बस्ती। प्रशासन और संगठन के लोग तो चिल्ला रहें हैं, कि ईधन की कोई कमी नहीं, लोग अफवाहों पर ध्यान न दें, लेकिन यह नहीं देख रहे हैं, कि बाइक और कार मालिक घटतौली ओैर अधिक मूल्य का शिकार हो रहा है। घटतौली और अधिक मूल्य का शिकार होने वाले कईयों ने बताया कि एक तो लाइन में लगो, उपर से घटतौली और अधिक मूल्य का शिकार हो, आखिर हम लोग क्या-क्या झेले? सवाल करते हैं, कि क्या यही मोदी, योगी और स्थानीय प्रशासन की व्यवस्था हैं? कहते हैं, कि जिस बाइक की टंकी एक हजार में और कार की तीन-चार हजार में फुल हो जाती थी, वह क्राइसिस के समय 13-14 सौ और साढ़े चार, पांच हजार में फुल हो रही है। जनता शिकायत और विरोध इस लिए नहीं करतीे कि क्यों कि वह उस पत्रकार का हर्ष देख चुकी है, जिसने यह दिखाने का प्रयास किया कि जनता कितना परेशान हैं, ईधन रहते हुए भी पंप वाले ईधन समाप्त हो जाने का बहाना करते, इसी बात पर दुबखरा पंप का गुर्गा आता है, और पत्रकार के साथ हाथापाई करते हुए बहुत ही भददी-भददी गाली देता, यह जानते हुए कि उसकी हरकत कैमरे में कैद हो रही है, फिर भी उसकी हिम्मत तो देखिए। इसके बाद भी प्रशासन अगर ऐसे पंप के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता तो यह माना जा सकता है,

कि एक पेटोल पंप के सामने प्रशासन कितना लाचार और कमजोर साबित हुआ। कार्रवाई न करने के पीछे अधिकांश पंपों का मालिक नेताओं का होना माना जा रहा है। यही कारण है, कि जनता सबकुछ सह लेती, नेताओं और प्रशासन को बुराभला कह लेती, लेकिन विरोध नहीं करती, इस लिए नहीं करती क्यों कि वह पत्रकार का हर्ष देख चुकी है। विरोध करने का मतलब पेटोल पंप वाला ग्राहक को मार-मार कर भूरता बना देना हैं। इसी लिए जनता अधिक मूल्य देना और कम ईधन लेना पसंद कर रही है, लेकिन दंबग और चोर पेटोल पंप मालिकों और उनके गुर्गो से अपमानित और मार खाना नहीं। शिकायत करने के बारे में ग्राहक अच्छी तरह यह जानता हैं, कि वर्तमान समय में प्रशासन किसी भी पेटोल पंप के खिलाफ इस लिए कार्रवाई करना नहीं चाहेगा, क्यों कि उसे हालात बिगड़ने का डर है। इसी डर का फायदा कुछ बेईमान पेटोल पंप वाले उठा रहे है। ऐसे में इन्हें जहां ईमानदारी का परिचय देकर मोदी और योगी के कथनों को मजबूत करना चाहिए, वही यह लोग बेईमानी करके सरकार और प्रशासन दोनों को बदनाम कर रहे है।
ऐसे समय में पंप मालकों को देशभक्ति का परिचय देना चाहिए, लेकिन वह इसे अवसर मानते हैं, न कि देशभक्ति। स्थानीय प्रशासन का ऐसे लोगों पर इस लिए अधिक अकुंश नहीं रहता, क्यों कि प्रशासन और जिला पूर्ति कार्यालय के लोग समय-समय पर इनसे लाभान्वित होते रहते है। वहीं पर अगर बात करें, माप-बांट विभाग के लोगों की तो, अगर आज पूरा जिला घटतौली का शिकार हो रहा है, तो उसका सबसे बड़ा कारण इस विभाग के लोगों को ही माना जा रहा है। इस विभाग की हनक तो पूरे साल न तो सुनाई देती और न दिखाई ही देती। अब आ जाइए संगठन की तो इसके पदाधिकारी भी पेटोल पंपों के मालिक ही होते हैं, क्या इनसे कोई यह उम्मीद कर सकता है, कि यह कोई भ्रष्ट पेटोल पंप के मालिक के खिलाफ कार्रवाई भी करवा सकते हैं, करना तो बहुत दूर की बात है। कुछ पेटोल पंप तो जमाखोरी का काम भी कर रही हैं, ईधन रहते हुए भी मना कर देते हैं, वहीं रात के अंधेरे में लोग बड़े-बड़े डमों में भर कर ले जाते है। जिनको ईधन की अधिक आवष्यकता होती है, उन्हें जमाखोर उपलब्ध करा देते है। मिलावट खोरी का मामला इस लिए संज्ञान में नहीं आ रहा है, क्यों कि सरकार ने जब से किरोसिन तेल को बंद कर दिया, तब से मिलावट की घटनाएं सामने नहीं आ रही है, वरना ऐसे अवसरों पर तो सबसे अधिक कमाई मिलावट के जरिए होने की संभावना बनी रहती है। ग्राहकों को यह लगा कि चलो लाइन लगने के बाद ईधन तो मिला, रही बात घटतौली और चोरी की तो उसकी षिकायत करने से क्या फायदा जब कोई कार्रवाई ही नहीं होनी है। इस तरह का दर्द एक नहीं बल्कि अनेक वाहन मालिकों ने मीडिया के सामने बयां किया। प्रशासन को अफवाहों पर ध्यान ने देने की अपील के साथ-साथ यह भी अपील करना चाहिए, कि अगर कोई पंप वाला अधिक मूल्य लेता है, या फिर घटतौली करता है, तो उसकी शिकायत करें, इसके लिए प्रशासन को नंबर जारी करना चाहिए। ताकि जनता कम से कम शिकायत तो कर सके, भले ही कार्रवाई न हो।
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