों नहीं इन 13 सालों में एक भी सीएमओ ने वित्त रजिस्टर के गायब होने का एफआईआर दर्ज करवाया? यह मामला तत्कालीन सीएमओ डा. जेएलएम कुशवाहा के कार्यकाल है। इस बात की संभावना जताई जा रही है, कि वित्त रजिस्टर इस लिए गायब कर दिया गया, क्यों कि उसमें बहुत बड़ा गोलमाल किया गया होगा। वैसे भी इस कार्यालय में कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए पत्रावली को गायब करना आम बात हो गई, जैसा कि प्रेमबहादुर सिंह 40 लाख के फर्जी भुगतान के मामले में पत्रावली को गायब कर चुके हैं, लेकिन अभी तक सीएमओ ने न तो पत्रावली के गायब होने का एफआईआर दर्ज करवाया और न इनके खिलाफ ही कोई कार्रवाई किया। इस कार्यालय में घोटाला और कार्रवाई से बचने के लिए सबसे आसान पत्रावली और रजिस्टर को गायब करना माना जा रहा है। बाबू जानता है, कि साहब उनके खिलाफ कोई कार्रवाई इस लिए नहीं कर सकते, क्यों कि उनके पास साहब का भी काला चिठठा रहता है। अब जरा अंदाजा लगाइए, कि इस 40 लाख के फर्जी भुगतान में जब साहब शामिल रहेगें तो एफआईआर और कार्रवाई कौन करेगा? अब डाक्टर्स के सामने आईटी विभाग के नोटिस का जबाव देना बड़ी समस्या हो गई हैं, अगर सीएमओ ने इस मामले में कोई लिखित जबाव नहीं दिया तो सभी डाक्टर्स को इंकम टैक्स तो जमा करना ही होगा, साथ ही कार्रवाई और जुर्माने को भी झेलना होगा।