बस्ती। जिस तरह पंचायत चुनाव में तीन लाख से अधिक फर्जी वोटर्स का खुलासा हुआ, उससे 2027 का चुनाव फर्जी वोटर्स के नाम होने वाला है। चूंकि अब अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन हो चुका हैं, और जो भी फर्जी वोट कटेगें, वे हाईकोर्ट में दाखिल अपील के निर्णय के बाद ही कटेंगे, चुनाव और मतदाता सूची के मामले में न्यायालय किस तरह कछुआ का चाल चलता हैं, यह सभी ने देखा, मतदान और कार्यकाल समाप्त हो जाता है, लेकिन निर्णय नहीं हो पाता, इसी को देखते हुए अधिकांश लोग कोर्ट नहीं जाते, हाईकोर्ट भी अधिक से अधिक मामले को निस्तारित करने के लिए डीएम को आदेश देती है, जैसा कि विक्रमजोत ब्लॉक के ग्राम पंचायत इमिलिया में राम आषीष सिंह के मामले में हुआ, जिलाधिकारी न्यायालय तो हाईकोर्ट से भी धीमा चाल चलता है। अपीलकर्त्ता को तारीख पर तारीख मिलने के आलावा और कुछ नहीं मिलता। सच तो यह है, कि राज्य निर्वाचन आयोग और प्रशासन दोनों की मंशा फेयर चुनाव कराने की नहीं रहती, अगर रहती तो विधानसभा और पंचायत चुनाव के मतदाता सूची में तीन लाख 20 हजार वोटर्स का अंतर न होता। सिर्फ फेयर चुनाव कराने का दावा करने से फेयर चुनाव नहीं हो जाता, जब तक फेयरनेस न दिखाई दे। फेयरनेस तभी दिखाई देगा, जब मतदाता सूची फेयर होगा। चूंकि डीएम लोगों ने मतदाता सूची को लेकर पीसी करना बंद कर दिया, इस लिए डीएम को भी सच्चाई का पता नहीं चल पाता। पता नहीं क्यों आजकल के कमिश्नर और डीएम पीसी करने से कतराते हैं, जब कि पीसी करने से मीडिया को नहीं बल्कि प्रशासन को ही लाभ होगा। इसे एक अच्छी परम्परा भी कहा गया। कहा भी जाता है, कि मतदाता सूची तब तक फेयर नहीं हो सकता, जब तक बीएल, सुपरवाइजर और एसडीएम फेयर नहीं होगें। डीएम लोग तो चाहते हैं, कि कोई मतदाता सूची पर सवाल न खड़े, लेकिन उनके अकेले के चाहने से क्या होता हैं, जब तक बीएलओ, सुपरवाइजर और एसडीएम नहीं चाहेगें। यह लोग इस लिए नहीं चाहेगें क्यों चाहने से इनकी कमाई जो बंद हो जाएगी। इन लोगों के लिए डीएम की इज्जत का कोई मायने नहीं, इन्हें तो बस लक्ष्मी से ही मतलब रहता हैं, मलाई यह लोग खाए और हाईकोर्ट में डीएम तलब हों। जिस दिन डीएम लोग फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने लगेगें, उसी दिन फर्जीवाड़ा बंद हो जाएगा। यह तो सही है, कि अगर इमिलिया में 200 फर्जी वोट बने तो इसे किसने बनाया? जाहिर सी बात हैं, कि बीएलओ, सुपरवाइजर और एसडीएम ने बनाया, और क्यों हाईकोर्ट के आदेष पर 43 वोट फर्जी काटे गए? बस्ती की डीएम को बीएलओ, सुपरवाइजर और एसडीएम के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए यह बहुत बड़ा आधार बन सकता हैं। लेकिन इसके लिए ‘विलपावर’ की आवष्यकता होती है। पंचायत के मतदाता सूची के अनुसार गौर ब्लॉक सबसे अधिक फर्जीवाड़ा करने वाला ब्लॉक बन गया है। इस ब्लाक में सबसे अधिक 176068 मतदाता, बस्ती सदर में अचानक यह आकड़ा 175378 पहुंच गया। सल्टौआ में 167420, परसरामपुर में 167322, रामनगर में 143711, बहादुरपुर में 140443, साउंघाट में 143067, हर्रैया में 137887, विक्रमजोत में 124728, बनकटी में 128618, रुधौली में 119735, कुदरहा में 115838, दुबौलिया में 97328 एवं कप्तानंगज में सबसे कम 80461 मतदाता है। आकड़े देखकर आप लोगों को लग गया होगा, कि फर्जीवाड़ा हुआ, सवाल उठ रहा है, कि सबसे कम ग्राम पंचायत वाले ब्लॉक अधिक और सबसे अधिक ग्राम पंचायत वाले ब्लॉक में सबसे कम मतदाता कैसे हो गए? सदर ब्लॉक के आकड़े को देखकर सबसे अधिक हैरानी होती है। सबसे अधिक ग्राम पंचायत वाला परसरामपुर ब्लॉक में चौथे स्थान पर है।
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